एनएसओ सर्वे 2025: भारत में दिल की बीमारियां सात साल में तीन गुना, 15–29 वर्ष के युवा भी तेजी से शिकार

ताजा सर्वे में दिल की बीमारियां कुल बीमारियों का 25.6% तक पहुंचीं, जो अन्य बीमारियों की तुलना में सबसे अधिक है। कैंसर, किडनी फेल के बाद दिल की बीमारियों के इलाज पर हो रहा है सबसे अधिक खर्च
आज की जीवनशैली, तनाव, अनियमित खानपान और लंबे काम करने के घंटों के कारण युवा पीढ़ी भी तेजी से हृदय रोगों की चपेट में आ रही है।
आज की जीवनशैली, तनाव, अनियमित खानपान और लंबे काम करने के घंटों के कारण युवा पीढ़ी भी तेजी से हृदय रोगों की चपेट में आ रही है। फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • राष्ट्रीय सांख्यिकीय संगठन के ताजा आंकड़े बताते हैं कि हृदय रोग अब देश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन गए हैं।

  • हृदय रोगों के मामले सात साल में लगभग तीन गुना बढ़कर प्रति एक लाख आबादी पर 3,891 हो गए हैं।

  • सर्वे के अनुसार भारत में कुल बीमारियों में दिल की हिस्सेदारी 25.6% है

  • 15–29 वर्ष के 3.4% युवा भी हृदय रोग के कारण अस्पताल में भर्ती हुए

  • ग्रामीण–शहरी दोनों क्षेत्रों में इलाज का खर्च ऊंचा है और बीमा कवरेज सीमित होने से परिवारों पर भारी आर्थिक दबाव पड़ रहा है

पिछले सात साल के दौरान देश में हृदय रोग से पीड़ितों की संख्या में लगभग तीन गुणा वृद्धि हो गई है। इतना ही नहीं, अब 15 से 29 साल के युवा भी हृदय रोग की चपेट में आ रहे हैं। देश की यह चिंताजनक तस्वीर राष्ट्रीय सांख्यिकीय संगठन (एनएसओ) के ताजा सर्वेक्षण में सामने आई है।  

एनएसओ की ओर से जनवरी-दिसंबर 2025 के बीच किए गए घरेलू उपभोग सर्वेक्षण (स्वास्थ्य) के अनुसार सर्वे से पिछले 15 दिनों में देश के करीब 13.1 प्रतिशत लोगों ने खुद को बीमार बताया, जबकि प्रति एक लाख आबादी पर कुल 15,217 बीमारियों के मामले दर्ज किए गए, जिससे यह संकेत मिलता है कि कई लोगों को एक से अधिक स्वास्थ्य समस्याएं थीं। महिलाओं में यह संख्या 17,006 है, जो पुरुषों (13,504) से ज्यादा थी।

रिपोर्ट के मुताबिक बीमारियों में सबसे बड़ा हिस्सा हृदय से संबंधित बीमारियों (3,891) और डायबिटीज जैसी मेटाबोलिक समस्याओं (3,681) का है। इसके अलावा सांस की बीमारियां (1,536) और हड्डी-जोड़ के दर्द (1,226) भी बड़ी संख्या में हैं।

हृदय रोग से संबंधित बीमारियों (कार्डियो वेस्कुलर) में हाइपर टेंशन, हृदय रोग, छाती में दर्द व सांस लेने में दिक्कत शामिल हैं। इसमें हाइपरटेंशन की शिकायत करने वालों की संख्या एक लाख की आबादी पर 3358 थी, जबकि अन्य बीमारियों की संख्या 533 रिकॉर्ड की गई। 

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देश में बीमारियों के स्वरूप में हृदय रोग सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। आंकड़ों के अनुसार, कुल बीमारियों में इनकी हिस्सेदारी सबसे अधिक 25.6 प्रतिशत है, जो अन्य सभी श्रेणियों से ज्यादा है। इसके बाद हार्मोन, शुगर (डायबिटीज) और पोषण से जुड़ी बीमारियां का प्रतिशत 24.2 है। 

खास बात यह है कि उम्र बढ़ने के साथ हृदय रोगों का प्रभाव तेजी से बढ़ता है। जहां 0–4 वर्ष में यह मात्र 0.3 प्रतिशत और 5–14 वर्ष में 0.2 प्रतिशत है, वहीं 30–44 वर्ष में यह बढ़कर 15.3 प्रतिशत हो जाता है। 45–59 वर्ष के आयु वर्ग में यह 30.1 प्रतिशत और 60 वर्ष से अधिक में 37.8 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। यह रुझान साफ तौर पर दिखाता है कि हृदय संबंधी बीमारियां अब देश में सबसे प्रमुख स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही हैं। 

