पेट की यह दवाएं कर सकती हैं एनीमिया और हड्डियों का नुकसान, नई स्टडी में चेतावनी

लंबे समय तक एसिड कम करने वाली दवाओं के उपयोग से शरीर में खनिज असंतुलन और स्वास्थ्य खतरे बढ़ सकते हैं
विशेषज्ञों ने सलाह दी कि पीपीआई दवाओं का उपयोग सीमित अवधि तक और केवल चिकित्सकीय निगरानी में ही करना चाहिए।
विशेषज्ञों ने सलाह दी कि पीपीआई दवाओं का उपयोग सीमित अवधि तक और केवल चिकित्सकीय निगरानी में ही करना चाहिए।फोटो साभार: आईस्टॉक
Published on
सारांश
  • लंबे समय तक पीपीआई दवाओं के उपयोग से आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम और जिंक जैसे जरूरी खनिजों का संतुलन बिगड़ सकता है।

  • अध्ययन में पाया गया कि खून में कैल्शियम बढ़ा और आयरन घटा, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस और एनीमिया का खतरा बढ़ सकता है।

  • पेट का एसिड कम होने से पोषक तत्वों का अवशोषण प्रभावित होता है, जिससे शरीर के कई अंगों पर असर पड़ता है।

  • बिना डॉक्टर की सलाह के लंबे समय तक ओमेप्राजोल लेने से दुष्प्रभाव बढ़ सकते हैं और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

  • विशेषज्ञों ने सलाह दी कि पीपीआई दवाओं का उपयोग सीमित अवधि तक और केवल चिकित्सकीय निगरानी में ही करना चाहिए।

पेट की जलन, गैस, एसिडिटी और अल्सर जैसी समस्याओं के लिए आजकल बहुत लोग प्रोटॉन पंप इन्हिबिटर (पीपीआई) दवाएं लेते हैं। इनमें ओमेप्राजोल, पैंटोप्राजोल और एसोमेप्राजोल जैसी दवाएं शामिल हैं। ये दवाएं पेट में बनने वाले एसिड को कम करती हैं और काफी असरदार मानी जाती हैं। लेकिन हाल ही में ब्राजील में हुए एक अध्ययन ने इन दवाओं के लंबे समय तक इस्तेमाल को लेकर नई चिंता जताई है।

यह शोध ब्राजील की फेडरल यूनिवर्सिटी ऑफ साओ पाउलो और एबीसी मेडिकल स्कूल के वैज्ञानिकों ने किया। अध्ययन में बताया गया कि लंबे समय तक पीपीआई दवाओं का उपयोग शरीर में पोषक तत्वों के संतुलन को बिगाड़ सकता है।

यह भी पढ़ें
गोनोरिया के उपचार में दवाओं का नहीं हो रहा है असर: डब्ल्यूएचओ ने दी चेतावनी
विशेषज्ञों ने सलाह दी कि पीपीआई दवाओं का उपयोग सीमित अवधि तक और केवल चिकित्सकीय निगरानी में ही करना चाहिए।

शोध में क्या पाया गया?

वैज्ञानिकों ने चूहों पर यह अध्ययन किया। उन्होंने चूहों को ओमेप्राजोल दवा 10 दिन, 30 दिन और 60 दिन तक दी। इसके बाद उनके शरीर में खनिज (मिनरल) तत्वों की जांच की गई। शोध में जिन खनिजों पर ध्यान दिया गया उनमें आयरन (लोहा), कैल्शियम, जिंक, मैग्नीशियम, कॉपर और पोटैशियम शामिल थे।

परिणामों में पाया गया कि इन खनिजों का संतुलन शरीर में बिगड़ गया था। कुछ खनिज पेट में जमा हो गए, जबकि कुछ का स्तर लीवर और तिल्ली (स्प्लीन) में असामान्य हो गया।

यह भी पढ़ें
दवा-प्रतिरोधी बैक्टीरिया से लड़ने की नई उम्मीद: सिंथेटिक बैक्टीरियोफेज
विशेषज्ञों ने सलाह दी कि पीपीआई दवाओं का उपयोग सीमित अवधि तक और केवल चिकित्सकीय निगरानी में ही करना चाहिए।

खून और हड्डियों पर असर

खून के परीक्षण में यह भी पाया गया कि खून में कैल्शियम का स्तर बढ़ गया और आयरन का स्तर कम हो गया।

आयरन की कमी से एनीमिया (खून की कमी) हो सकता है। वहीं, खून में ज्यादा कैल्शियम होना इस बात का संकेत हो सकता है कि कैल्शियम हड्डियों से निकल रहा है। इससे भविष्य में ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों का कमजोर होना) का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि वैज्ञानिकों ने कहा कि इस निष्कर्ष की पुष्टि के लिए और लंबे समय तक अध्ययन की जरूरत है।

यह भी पढ़ें
वैज्ञानिकों ने हैजा जैसी बीमारियों के बैक्टीरिया से निपटने के लिए विकसित किया नया तरीका
विशेषज्ञों ने सलाह दी कि पीपीआई दवाओं का उपयोग सीमित अवधि तक और केवल चिकित्सकीय निगरानी में ही करना चाहिए।

यह दवाएं कैसे काम करती हैं?

