

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन करने वाले बच्चों में अस्थमा विकसित होने का खतरा लगभग चार गुना तक बढ़ा पाया गया।
स्पेन में 691 बच्चों पर हुए अध्ययन में खानपान और अस्थमा के बीच मजबूत संबंध पाया गया।
कम प्रोसेस्ड फूड खाने वाले बच्चों में अस्थमा की दर 2.6 प्रतिशत थी, जबकि अधिक सेवन वालों में 7.6 प्रतिशत।
अध्ययन में पाया गया कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड सूजन बढ़ाकर फेफड़ों और श्वसन प्रणाली को प्रभावित कर सकता है।
रिसर्च में एलर्जी संबंधी अन्य बीमारियों जैसे त्वचा या भोजन एलर्जी के साथ कोई स्पष्ट संबंध नहीं पाया गया।
नई रिसर्च में सामने आया है कि ज्यादा मात्रा में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड खाने वाले बच्चों में अस्थमा का खतरा कई गुना बढ़ सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि बचपन में गलत खानपान बच्चों की सांस संबंधी बीमारियों को बढ़ावा दे सकता है। यह अध्ययन स्पेन में किया गया, जिसमें सैकड़ों बच्चों के खानपान और स्वास्थ्य पर कई वर्षों तक नजर रखी गई। यह शोध एलर्जी नामक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।
क्या होता है अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड
अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड या अत्यधिक प्रसंस्कृत भोजन ऐसे खाद्य पदार्थ होते हैं जो फैक्ट्री में कई तरह की प्रक्रिया से तैयार किए जाते हैं। इनमें स्वाद बढ़ाने वाले रसायन, ज्यादा नमक, चीनी और खराब फैट मिलाया जाता है। पैकेट वाले चिप्स, कोल्ड ड्रिंक, इंस्टेंट नूडल्स, बिस्किट, फ्रोजन फूड और प्रोसेस्ड मीट इसके उदाहरण हैं। आजकल बच्चों में इन चीजों का सेवन तेजी से बढ़ रहा है।
रिसर्च में क्या सामने आया
यह अध्ययन 691 बच्चों पर किया गया। शोधकर्ताओं ने करीब साढ़े तीन साल तक बच्चों की खाने की आदतों और स्वास्थ्य की जांच की। रिसर्च में पाया गया कि जिन बच्चों की कुल ऊर्जा का 30 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड से आता था, उनमें अस्थमा होने का खतरा सबसे ज्यादा था।
अध्ययन के अनुसार कम मात्रा में प्रोसेस्ड फूड खाने वाले बच्चों में अस्थमा के मामले करीब 2.6 प्रतिशत थे, जबकि ज्यादा मात्रा में खाने वाले बच्चों में यह बढ़कर 7.6 प्रतिशत तक पहुंच गया। वैज्ञानिकों ने कहा कि ऐसे बच्चों में अस्थमा का खतरा लगभग 3.7 गुना ज्यादा देखा गया।
शरीर में कैसे बढ़ती है समस्या
विशेषज्ञों का मानना है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड शरीर में सूजन बढ़ाने का काम करते हैं। इनमें फाइबर कम और सैचुरेटेड फैट ज्यादा होता है। इससे शरीर में ऐसे रसायन बनते हैं जो फेफड़ों और सांस की नलियों पर बुरा असर डाल सकते हैं।
इसके अलावा इन खाद्य पदार्थों को तेज तापमान पर तैयार किया जाता है, जिससे हानिकारक तत्व पैदा होते हैं। ये तत्व शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ाते हैं और सांस की नलियों को कमजोर कर सकते हैं। इसी कारण बच्चों में सांस लेने में दिक्कत और अस्थमा का खतरा बढ़ सकता है।
अन्य एलर्जी से नहीं मिला सीधा संबंध
रिसर्च में यह भी पाया गया कि प्रोसेस्ड फूड का संबंध हर तरह की एलर्जी से नहीं था। त्वचा की एलर्जी, फूड एलर्जी या धूल से होने वाली एलर्जी में कोई मजबूत संबंध नहीं मिला। वैज्ञानिकों का कहना है कि अस्थमा बढ़ने के पीछे सामान्य एलर्जी नहीं बल्कि शरीर में बढ़ने वाली सूजन बड़ी वजह हो सकती है।
माता-पिता के लिए जरूरी सलाह
शोध में शोधकर्ताओं के हवाले से कहना है कि बच्चों को बचपन से ही ताजा और पौष्टिक भोजन देना जरूरी है। फल, हरी सब्जियां, दालें, दूध और घर का बना खाना बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बेहतर माना जाता है। वहीं पैकेट वाले और ज्यादा प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन कम करना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आगे भी ऐसी रिसर्च में यही परिणाम सामने आते हैं, तो बच्चों में अस्थमा रोकने के लिए खानपान में बदलाव एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।