अस्पताल में भर्ती होने वाले लोगों पर किए गए सर्वे में बताया गया है कि 15 से 29 वर्ष के आयु वर्ग मे सबसे अधिक लोग संक्रमण के कारण अस्पातालों में भर्ती हुए। उनकी तादात 27 फीसदी रही, लेकिन इस उम्र में हृदय रोग के कारण अस्पताल में भर्ती होने वाली संख्या भी चौंकाने वाली है। रिपोर्ट के मुताबिक 15 से 29 आयु वर्ग के 3.4 प्रतिशत लोग हृदय रोग के कारण अस्पतालों में भर्ती हुए। 

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हालांकि इसके बाद सिलसिला बढ़ता चला जाता है और 30-44 आयु वर्ग में हृदय रोगों की संख्या बढ़ जाती है और साल 2025 के दौरान 7.3 प्रतिशत लोग हृदय रोगों के अस्पतालों में भर्ती हुए।

वहीं 45 से 59 आयु वर्ग में हृदय रोग के कारण अस्पतालों में भर्ती होने वालों की संख्या 13.9 प्रतिशत तक पहुंच जाती है, संक्रमण के बाद अस्पताल में भर्ती होने का दूसरा सबसे बड़ा कारण बन गया है। और 60 साल से अधिक उम्र के लोगों में यह पहला बड़ा करण बन गया है। इस आयु वर्ग में 18.2 प्रतिशत लोग हृदय रोगों की शिकायत के चलते अस्पताल में भर्ती हुए। 

तीन गुणा उछाल

रिपोर्ट में 2017-18 और 2025 के बीच बीमारियों के बदलते रुझान का भी जिक्र किया गया है। जो बेहद चिंताजनक है।  इसके मुताबिक सात सालों में संक्रमण से जुड़ी बीमारियों में कमी आई है। यह 2017-18 में एक लाख की आबादी पर 2547 थी वह 2025-26 में घटकर 2302 हो गई। 

लेकिन दिल की बीमारियां लगभग तीन गुणा बढ़ गई हैं और पहले नंबर पर हैं। 2017-18 में जहां एक लाख की आबादी पर 1,333 मामले दिल की बीमारियों से जुड़े थे, वो 2025 में बढ़ कर 3,891 प्रति एक लाख तक पहुंच गए। 

रिपोर्ट के अनुसार, अस्पताल में भर्ती मामलों में दिल से जुड़ी बीमारियों की हिस्सेदारी ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में महत्वपूर्ण है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह हिस्सेदारी पुरुषों में 11.5 प्रतिशत, महिलाओं में 9.0 प्रतिशत और कुल मिलाकर 10.3 प्रतिशत है। वहीं शहरी क्षेत्रों में पुरुषों में 13.2 प्रतिशत, महिलाओं में 10.5 प्रतिशत और कुल मिलाकर 11.9 प्रतिशत है। 

यह साफ दिखाता है कि शहरों में दिल की बीमारियों के कारण अस्पताल में भर्ती होने के मामले ग्रामीण क्षेत्रों से ज्यादा हैं, और पुरुषों में इनकी हिस्सेदारी महिलाओं की तुलना में अधिक दर्ज की गई है।

कैंसर, किडनी के बाद सबसे महंगा इलाज 

रिपोर्ट के अनुसार, अस्पताल में भर्ती के दौरान खर्च के मामले में हृदय रोग प्रमुख और महंगे रोगों में शामिल हैं, लेकिन कुछ अन्य गंभीर बीमारियाँ इनसे भी अधिक खर्चीली हैं। शहरी क्षेत्रों में हृदय रोगों का इलाज अन्य कई बीमारियों की तुलना में काफी महंगा है। दिल की बीमारियों पर औसतन 69,451 रुपए खर्च आता है, जो संक्रमण (17,879 रुपए), रक्त रोग (23,565 रुपए) और सांस की बीमारियों (42,520 रुपए) से कहीं ज्यादा है। मेटाबोलिक बीमारियों (37,166 रुपए) और गैस्ट्रो-इंटेस्टाइनल समस्याओं (40,409 रुपए) की तुलना में भी हृदय रोगों का खर्च अधिक है। हालांकि, कुछ गंभीर बीमारियां हृदय रोगों से भी ज्यादा महंगी हैं। जैसे कैंसर (1,04,424 रुपए), किडनी फेल्योर (71,246 रुपए) और मस्कुलो-स्केलेटल समस्याएँ (76,106 रुपए)। इसके बावजूद, हृदय रोग खर्च के मामले में शीर्ष श्रेणी में बने हुए हैं।

वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में दिल की बीमारी के इलाज पर औसतन 47,135 रुपए खर्च आता है, जो संक्रमण (14,397 रुपए) और सांस की बीमारियों (22,881 रुपए) से कहीं ज्यादा है। हालांकि, यह खर्च कैंसर (62,588 रुपए) और किडनी फेल्योर (76,004 रुपए) से कम है, जो सबसे महंगे इलाज वाले रोगों में आते हैं। वहीं, मेटाबोलिक (29,179 रुपए) और गैस्ट्रो-इंटेस्टाइनल (34,451 रुपए) बीमारियों की तुलना में भी हृदय रोगों का इलाज काफी महंगा है। 

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