

खराब खानपान अब एक “खामोश वैश्विक महामारी” बन चुका है, जो हर साल ह्रदय सम्बन्धी बीमारियों से होने वाली 40 लाख से ज्यादा मौतों की वजह बन रहा है। संतुलित आहार की कमी, ज्यादा नमक और प्रोसेस्ड फूड का बढ़ता चलन न सिर्फ मौतों का कारण बन रहा है, बल्कि करोड़ों लोगों से स्वस्थ जीवन के अनमोल साल भी छीन रहा है।
चिंता की बात है कि 2023 में इसकी वजह से 40 लाख से ज्यादा लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था। यह संकट अमीर और गरीब, दोनों तरह के देशों में अलग-अलग रूप में गहराता जा रहा है और अब युवाओं को भी तेजी से अपनी चपेट में ले रहा है।
आंकड़े दर्शाते हैं कि 2023 में इसने दुनिया में लोगों से स्वस्थ जीवन के 9.7 करोड़ साल भी छीन लिए। विडम्बना देखिए कि यह वो समय था, जो लोग अपने परिवार, सपनों और खुशियों के साथ जी सकते थे, लेकिन उन्हें बीमारी ने छीन लिया।
विशेषज्ञ साफ कहते हैं कि इसका सबसे असरदार इलाज दवाइयों में नहीं, बल्कि हमारी थाली में बदलाव में छिपा है—वरना यह खतरा आने वाले समय में और भी भयावह रूप ले सकता है।
दुनिया में हर साल लाखों लोग किसी युद्ध, महामारी या दुर्घटना से नहीं, बल्कि अपनी खानपान की खराब आदतों से मर रहे हैं। एक नए वैश्विक अध्ययन ने खुलासा किया है कि खराब खानपान दिल से जुड़ी बीमारियों (इस्कीमिक हार्ट डिजीज) की सबसे बड़ी वजह बनता जा रहा है। चिंता की बात है कि 2023 में इसकी वजह से 40 लाख से ज्यादा लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था।
अध्ययन में यह भी सामने आया है कि खराब खानपान महज लोगों की मृत्यु का कारण ही नहीं बन रहा, बल्कि साथ ही उनका स्वास्थ्य भी छीन रहा है।
आंकड़े दर्शाते हैं कि 2023 में इसने दुनिया में लोगों से स्वस्थ जीवन के 9.7 करोड़ साल भी छीन लिए। विडम्बना देखिए कि यह वो समय था, जो लोग अपने परिवार, सपनों और खुशियों के साथ जी सकते थे, लेकिन उन्हें बीमारी ने छीन लिया।
मतलब कि कहीं न कहीं दुनिया इस समय एक ऐसी खामोश महामारी से जूझ रही है, जिसका इलाज दवा में नहीं, बल्कि हमारी थाली में छिपा है।
गौरतलब है कि इस्कीमिक हार्ट डिजीज, जिसे कोरोनरी आर्टरी डिजीज भी कहते हैं, हृदय की मांसपेशियों में रक्त और ऑक्सीजन की कमी के कारण होने वाली एक गंभीर स्थिति है। इस बीमारी में आमतौर पर ह्रदय तक ऑक्सीजन युक्त रक्त पहुंचाने वाली धमनियां संकुचित हो जाती हैं। इसके प्रमुख लक्षणों में सीने में दर्द (एंजाइना), सांस फूलना, और थकान शामिल हैं। इस स्थिति में हार्ट अटैक और मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है।
थाली की वो गलतियां जो दिल पर पड़ रही हैं भारी
यह अध्ययन 204 देशों के स्वास्थ्य सम्बन्धी आंकड़ों के विश्लेषण पर आधारित है, जिसके नतीजे अंतराष्ट्रीय जर्नल नेचर मेडिसिन में प्रकाशित हुए हैं।
इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने खानपान से जुड़े 13 प्रमुख कारकों का विस्तृत विश्लेषण किया है। इनमें फल, सब्जियां, साबुत अनाज, मेवे, बीज, फाइबर, ओमेगा-3, ओमेगा-6 फैटी एसिड, दालें, लाल मीट, प्रोसेस्ड मीट, मीठे पेय पदार्थ, ट्रांस फैट और नमक शामिल थे। अध्ययन में पाया गया कि आहार में साबुत अनाज, मेवे और फल की कमी और नमक ज्यादा इस बीमारी से होने वाली मौत की सबसे बड़ी वजह रही।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि आहार में साबुत अनाज, ओमेगा-6 फैटी एसिड, मेवे और बीजों की कमी तथा नमक का ज्यादा सेवन, दिल की बीमारी से होने वाली मौतों के पीछे के सबसे बड़े कारणों में शामिल रहे। यानी समस्या सिर्फ जंक फूड नहीं, बल्कि स्वस्थ और संतुलित आहार की कमी भी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कम पोषण और ज्यादा नमक का खतरनाक मेल दिल की धमनियों को धीरे-धीरे बंद कर देता है, जिसका लोगों को पता भी नहीं चलता।
अमीर और गरीब देशों की समस्या अलग
रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा किया गया है कि 1990 के मुकाबले 2023 में आहार से जुड़ी दिल की बीमारी से होने वाली मौतें 41 फीसदी बढ़ गई।
हालांकि बेहतर इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं की वजह से प्रति लाख आबादी पर होने वाली मौतों की दर में करीब 44 फीसदी की कमी आई है। अध्ययन से यह भी पता चला है कि जहां विकासशील देशों में लोग पौष्टिक आहार की कमी के चलते दिल की बीमारी का शिकार हो रहे हैं।
वहीं दूसरी तरफ विकसित देशों में प्रोसेस्ड मीट, मीठे पेय और ज्यादा कैलोरी वाले भोजन की वजह से यह खतरा बढ़ रहा है।
नतीजे दर्शाते हैं कि 1990 के बाद से कई समृद्ध क्षेत्रों जैसे पश्चिमी यूरोप, ऑस्ट्रेलिया-एशिया और उत्तरी अमेरिका में जागरूकता और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं से इससे जुड़ी मौतों में कमी आई है। उदाहरण के लिए पश्चिमी यूरोप में इन मौतों में -69.78 फीसदी की कमी आई है। इसी तरह ऑस्ट्रेलिया-एशिया में -77.32 फीसदी और उत्तरी अमेरिका में -64.41 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि चिंता की बात है कि इससे होने वाली मृत्यु का आंकड़ा अब भी बड़ा बना हुआ है।
वहीं दूसरी तरफ मध्य अफ्रीका के कुछ हिस्सों में आहार से जुड़ी हृदय सम्बन्धी बीमारियों से होने वाली मौतों में 20.86 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसी तरह अफ्रीका और दक्षिण एशिया जैसे क्षेत्रों में हालात अब भी बिगड़े हुए हैं, जहां पोषण की कमी अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
युवाओं में तेजी से बढ़ रहा खतरा
अध्ययन में इस बात की भी पुष्टि हुई है कि 65 वर्ष से ऊपर के लोगों में मृत्यु का खतरा सबसे ज्यादा है, लेकिन गलत खानपान की आदतें युवाओं में भी तेजी से दिल की बीमारियों को बढ़ा रही हैं।
शोधकर्ताओं का कहना है कि दिल की बीमारी को कम करने के लिए सिर्फ दवाइयों से नहीं, बल्कि थाली में बदलाव करने से बड़ा फर्क पड़ेगा। उनके मुताबिक दिल की बीमारियों का बड़ा हिस्सा सिर्फ खानपान में सुधार करके रोका जा सकता है। ऐसे में यदि लोग लोग रोजाना साबुत अनाज, फल, मेवे, बीज खाएं और नमक व प्रोसेस्ड फूड का कम से कम सेवन करें तो इसकी मदद से लाखों जानें बचाई जा सकती हैं।
देखा जाए तो हम रोज जो खाते हैं, वह तय करता है कि हमारा दिल कितना स्वस्थ रहेगा। खराब खानपान अब सिर्फ आदत नहीं, बल्कि दुनिया के लिए एक बड़ा स्वास्थ्य संकट बन चुका है। ऐसे में यदि थाली में बदलाव न किया गया तो दिल की बीमारी आने वाले वर्षों में और बड़ी वैश्विक त्रासदी बन सकती है।