अरुणाचल में बांध विरोधी प्रदर्शन तेज, हिरासत में भूख हड़ताल और स्वास्थ्य बिगड़ा

बांध के विरोध में 23 अक्टूबर को हुई हिंसा में कथित तौर पर शामिल होने के आरोप में कम से कम 26 लोगों को गिरफ्तार किया गया है
अरुणाचल प्रदेश में सियांग नदी के दोनों किनारों पर बसे पारोंग और रिव गांव, बड़े बांध परियोजनाओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों में सबसे आगे रहे हैं। यहां के निवासी खड़ी ढलानों पर सीढ़ीदार खेत बनाकर धान और संतरे उगाते हैं, जो उनकी आजीविका का मुख्य आधार हैं।
अरुणाचल प्रदेश में सियांग नदी के दोनों किनारों पर बसे पारोंग और रिव गांव, बड़े बांध परियोजनाओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों में सबसे आगे रहे हैं। यहां के निवासी खड़ी ढलानों पर सीढ़ीदार खेत बनाकर धान और संतरे उगाते हैं, जो उनकी आजीविका का मुख्य आधार हैं।
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अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट जिले में सियांग नदी पर प्रस्तावित एक बड़े बांध के विरोध में 23 अक्टूबर को हुई हिंसा में कथित तौर पर शामिल होने के आरोप में कम से कम 26 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें पांच नाबालिग भी शामिल हैं।

गिरफ्तार किए गए लोगों में वकील और एक्टिविस्ट एबो मिली तथा युवा नेता ओतुल जेरांग शामिल हैं। इन दोनों ने 24 अक्टूबर को पासीघाट पुलिस स्टेशन में आत्मसमर्पण कर दिया था।

मिली अभी भी पुलिस हिरासत में भूख हड़ताल पर हैं। जेरांग ने अपनी तबीयत बिगड़ने के बाद अपना अनशन खत्म कर दिया। विरोध प्रदर्शनों के सिलसिले में आत्मसमर्पण करने के बाद, दोनों ने हिरासत में ही अनशन शुरू कर दिया था। जेरांग, जो पहले से ही कुछ स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं और उन्हें नियमित दवाएं लेनी पड़ती हैं, वे 25 अक्टूबर से अनशन पर थे।

ईस्ट सियांग के पुलिस अधीक्षक पंकज लांबा द्वारा 26 अक्टूबर को जारी एक बयान के अनुसार, 23 अक्टूबर की घटनाओं के संबंध में आठ मामले दर्ज किए गए हैं। पूछताछ के लिए छह अन्य लोगों को हिरासत में लिया गया है। मामले की जांच चल रही है।

ये गिरफ्तारियां 'सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट' और इसकी 'प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट' (पीएफआर) से जुड़ी गतिविधियों के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद की गई हैं। 23 अक्टूबर को, इस परियोजना का विरोध कर रहे समूहों द्वारा बुलाए गए 12 घंटे के बंद के दौरान यह विरोध और तेज हो गया।

प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि पीएफआर से जुड़े काम को तुरंत रोका जाए, हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा किया जाए, दर्ज की गई प्राथमिक सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) को रद्द किया जाए, और परियोजना के लिए तैनात केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के जवानों को वापस बुलाया जाए।

विरोध के चार दशक

प्रस्तावित 11,200 मेगावाट का एसयूएमपी ब्रह्मपुत्र के मुख्य चैनल सियांग पर बनाया जाएगा। सरकार का कहना है कि यह परियोजना चीन की प्रस्तावित 60,000 मेगावाट मेडोग जलविद्युत परियोजना अपस्ट्रीम के लिए एक रणनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा है। यह भी तर्क दिया गया है कि बांध भारत की जल सुरक्षा की रक्षा करने और बाढ़ को नियंत्रित करने में मदद करेगा।

लेकिन इस परियोजना को छात्र समूहों और सियांग के 27 से अधिक गांवों के निवासियों के निरंतर विरोध का सामना करना पड़ा है। सरकार के थिंक-टैंक नीति आयोग ने 2017 में इस परियोजना का प्रस्ताव रखा था, हालांकि कुछ जगह 1980 के दशक के स्थानीय प्रतिरोध का पता चलता है, जब पहली बार सियांग पर बांध प्रस्तावित किया गया था।

निवासियों को डर है कि यह परियोजना पैतृक भूमि को डुबो देगी, गांवों को विस्थापित कर देगी और हिमालय के भूकंपीय रूप से सक्रिय और जैव विविधता वाले हिस्से में पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचाएगी।

2024 में विरोध फिर से तेज हो गया, इन रिपोर्टों के बीच कि केंद्र सरकार ने प्रारंभिक सर्वेक्षण के हिस्से के रूप में राज्य के स्वामित्व वाली नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (एनएचपीसी) द्वारा ड्रिलिंग की सुविधा के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों को तैनात करने की योजना बनाई है।

हाल ही में पीएफआर तैयार करने के प्रयासों ने और अधिक विरोध प्रदर्शनों को प्रेरित किया है। रिपोर्ट का उद्देश्य प्रारंभिक तकनीकी, भूवैज्ञानिक और जलवैज्ञानिक अध्ययनों के माध्यम से परियोजना की व्यवहार्यता का आकलन करना है। निवासियों ने सर्वेक्षण कार्य को अवरुद्ध करने की मांग की है, जबकि पासीघाट के निचले जिले के संगठन भी परियोजना के खिलाफ लामबंद हो गए हैं।

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