

यूरोपीय शोध में पाया गया कि गर्भावस्था में सही मात्रा में पेरासिटामोल लेने से ऑटिज्म या एडीएचडी का खतरा नहीं बढ़ता।
द लैंसेट में प्रकाशित अध्ययन ने उच्च गुणवत्ता वाले 43 शोधों की समीक्षा कर गर्भवती महिलाओं को आश्वस्त किया।
एक ही मां के बच्चों की तुलना वाले अध्ययनों में पेरासिटामोल और मानसिक विकास समस्याओं के बीच कोई संबंध नहीं मिला।
डॉक्टरों के अनुसार पेरासिटामोल गर्भावस्था में सुरक्षित मानी जाने वाली एकमात्र दर्द निवारक दवा है, जिसे सावधानी से लेना चाहिए।
विशेषज्ञों ने कहा कि अफवाहों के बजाय वैज्ञानिक प्रमाणों और डॉक्टर की सलाह पर भरोसा करना गर्भवती महिलाओं के लिए बेहतर है।
पेरासिटामोल, जिसे अमेरिका में टायलेनॉल कहा जाता है, गर्भावस्था में दर्द और बुखार के लिए सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली दवा है। हाल ही में यूरोप के शोधकर्ताओं ने कहा है कि गर्भावस्था के दौरान सही मात्रा में पेरासिटामोल का उपयोग सुरक्षित है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि इस दवा का ऑटिज्म, एडीएचडी (ध्यान की कमी और अधिक सक्रियता) या बौद्धिक अक्षमता से कोई सीधा संबंध नहीं पाया गया है।
हालिया विवाद की शुरुआत
सितंबर में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि गर्भवती महिलाओं को पेरासिटामोल नहीं लेनी चाहिए क्योंकि इससे बच्चे में ऑटिज्म हो सकता है। इस बयान के बाद कई गर्भवती महिलाएं चिंतित हो गई। हालांकि उस समय कई डॉक्टरों और मेडिकल संगठनों ने कहा कि यह दावा वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित नहीं है।
यूरोपीय शोधकर्ताओं की नई रिपोर्ट
यूरोप के वैज्ञानिकों ने इस मुद्दे पर गहराई से अध्ययन किया और अपनी रिपोर्ट प्रसिद्ध मेडिकल जर्नल द लैंसेट ऑब्स्टेट्रिक्स, गायनेकोलॉजी एंड विमेंस हेल्थ में प्रकाशित की। इस शोध का नेतृत्व प्रोफेसर असमा खलील ने किया, जो लंदन की सिटी सेंट जॉर्ज यूनिवर्सिटी में कार्यरत हैं।
शोध का मुख्य उद्देश्य
इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को सही जानकारी देना और उनके डर को दूर करना था। शोध पत्र में शोधकर्ता के हवाले से कहा गया है कि सही मात्रा में और डॉक्टर की सलाह से लिया गया पेरासिटामोल सुरक्षित है। उन्होंने यह भी बताया कि अब तक के सबसे अच्छे वैज्ञानिक प्रमाणों में पेरासिटामोल और ऑटिज्म या एडीएचडी के बीच कोई सीधा संबंध नहीं मिला है।
किन अध्ययनों की समीक्षा की गई
शोधकर्ताओं ने कुल 43 पुराने अध्ययनों की समीक्षा की। इनमें से केवल उन्हीं अध्ययनों को शामिल किया गया, जिनकी गुणवत्ता अच्छी थी। इससे यह सुनिश्चित किया गया कि गलत या अधूरी जानकारी के आधार पर कोई निष्कर्ष न निकाला जाए।
एक ही मां के बच्चों की तुलना
इस शोध की एक खास बात यह थी कि वैज्ञानिकों ने उन अध्ययनों पर ज्यादा ध्यान दिया, जिनमें एक ही मां के बच्चों की तुलना की गई थी। उदाहरण के लिए, अगर किसी महिला ने एक गर्भावस्था में पेरासिटामोल लिया और दूसरी में नहीं लिया, तो दोनों बच्चों के स्वास्थ्य की तुलना की गई। इससे पारिवारिक और आनुवंशिक कारणों को समझने में मदद मिली।
बड़े स्तर पर किए गए अध्ययन
इस तरह के केवल तीन अध्ययन मिले, लेकिन वे बहुत बड़े थे। इनमें दो लाख 60 हजार से ज्यादा बच्चों में ऑटिज्म की जांच की गई। इसके अलावा एडीएचडी और बौद्धिक अक्षमता से जुड़े आंकड़े भी लाखों बच्चों पर आधारित थे। इन अध्ययनों में किसी भी बीमारी और पेरासिटामोल के बीच कोई महत्वपूर्ण संबंध नहीं पाया गया।
अलग-अलग देशों के निष्कर्ष
हाल के वर्षों में अलग-अलग देशों में किए गए अध्ययनों के नतीजे अलग रहे हैं। 2024 में स्वीडन में हुए एक अध्ययन में पेरासिटामोल और ऑटिज्म के बीच कोई संबंध नहीं पाया गया। वहीं, 2025 में अमेरिका के एक अध्ययन में हल्का संकेत मिला, लेकिन उसमें भी यह कहा गया कि दवा जरूरत पड़ने पर ली जा सकती है।
डॉक्टरों की मौजूदा सलाह
डॉक्टरों का कहना है कि गर्भावस्था में पेरासिटामोल ही एकमात्र दर्द निवारक दवा है, जिसे सुरक्षित माना जाता है। हालांकि, इसे हमेशा कम से कम मात्रा में और कम समय के लिए लेना चाहिए। बिना इलाज के दर्द और बुखार मां और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक हो सकते हैं।
विशेषज्ञों ने इस अध्ययन की सराहना की। जिसमें कहा गया है कि यह शोध पेरासिटामोल को लेकर फैली गलतफहमियों को दूर करने में मदद करेगा।
वैज्ञानिक शोध के आधार पर यह कहा जा सकता है कि गर्भावस्था में सही तरीके से पेरासिटामोल का उपयोग सुरक्षित है। डर और अफवाहों की बजाय डॉक्टर की सलाह और वैज्ञानिक जानकारी पर भरोसा करना गर्भवती महिलाओं के लिए सबसे बेहतर है।