

पश्चिम बंगाल के सागर द्वीप की तटरेखा लगातार सिकुड़ रही है। समुद्र का बढ़ता जलस्तर और तटीय कटाव न केवल द्वीप के पर्यावरण के लिए चुनौती बन रहे हैं, बल्कि गंगासागर मेले के प्रमुख धार्मिक स्थल कपिल मुनि आश्रम के आसपास का तटीय इलाका भी इसकी चपेट में है। नेशनल सेंटर फॉर सस्टेनबल कोस्टल मैनेजमेंट (एनसीएससीएम) के आकलन में सागर द्वीप की 44.55 फीसदी तटरेखा पर दीर्घकालिक कटाव दर्ज किया गया है। वहीं, अल्पकालिक विश्लेषण में कटाव से प्रभावित तटरेखा का हिस्सा बढ़कर 54.67 फीसदी पाया गया है।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की पूर्वी क्षेत्रीय पीठ ने पश्चिम बंगाल सरकार और राज्य तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण को तटीय कटाव रोकने के लिए संरक्षण संबंधी उपाय प्रभावी ढंग से लागू करने का निर्देश दिया है। अधिकरण ने खास तौर पर सागर द्वीप के लिए तैयार इंटीग्रेटेड कोस्टल जोन मैनेजमेंट (एनसीएससीएम) की सिफारिशों और (आईसीजेडएम) को लागू करने को कहा है।
प्राकृतिक उपाय लागू करने की सिफारिश
एनसीएससीएम की अंतरिम रिपोर्ट में सागर द्वीप के कटाव प्रभावित इलाकों में केवल तटबंधों को मजबूत करने के बजाय प्राकृतिक तटीय संरक्षण प्रणालियों को विकसित करने पर जोर दिया गया है।
रिपोर्ट में शिवपुर सहित कटाव प्रभावित क्षेत्रों में प्राकृतिक तटीय सुरक्षा प्रणाली यानी लिविंग शोरलाइन विकसित करने की सिफारिश की गई है। इसके तहत मैंग्रोव और अन्य स्थानीय वनस्पतियों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इनका उद्देश्य तटीय क्षेत्र को स्थिरता देना और समुद्र की ओर से आने वाले अवसाद के जमाव को बढ़ावा देना है। मैंग्रोव की जड़ें तटीय मिट्टी को बांधने और लहरों के प्रभाव को कम करने में भी भूमिका निभाती हैं।
रिपोर्ट में कपिल मुनि आश्रम के आसपास के समुद्र तट को बचाने के लिए बीच देखभाल का सुझाव भी दिया गया है। इस प्रक्रिया में समुद्र तट पर समय-समय पर रेत और उपयुक्त गाद डालकर कटाव से हुए नुकसान की भरपाई की जाती है। इसके अलावा सागर द्वीप के लिए तैयार आईसीजेडएम योजना और तटरेखा प्रबंधन योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने की सिफारिश की गई है।
गंगासागर मेले के क्षेत्र पर भी संकट
सागर द्वीप का तटीय कटाव केवल प्राकृतिक भू-आकृति में बदलाव का मामला नहीं है। इसका सीधा संबंध द्वीप पर रहने वाले लोगों, तटीय पारिस्थितिकी और गंगासागर मेले के आयोजन से भी है। कपिल मुनि आश्रम के आसपास का समुद्र तट इस लिहाज से विशेष महत्व रखता है। समुद्र तट की स्थिति में बदलाव और लगातार कटाव से इस क्षेत्र की संवेदनशीलता बढ़ रही है।
यह मामला एनजीटी द्वारा स्वत: संज्ञान लेकर दर्ज किया गया है। इस मामले में समुद्र के बढ़ते जलस्तर, तटरेखा में बदलाव और कटाव से जुड़े पर्यावरणीय पहलुओं पर विचार किया जा रहा है।
छह महीने में देनी होगी कार्रवाई रिपोर्ट
कार्यवाही के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से प्रस्तुत रिपोर्टों में तटबंधों को मजबूत करने, मैंग्रोव पौधारोपण और प्राकृतिक आधारित तटीय संरक्षण उपायों का उल्लेख किया गया था। इन रिपोर्टों और उपलब्ध अभिलेखों पर विचार करने के बाद अधिकरण ने राज्य सरकार और पश्चिम बंगाल राज्य तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण को एनसीएससीएम की सिफारिशों तथा आईसीजेडएम योजना को प्रभावी तरीके से लागू करने का निर्देश दिया।
अधिकरण ने राज्य तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण को छह महीने के भीतर कोलकाता स्थित अधिकरण के रजिस्ट्रार के समक्ष विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने को भी कहा है। इसमें उठाए गए संरक्षण संबंधी कदमों और सिफारिशों के अनुपालन का ब्योरा देना होगा।
इस मामले की सुनवाई करने वाले न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी , विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए. सेंथिल वेल और ईश्वर सिंह की पीठ ने इन निर्देशों के साथ मामले का निस्तारण कर दिया है।