पीपीआई दवाएं पेट में मौजूद एक एंजाइम (एच+, के+, एटीपी) को ब्लॉक करती हैं। यह एंजाइम पेट में एसिड बनाने का काम करता है। जब यह एंजाइम रुक जाता है, तो पेट में एसिड कम बनता है और एसिडिटी, जलन और अल्सर से राहत मिलती है।

लेकिन पेट का एसिड सिर्फ नुकसान ही नहीं करता। यह कुछ पोषक तत्वों को पचाने और शरीर में अवशोषित करने में भी मदद करता है। जब एसिड कम हो जाता है, तो आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम और जिंक जैसे तत्वों का अवशोषण कम हो सकता है।

यह भी पढ़ें
दवा प्रतिरोधी टीबी से निपटने के लिए एनजीएस तकनीक का तेजी से प्रसार जरूरी: डब्ल्यूएचओ
विशेषज्ञों ने सलाह दी कि पीपीआई दवाओं का उपयोग सीमित अवधि तक और केवल चिकित्सकीय निगरानी में ही करना चाहिए।

प्रतिरक्षा प्रणाली पर प्रभाव

एसीएस ओमेगा नामक पत्रिका में प्रकाशित शोध में यह भी देखा गया कि लंबे समय तक दवा लेने से प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) की कोशिकाओं में बदलाव आए। शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता खनिज संतुलन पर निर्भर करती है। अगर मिनरल असंतुलित हो जाएं, तो इम्यून सिस्टम भी प्रभावित हो सकता है।

बिना डॉक्टर की सलाह के उपयोग की समस्या

ओमेप्राजोल पिछले 30 सालों से बाजार में उपलब्ध है। बहुत से लोग इसे बिना डॉक्टर की सलाह के भी लेते हैं। हल्की सी जलन या गैस होने पर भी लोग यह दवा शुरू कर देते हैं और महीनों तक लेते रहते हैं।

यह भी पढ़ें
चिंताजनक: पृथ्वी के सबसे दूरस्थ क्षेत्रों में भी पनप रहे हैं दवा-प्रतिरोधी कवक
विशेषज्ञों ने सलाह दी कि पीपीआई दवाओं का उपयोग सीमित अवधि तक और केवल चिकित्सकीय निगरानी में ही करना चाहिए।

ब्राजील में हाल ही में 20 एमजी ओमेप्राजोल को बिना पर्ची के बेचने की अनुमति दे दी गई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे लोग खुद दवा लेना शुरू कर सकते हैं और 14 दिन से ज्यादा समय तक इसका उपयोग कर सकते हैं, जो सही नहीं है।

क्या कहना है स्वास्थ्य एजेंसी का?

ब्राजील की स्वास्थ्य एजेंसी अंविसा का कहना है कि इस दवा को बिना पर्ची के बेचने का उद्देश्य सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देना है। दवा के पैकेट पर साफ लिखा होता है कि इसे अधिकतम 14 दिन तक ही लेना चाहिए। अगर लक्षण बने रहें, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। 14 दिन से ज्यादा की खुराक अभी भी डॉक्टर की पर्ची से ही मिलती है।

यह भी पढ़ें
जीन दवा वितरण अब होगी आसान और अधिक किफायती: अध्ययन
विशेषज्ञों ने सलाह दी कि पीपीआई दवाओं का उपयोग सीमित अवधि तक और केवल चिकित्सकीय निगरानी में ही करना चाहिए।

क्या सभी पीपीआई दवाएं एक जैसी हैं?

शोध ओमेप्राजोल पर किया गया था। लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि पैंटोप्राजोल और एसोमेप्राजोल जैसी नई दवाएं भी उसी तरह काम करती हैं। कुछ दवाएं ज्यादा ताकतवर होती हैं और लंबे समय तक असर करती हैं। इसलिए उनके साइड इफेक्ट भी ज्यादा हो सकते हैं।

क्या करना चाहिए?

यह दवाएं पूरी तरह गलत नहीं हैं। वे बहुत प्रभावी और जरूरी दवाएं हैं। लेकिन समस्या तब होती है जब इन्हें लंबे समय तक बिना जरूरत के लिया जाए। डॉक्टर की सलाह के बिना उपयोग किया जाए।

यह भी पढ़ें
पिछले आठ वर्षों में मानसिक रोगों की ब्रांडेड दवाओं की कीमतों में 277 फीसदी की हुई वृद्धि
विशेषज्ञों ने सलाह दी कि पीपीआई दवाओं का उपयोग सीमित अवधि तक और केवल चिकित्सकीय निगरानी में ही करना चाहिए।

नियमित जांच

अगर किसी को लंबे समय तक पीपीआई लेनी पड़ रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर समय-समय पर खून की जांच करवानी चाहिए। जरूरत पड़ने पर आयरन, कैल्शियम या अन्य मिनरल की सप्लीमेंट भी दी जा सकती है।

यह अध्ययन बताता है कि पेट की एसिड कम करने वाली दवाएं शरीर के अन्य हिस्सों पर भी असर डाल सकती हैं। खासकर लंबे समय तक उपयोग से पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ सकता है। हालांकि यह अध्ययन जानवरों पर किया गया है, फिर भी यह सावधानी बरतने की चेतावनी देता है।

इसलिए इन दवाओं का उपयोग हमेशा डॉक्टर की सलाह से और सीमित समय तक ही करना चाहिए। सही जानकारी और जागरूकता ही बेहतर स्वास्थ्य की कुंजी है।

Related Stories

No stories found.
Down to Earth- Hindi
hindi.downtoearth.org.in