धरती धंसने का खतरा बढ़ा: कहीं सालाना 217 मिमी नीचे जा रही जमीन; 107 देशों के 465 शहरों का अध्ययन

उपग्रह आंकड़ों से नौ वर्षों के भू-धंसाव का विश्लेषण के बाद विशेषज्ञों ने दुनिया के 465 शहरों में जमीन धंसने का खुलासा किया है
दुनिया के 107 देशों के 465 शहरों में जमीन धंसने का अध्ययन, कई महानगरों में तेजी से बढ़ता भू-धंसाव बना चिंता का विषय।
दुनिया के 107 देशों के 465 शहरों में जमीन धंसने का अध्ययन, कई महानगरों में तेजी से बढ़ता भू-धंसाव बना चिंता का विषय।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • दुनिया के 107 देशों के 465 शहरों में जमीन धंसने का अध्ययन, कई महानगरों में तेजी से बढ़ता भू-धंसाव बना चिंता का विषय।

  • मेक्सिको सिटी के कुछ इलाकों में जमीन सालाना 217 मिमी तक धंस रही, इमारतों और बुनियादी ढांचे पर बढ़ सकता खतरा।

  • इंडोनेशिया के मेदान में सालाना 33 मिलीमीटर भू-धंसाव दर्ज, एशिया के कई शहरों में जमीन धंसने की गंभीर स्थिति सामने आई।

  • न्यूयॉर्क, लंदन और टोक्यो जैसे शहरों में जमीन की हलचल अपेक्षाकृत स्थिर, हालांकि छोटे बदलावों के आंकड़ों को सावधानी से समझना जरूरी।

  • उपग्रह आंकड़ों से नौ वर्षों के भू-धंसाव का विश्लेषण, विशेषज्ञों ने नियमित निगरानी और बेहतर शहरी नियोजन को बताया बेहद जरूरी।

शहरों में ऊंची-ऊंची इमारतें, चमचमाती सड़कें और तेजी से फैलती बस्तियां विकास की पहचान मानी जाती हैं। लेकिन इन शहरों के नीचे जमीन ही धीरे-धीरे खिसकने लगे, तो यह विकास के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।

जमीन के इस तरह नीचे धंसने को भू-धंसाव कहा जाता है। इससे मकानों की नींव कमजोर हो सकती है, सड़कों में दरारें पड़ सकती हैं और पानी की निकासी तथा सीवर व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। इतना ही नहीं, जमीन धंसने से बाढ़ का खतरा भी बढ़ सकता है।

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अब दुनिया के सैकड़ों शहरों पर हुए एक नए अध्ययन ने इस खतरे की गंभीर तस्वीर सामने रखी है। शोधकर्ताओं ने पाया कि कुछ शहरों में जमीन तेजी से नीचे जा रही है, जबकि कई बड़े शहरों में जमीन की हलचल अपेक्षाकृत कम है।

मेक्सिको सिटी में सबसे तेज धंसाव

शोधकर्ता ने 2014 से 2023 के बीच जुटाए गए उच्च गुणवत्ता वाले उपग्रह आंकड़ों का विश्लेषण किया। इस अध्ययन में 107 देशों के 465 शहरों को शामिल किया गया। इसके निष्कर्ष प्रतिष्ठित शोध पत्रिका ‘नेचर सिटीज’ में प्रकाशित हुए हैं।

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अध्ययन के मुताबिक, मेक्सिको सिटी के कुछ हिस्सों में जमीन सालाना लगभग 217 मिलीमीटर तक धंस रही है। यह बेहद चिंताजनक दर है। हालांकि, पूरे शहर में जमीन धंसने की मध्य दर करीब 8 मिलीमीटर सालाना रही। मेक्सिको के ही तोरेओन शहर में जमीन हर साल लगभग 17 मिलीमीटर नीचे जा रही है।

यह अंतर बताता है कि किसी शहर के हर हिस्से में खतरा एक जैसा नहीं होता। कुछ इलाके गंभीर संकट का सामना कर सकते हैं, जबकि दूसरे हिस्सों में स्थिति अपेक्षाकृत सामान्य रह सकती है।

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एशिया के शहरों पर भी मंडरा रहा खतरा

अध्ययन में एशिया के कई शहरों में जमीन धंसने की गंभीर स्थिति सामने आई। इंडोनेशिया के मेदान शहर में जमीन धंसने की मध्य दर करीब 33 मिलीमीटर सालाना दर्ज की गई। वहीं, इंडोनेशिया के ही बांडुंग में यह दर लगभग 22 मिलीमीटर और ईरान के इस्फहान में करीब 11 मिलीमीटर प्रति वर्ष रही।

लगातार जमीन धंसने से इमारतों की स्थिरता, सड़क परिवहन और भूमिगत पाइपलाइनों पर दबाव बढ़ सकता है। यदि समय रहते प्रभावित इलाकों की पहचान नहीं की गई, तो भविष्य में मरम्मत और बचाव पर भारी खर्च करना पड़ सकता है।

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बड़े शहरों में स्थिति कितनी गंभीर?

बोस्टन, न्यूयॉर्क, लंदन, बीजिंग, टोक्यो, सियोल, सिडनी, मोंटेवीडियो और नेपल्स जैसे शहरों में जमीन की सालाना हलचल अपेक्षाकृत स्थिर पाई गई। यहां धंसने और ऊपर उठने की अनुमानित दर 0.1 से 1.9 मिलीमीटर प्रति वर्ष के बीच रही। हालांकि, इतनी कम दर वाले आंकड़ों को सावधानी से समझने की जरूरत है, क्योंकि इनमें अनिश्चितता हो सकती है।

समय रहते कदम उठाना जरूरी

विशेषज्ञों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि जमीन कहां और कितनी तेजी से धंस रही है, इसकी नियमित निगरानी हो। अध्ययन केवल नौ वर्षों के आंकड़ों पर आधारित है। इसमें शहरों की प्रशासनिक सीमाओं से बाहर के इलाके छूट सकते हैं और जमीन पर माप लेने वाले केंद्रों की कमी से कुछ क्षेत्रों के आंकड़ों में अनिश्चितता बढ़ सकती है।

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इसलिए लगातार उपग्रह निगरानी, बेहतर भू-वैज्ञानिक अध्ययन और मजबूत शहरी नियोजन जरूरी हैं। समय रहते खतरे वाले इलाकों की पहचान की जाए, तो इमारतों, सड़कों और जल निकासी व्यवस्था को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है। आखिर शहरों का भविष्य सिर्फ मजबूत इमारतों पर नहीं, बल्कि उनके नीचे की जमीन की मजबूती पर भी निर्भर करता है।

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