शिशुओं के विकास में किस तरह का हो आहार, क्या कहता है अध्ययन?

12 लाख शिशुओं पर किए गए अध्ययन के अनुसार, शाकाहारी आहार से भी विकास सामान्य और सुरक्षित रहता है
जन्म के पहले 60 दिनों में वेजन आहार वाले शिशुओं में से कुछ का वजन कम हो सकता है, लेकिन 24 महीने तक अंतर खत्म हो जाता है।
जन्म के पहले 60 दिनों में वेजन आहार वाले शिशुओं में से कुछ का वजन कम हो सकता है, लेकिन 24 महीने तक अंतर खत्म हो जाता है।प्रतीकात्मक छवि, फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • जन्म के पहले 60 दिनों में वेजन आहार वाले शिशुओं में से कुछ का वजन कम हो सकता है, लेकिन 24 महीने तक अंतर खत्म हो जाता है।

  • दो साल की आयु तक लंबाई में कमी या स्टंटिंग की दर मांसाहारी, शाकाहारी और वेजन शिशुओं में कोई बड़ा अंतर नहीं दिखाती।

  • सही पोषण और गर्भावस्था व शिशु के शुरुआती वर्षों में पोषण परामर्श बच्चों के विकास को स्वस्थ और सुरक्षित बनाए रखते हैं।

  • यह शोध वैश्विक स्तर पर शाकाहारी और वेजन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण सबूत देता और सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों को मार्गदर्शन करता है।

आजकल बहुत से परिवार शाकाहारी और वेजन आहार को अपनाते हैं। ऐसे में माता-पिता और बाल रोग विशेषज्ञ अक्सर यह सोचते हैं कि क्या जानवरों से प्राप्त आहार को छोड़ने से शिशुओं के तेजी से बढ़ते शारीरिक विकास पर असर पड़ेगा। हाल ही में इस विषय पर एक बड़ा अध्ययन किया गया है, जिसने इस चिंता को काफी हद तक शांत किया है।

वेजन आहार - जिसमें जानवरों से मिलने वाले सभी उत्पाद, जैसे मीट, डेयरी, अंडे, शहद, लेदर और फर शामिल नहीं किए जाते, अर्थात इन्हें आहार में शामिल नहीं किया जताया है।

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जन्म के पहले 60 दिनों में वेजन आहार वाले शिशुओं में से कुछ का वजन कम हो सकता है, लेकिन 24 महीने तक अंतर खत्म हो जाता है।

इस अध्ययन को इजरायल के स्वास्थ्य मंत्रालय के पोषण विभाग की अगुवाई में अंजाम दिया गया। यह शोध लगभग 12 लाख शिशुओं पर आधारित है और इसने दस साल (2014-2023) की राष्ट्रीय स्वास्थ्य के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।

जामा नेटवर्क ओपन में प्रकाशित अध्ययन का उद्देश्य यह देखना था कि क्या शाकाहारी और शाकाहारी और वेजन आहार वाले घरों में पले शिशु अपनी शारीरिक वृद्धि में सामान्य रूप से विकसित होते हैं या नहीं।

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जन्म के पहले 60 दिनों में वेजन आहार वाले शिशुओं में से कुछ का वजन कम हो सकता है, लेकिन 24 महीने तक अंतर खत्म हो जाता है।

शारीरिक विकास के मापदंड

अध्ययन में शिशुओं के वजन, लंबाई और सिर का परिधि को मापा गया। शोध में पाया गया कि शाकाहारी घरों में पले शिशु लगभग उसी तरह विकसित होते हैं जैसे मांसाहारी आहार खाने वाले शिशु।

  • औसत अंतर बहुत कम था और इसे क्लिनिकली अहम नहीं माना गया।

  • जन्म के वजन को ध्यान में रखने के बाद यह अंतर और भी छोटा हो गया।

इसका मतलब यह है कि उचित पोषण मिलने पर शाकाहारी और शाकाहारी आहार शिशुओं के विकास को प्रभावित नहीं करता।

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जन्म के पहले 60 दिनों में वेजन आहार वाले शिशुओं में से कुछ का वजन कम हो सकता है, लेकिन 24 महीने तक अंतर खत्म हो जाता है।

शुरुआती जीवन में मामूली अंतर

अध्ययन में यह भी देखा गया कि जन्म के पहले 60 दिनों में वेजन आहार वाले शिशुओं में से कुछ का कम वजन कम हो सकता है। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है, यह अंतर कम होने लगता है।

24 महीने तक यह अंतर सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण नहीं रहा। इसका मतलब है कि शुरुआती वजन में मामूली अंतर जो समय के साथ खत्म हो जाता है।

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दो साल की आयु तक कद और वृद्धि

शोध में स्टंटिंग यानी लंबाई में कमी की दर भी मापी गई। परिणाम निम्नलिखित रहे -

  • मांसाहारी शिशु: 3.1 फीसदी

  • शाकाहारी शिशु: 3.4 फीसदी

  • वेजन शिशु: 3.9 फीसदी

इन आंकड़ों से यह स्पष्ट हुआ कि तीनों समूहों में कोई सांख्यिकीय अंतर नहीं है।

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जन्म के पहले 60 दिनों में वेजन आहार वाले शिशुओं में से कुछ का वजन कम हो सकता है, लेकिन 24 महीने तक अंतर खत्म हो जाता है।

पोषण और परामर्श का महत्व

शोधकर्ताओं ने कहा कि शाकाहारी और वेजन आहार शिशुओं के लिए सुरक्षित हैं, बशर्ते कि आहार की योजना ठीक से बनाई जाए। गर्भावस्था और शिशु के शुरुआती वर्षों में पोषण संबंधी परामर्श बेहद महत्वपूर्ण है। उचित पोषण और समृद्ध आहार के साथ शाकाहारी और वेजन आहार बच्चों के स्वास्थ्य और विकास को प्रभावित नहीं करते।

अध्ययन का महत्व

यह अध्ययन वैश्विक स्तर पर शाकाहारी और वेजन परिवारों के लिए अहम सबूत देता है। यह दर्शाता है कि सही वातावरण और पोषण के साथ शाकाहारी आहार बच्चों के विकास में बाधा नहीं डालता।

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जैसे-जैसे दुनिया में शाकाहारी और वेजन आहार की स्वीकार्यता बढ़ रही है, इस प्रकार के बड़े पैमाने के अध्ययन सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों और माता-पिता को पोषण संबंधी सलाह देने में मदद कर सकते हैं।

कुल मिलाकर यह शोध स्पष्ट रूप से बताता है कि शाकाहारी और वेजन आहार वाले घरों में पले शिशु दो साल की उम्र तक सामान्य रूप से विकसित हो सकते हैं। शुरुआती मामूली वजन अंतर समय के साथ खत्म हो जाता है और लंबाई में कोई बड़ा अंतर नहीं पाया गया।

इसलिए माता-पिता को अपने बच्चों की संतुलित पोषण योजना और नियमित स्वास्थ्य परामर्श पर ध्यान देना चाहिए। उचित आहार के साथ शिशु शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रूप से विकसित हो सकते हैं।

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