वैज्ञानिकों ने खोजा ऐसा प्राकृतिक प्रोटीन जो हानिकारक बैक्टीरिया को मार देता है

इंटेलेक्टिन-2 प्रोटीन पाचन तंत्र की म्यूकस परत को मजबूत बनाकर हानिकारक बैक्टीरिया से हमारे शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा करता है
इंटेलेक्टिन-2 का संतुलन बिगड़ने से आंतों की बीमारियां हो सकती हैं, इसलिए सही स्तर बनाए रखना बहुत जरूरी है।
इंटेलेक्टिन-2 का संतुलन बिगड़ने से आंतों की बीमारियां हो सकती हैं, इसलिए सही स्तर बनाए रखना बहुत जरूरी है।प्रतीकात्मक छवि, फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • इंटेलेक्टिन-2 एक लेक्टिन प्रोटीन है जो पाचन तंत्र की म्यूकस परत को मजबूत बनाकर संक्रमण से सुरक्षा देता है।

  • यह प्रोटीन म्यूकस में मौजूद शर्करा से जुड़कर आंतों की सुरक्षात्मक परत को स्थिर और प्रभावी बनाता है।

  • इंटेलेक्टिन-2 हानिकारक बैक्टीरिया की सतह पर मौजूद शर्करा से चिपककर उनकी वृद्धि रोकता और उन्हें नष्ट करता है।

  • यह प्रोटीन एंटीबायोटिक प्रतिरोधी बैक्टीरिया के खिलाफ भी प्रभावी हो सकता है, जिससे नई उपचार संभावनाएं खुलती हैं।

  • इंटेलेक्टिन-2 का संतुलन बिगड़ने से आंतों की बीमारियां हो सकती हैं, इसलिए सही स्तर बनाए रखना बहुत जरूरी है।

हमारा पाचन तंत्र हर दिन भोजन के साथ कई प्रकार के बैक्टीरिया और कीटाणुओं के संपर्क में आता है। इनमें से कुछ अच्छे होते हैं, जो पाचन में मदद करते हैं, जबकि कुछ हानिकारक होते हैं और बीमारी फैला सकते हैं। शरीर की आंतों की अंदरूनी सतह पर एक मोटी परत होती है, जिसे म्यूकस (श्लेष्मा) कहा जाता है। यह परत एक सुरक्षा दीवार की तरह काम करती है और हानिकारक जीवाणुओं को शरीर में प्रवेश करने से रोकती है।

इस म्यूकस परत को मजबूत बनाने और कीटाणुओं से बचाने में कई प्रकार के प्रोटीन मदद करते हैं। इन्हीं में से एक खास प्रोटीन है इंटेलेक्टिन-2 हाल ही में मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) के वैज्ञानिकों ने इस प्रोटीन पर शोध किया और पाया कि यह पाचन तंत्र की रक्षा में दो महत्वपूर्ण तरीकों से काम करता है।

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इंटेलेक्टिन-2 का संतुलन बिगड़ने से आंतों की बीमारियां हो सकती हैं, इसलिए सही स्तर बनाए रखना बहुत जरूरी है।

लेक्टिन क्या होते हैं?

इंटेलेक्टिन-2 एक प्रकार का लेक्टिन है। लेक्टिन ऐसे प्रोटीन होते हैं जो शर्करा (शुगर) के अणुओं से जुड़ सकते हैं। शरीर में 200 से भी अधिक प्रकार के लेक्टिन पाए जाते हैं। ये प्रोटीन बैक्टीरिया, वायरस और अन्य कोशिकाओं को पहचानने में मदद करते हैं। लेक्टिन शर्करा को पहचानकर यह तय कर सकते हैं कि कोई कोशिका शरीर की अपनी है या बाहर से आई हुई है।

इंटेलेक्टिन-2 कहां बनता है?

