

कैनबिस के उपयोग से शरीर में सूजन बढ़ाने और घटाने वाले दोनों प्रकार के इम्यून संकेत एक साथ सक्रिय पाए गए।
नई मेटा-विश्लेषण में 54,000 लोगों के आंकड़ों से कैनबिस का प्रतिरक्षा प्रणाली पर जटिल और अनिश्चित प्रभाव सामने आया।
सीबीडी और सिंथेटिक कैनाबिस दोनों में सूजन संबंधी जैविक संकेतों में बदलाव देखा गया, प्रभाव उत्पाद प्रकार पर निर्भर पाया गया।
अध्ययन बताता है कि कैनबिस प्रतिरक्षा प्रणाली को पूरी तरह दबाने या बढ़ाने के बजाय उसे जटिल तरीके से मॉड्युलेट करता है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि कैनबिस से जुड़े सूजन परिवर्तन लंबे समय तक स्वास्थ्य जोखिमों से जुड़े हो सकते हैं, और और शोध आवश्यक है।
हाल के वर्षों में कैनबिस (भांग) को केवल नशे के रूप में नहीं बल्कि औषधीय उपयोग के लिए भी देखा जाने लगा है। कई देशों में इसके मेडिकल उपयोग को कानूनी मंजूरी मिल चुकी है। लेकिन इसके शरीर पर प्रभाव, खासकर प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) पर असर को लेकर वैज्ञानिकों में अब भी पूरी सहमति नहीं है।
एक नई बड़ी रिसर्च ने इस बहस को और जटिल बना दिया है। यह अध्ययन “ब्रेन बिहेवियर एंड इम्युनिटी ” नामक जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इसमें 46 अलग-अलग शोधों और 54,000 से अधिक लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।
सूजन पर कैनबिस का मिला मिला असर
इस अध्ययन का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि कैनबिस या इसके सक्रिय तत्वों का उपयोग शरीर में सूजन से जुड़े संकेतों को एक समान तरीके से प्रभावित नहीं करता।
शोध में पाया गया कि नियमित रूप से कैनबिस का उपयोग करने वाले लोगों के खून में दो तरह के संकेत एक साथ बढ़ते हैं - एक तरफ सूजन बढ़ाने वाले और दूसरी तरफ सूजन कम करने वाले संकेत।
यह बात पहले के कई शोधों से अलग है, जिनमें कुछ में कहा गया था कि कैनबिस सूजन को कम करता है, जबकि कुछ में कहा गया था कि यह सूजन बढ़ा सकता है। नए अध्ययन के अनुसार इसका असर इतना सीधा नहीं है, बल्कि यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को “संतुलित करने” जैसा लगता है।
टीएचसी और सीबीडी जैसे तत्व कैसे काम करते हैं
कैनबिस में मौजूद मुख्य तत्व टीएचसी और सीबीडी शरीर के एंडोकैनाबिनॉइड सिस्टम से जुड़ते हैं। यह सिस्टम शरीर में दर्द, मूड, नींद और प्रतिरक्षा प्रणाली को नियंत्रित करने में मदद करता है।
ये तत्व शरीर में मौजूद सीबी1 और सीबी2 नाम के रिसेप्टर्स पर असर डालते हैं, जो प्रतिरक्षा कोशिकाओं में पाए जाते हैं। वैज्ञानिक मानते हैं कि इसी कारण कैनबिस सूजन और इम्यून सिस्टम दोनों को प्रभावित कर सकता है। लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि इसका असर हमेशा एक जैसा होता है या परिस्थितियों के अनुसार बदलता है।
सिंथेटिक कैनाबिस अधिक प्रभावी पाया गया
शोध में यह भी पाया गया कि प्राकृतिक कैनबिस की तुलना में सिंथेटिक कैनबिस (कृत्रिम रूप से बनाए गए यौगिक) का असर अधिक तीव्र होता है। सिंथेटिक कैनबिस के उपयोग से सूजन से जुड़े संकेतों में ज्यादा बढ़ोतरी देखी गई। इससे संकेत मिलता है कि सभी प्रकार के कैनबिस उत्पाद शरीर पर एक जैसा प्रभाव नहीं डालते।
सीबीडी को लेकर भी बढ़ी नई चर्चा
सीबीडी को आमतौर पर सुरक्षित और सूजन कम करने वाला माना जाता है। लेकिन इस अध्ययन में पाया गया कि कुछ नियंत्रित परीक्षणों में स्वस्थ लोगों में सीबीडी लेने के बाद सूजन बढ़ाने वाले संकेत भी हल्के रूप में बढ़े।
यह परिणाम चौंकाने वाला है क्योंकि लोग अक्सर सीबीडी को पूरी तरह “एंटी-इन्फ्लेमेटरी” मान लेते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि इसका असर व्यक्ति, मात्रा और उपयोग के तरीके पर निर्भर कर सकता है।
शरीर पर दीर्घकालिक असर अभी स्पष्ट नहीं
शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि इन बदलावों का मतलब यह नहीं है कि कैनबिस सीधे तौर पर बीमारी पैदा करता है। लेकिन खून में सूजन से जुड़े संकेतों में बदलाव यह दिखाते हैं कि शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली में हल्के स्तर पर परिवर्तन हो रहा है।
यदि यह बदलाव लंबे समय तक बने रहें, तो इसका स्वास्थ्य पर क्या असर होगा, यह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
निष्कर्ष: सरल जवाब अभी नहीं है
यह नया अध्ययन बताता है कि कैनबिस का असर शरीर पर बहुत जटिल है। यह न तो पूरी तरह लाभकारी कहा जा सकता है और न ही पूरी तरह हानिकारक।
वैज्ञानिकों का मानना है कि जैसे-जैसे कैनबिस का उपयोग दुनिया में बढ़ रहा है, वैसे-वैसे इसके लंबे समय के प्रभावों पर और अधिक शोध की जरूरत है। फिलहाल यह कहा जा सकता है कि कैनबिस शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करता है, लेकिन उसका पूरा अर्थ और परिणाम अभी भी शोध का विषय हैं।