मनुष्यों में इंटेलेक्टिन-2 छोटी आंत में बनता है। यह लगातार थोड़ी मात्रा में पैदा होता रहता है। चूहों में यह प्रोटीन तब ज्यादा बनता है जब आंत में सूजन हो या परजीवी संक्रमण हो। इसका मतलब यह है कि इंटेलेक्टिन-2 शरीर की रक्षा प्रणाली का हिस्सा है और जरूरत पड़ने पर सक्रिय हो जाता है।

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म्यूकस परत को मजबूत बनाना

नेचर कम्युनिकेशन्स में प्रकाशित शोध में पाया गया कि इंटेलेक्टिन-2 गैलेक्टोज नाम की एक शर्करा से जुड़ता है। यह शर्करा म्यूकस बनाने वाले अणुओं, जिन्हें म्यूकिन कहा जाता है, में पाई जाती है। जब इंटेलेक्टिन-2 म्यूकिन से जुड़ता है, तो म्यूकस परत और मजबूत हो जाती है। इससे आंतों की दीवार सुरक्षित रहती है और कीटाणु अंदर नहीं जा पाते।

बैक्टीरिया को रोकना और मारना

इंटेलेक्टिन-2 का दूसरा महत्वपूर्ण काम है बैक्टीरिया से लड़ना। कई हानिकारक बैक्टीरिया की सतह पर भी गैलेक्टोज जैसी शर्कराएं होती हैं। इंटेलेक्टिन-2 इन शर्कराओं से जुड़कर बैक्टीरिया को पकड़ लेता है। इससे बैक्टीरिया फंस जाते हैं, उनकी बढ़त धीमी हो जाती है और समय के साथ वे टूटकर नष्ट हो जाते हैं।

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इंटेलेक्टिन-2 का संतुलन बिगड़ने से आंतों की बीमारियां हो सकती हैं, इसलिए सही स्तर बनाए रखना बहुत जरूरी है।

शोधकर्ताओं ने पाया कि यह प्रोटीन कई प्रकार के बैक्टीरिया पर असर डाल सकता है, यहां तक कि उन बैक्टीरिया पर भी जो आम एंटीबायोटिक दवाओं से मरते नहीं हैं। इस तरह इंटेलेक्टिन-2 शरीर को संक्रमण से बचाने में मदद करता है।

दोहरी सुरक्षा प्रणाली

वैज्ञानिकों के अनुसार इंटेलेक्टिन-2 की सबसे खास बात इसकी दोहरी भूमिका है। पहले यह म्यूकस परत को मजबूत बनाता है। अगर किसी कारण से यह परत कमजोर हो जाए और बैक्टीरिया आगे बढ़ने लगें, तो इंटेलेक्टिन-2 सीधे उन बैक्टीरिया को रोकता और नष्ट करता है। इस तरह यह पाचन तंत्र की अंदरूनी सतह को सुरक्षित रखता है।

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बीमारियों में भूमिका

कुछ बीमारियों, जैसे इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (आईबीडी), में इंटेलेक्टिन-2 का स्तर बहुत कम या बहुत ज्यादा हो सकता है। अगर इसका स्तर कम हो जाए, तो म्यूकस परत कमजोर हो जाती है। अगर यह बहुत ज्यादा हो जाए, तो यह अच्छे बैक्टीरिया को भी नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए वैज्ञानिक मानते हैं कि इस प्रोटीन का सही संतुलन बहुत जरूरी है।

भविष्य की संभावनाएं

शोधकर्ताओं का कहना है कि भविष्य में इंटेलेक्टिन-2 का उपयोग नई दवाओं के रूप में किया जा सकता है। यह खासतौर पर उन संक्रमणों के इलाज में मददगार हो सकता है, जिन पर एंटीबायोटिक दवाएं असर नहीं करतीं। साथ ही, यह पाचन तंत्र की सुरक्षा बढ़ाने का एक प्राकृतिक तरीका भी हो सकता है।

इस शोध से यह साफ होता है कि हमारा शरीर खुद ही कई चतुर तरीकों से अपनी रक्षा करता है। इंटेलेक्टिन-2 जैसे प्रोटीन हमें यह समझने में मदद करते हैं कि प्राकृतिक प्रतिरक्षा प्रणाली कितनी मजबूत और महत्वपूर्ण है।

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