सांप के जहर पर नया एंटीवेनम मौजूदा इलाज की तुलना में 10 गुना ज्यादा असरदार

सांपों की प्राकृतिक सुरक्षा से तैयार होगी भविष्य की ज्यादा असरदार और सुरक्षित जीवनरक्षक दवा, पुरानी एंटीवेनम दवाओं की कमियां दूर करने के लिए वैज्ञानिकों ने खोजा नया तरीका
सांपों के खून में मिले खास प्रोटीन से वैज्ञानिक बना रहे नई और प्रभावी एंटीवेनम दवा।
सांपों के खून में मिले खास प्रोटीन से वैज्ञानिक बना रहे नई और प्रभावी एंटीवेनम दवा।फोटो साभार: आईस्टॉक
Published on
सारांश
  • सांपों के खून में मिले खास प्रोटीन से वैज्ञानिक बना रहे नई और प्रभावी एंटीवेनम दवा।

  • प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली की मदद से जहरीले सांपों के जहर का बेहतर इलाज खोजा गया।

  • नई प्रोटीन आधारित एंटीवेनम दवा कई खतरनाक सांपों के जहर पर असरदार साबित हुई।

  • मौजूदा एंटीवेनम की कमियों को दूर करने के लिए वैज्ञानिकों ने नया रास्ता खोजा।

  • सांपों की प्राकृतिक क्षमता से प्रेरित होकर सुरक्षित और सस्ती दवा बनाने की उम्मीद बढ़ी।

सांप के काटने से हर साल दुनिया भर में हजारों लोगों की मौत होती है। जहरीले सांपों के काटने का इलाज करने के लिए अभी एंटीवेनम दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इन दवाओं की अपनी सीमाएं हैं। अब वैज्ञानिकों ने सांपों के शरीर में मौजूद प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली से एक नया रास्ता खोजा है। यह खोज भविष्य में ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी एंटीवेनम बनाने में मदद कर सकती है।

अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के शोधकर्ताओं ने पाया है कि जहरीले सांपों के खून में कुछ ऐसे प्रोटीन मौजूद होते हैं, जो उनके अपने जहर के असर को रोक सकते हैं। वैज्ञानिकों ने इन्हीं प्राकृतिक सुरक्षा देने वाले प्रोटीनों का इस्तेमाल कर नई एंटीवेनम तकनीक विकसित करने की दिशा में काम शुरू किया है।

यह भी पढ़ें
राजस्थान में सर्पदंश पर एंटीवेनम हो रहा है बेअसर, क्या है वजह?
सांपों के खून में मिले खास प्रोटीन से वैज्ञानिक बना रहे नई और प्रभावी एंटीवेनम दवा।

सांपों के खून में छिपा है जहर का इलाज

जहरीले सांप जब शिकार करते हैं तो उनके शरीर में भी गलती से जहर का असर हो सकता है। इसके बावजूद वे खुद अपने जहर से सुरक्षित रहते हैं। लंबे समय से वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे थे कि आखिर सांप अपने ही जहर से कैसे बचते हैं। यह शोध प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित किया गया है।

शोधकर्ताओं ने पश्चिमी डायमंडबैक रैटलस्नेक के खून में मौजूद कुछ खास प्रोटीनों का अध्ययन किया। इन प्रोटीनों में जहर के खतरनाक तत्वों को रोकने की क्षमता पाई गई। वैज्ञानिकों का मानना है कि प्रकृति ने सांपों को खुद को बचाने के लिए एक प्राकृतिक एंटीवेनम दिया हुआ है।

यह भी पढ़ें
सर्पदंश की रोकथाम और नियंत्रण के लिए डब्ल्यूएचओ ने बनाई क्षेत्र आधारित कार्य योजना
सांपों के खून में मिले खास प्रोटीन से वैज्ञानिक बना रहे नई और प्रभावी एंटीवेनम दवा।

मौजूदा एंटीवेनम में हैं कई कमियां

अभी जो एंटीवेनम दवाएं इस्तेमाल की जाती हैं, उन्हें बनाने के लिए बड़े जानवरों, जैसे घोड़ों या भेड़ों को सांप के जहर की थोड़ी मात्रा दी जाती है। इसके बाद उनके शरीर में बनने वाली एंटीबॉडी को इकट्ठा करके दवा तैयार की जाती है।

यह प्रक्रिया महंगी और जटिल होती है। इसके अलावा अलग-अलग सांपों के जहर में अलग-अलग प्रकार के विषैले तत्व होते हैं, इसलिए एक एंटीवेनम हर तरह के जहर पर समान रूप से प्रभावी नहीं होता। कई बार इन दवाओं से मरीजों में गंभीर एलर्जी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

यह भी पढ़ें
भारत के ग्रामीण इलाकों में सर्पदंश पीड़ितों में से केवल 30 प्रतिशत ही अस्पताल पहुंच पाते हैं: आईसीएमआर
सांपों के खून में मिले खास प्रोटीन से वैज्ञानिक बना रहे नई और प्रभावी एंटीवेनम दवा।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया में हर साल लगभग 80 हजार से 1.4 लाख लोगों की मौत सांप के काटने से होती है। लाखों लोग स्थायी विकलांगता का शिकार भी हो जाते हैं। खासकर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए समय पर इलाज मिलना बड़ी चुनौती है।

प्रोटीन के मिश्रण से बढ़ी ताकत

नए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने कई प्राकृतिक प्रोटीनों को मिलाकर परीक्षण किया। अकेले इस्तेमाल किए जाने पर इन प्रोटीनों का असर सीमित था, लेकिन जब इन्हें एक साथ मिलाया गया तो इनकी जहर रोकने की क्षमता काफी बढ़ गई।

यह भी पढ़ें
रैटलस्नेक के बारे में पुराना मिथक टूटा, शोध ने जहर नियंत्रण व खतरे की सच्चाई रखी सामने
सांपों के खून में मिले खास प्रोटीन से वैज्ञानिक बना रहे नई और प्रभावी एंटीवेनम दवा।

प्रयोगशाला में किए गए परीक्षणों में कुछ विशेष प्रोटीन मिश्रणों ने रैटलस्नेक के जहर को रोकने में मौजूदा एंटीवेनम की तुलना में करीब दस गुना अधिक प्रभाव दिखाया। इन मिश्रणों ने कई खतरनाक सांपों के जहर के खिलाफ भी सुरक्षा प्रदान की।

वैज्ञानिकों का कहना है कि एक सांप के जहर में लगभग 100 अलग-अलग विषैले प्रोटीन हो सकते हैं। इसलिए सभी प्रकार के जहर के लिए एक प्रभावी एंटीवेनम तैयार करना आसान नहीं है। इसके लिए अलग-अलग प्रोटीनों के सही संयोजन की पहचान करनी होगी।

यह भी पढ़ें
ग्लाइकोपॉलिमर टेस्ट: सांप के जहर की पहचान में क्रांतिकारी बदलाव
सांपों के खून में मिले खास प्रोटीन से वैज्ञानिक बना रहे नई और प्रभावी एंटीवेनम दवा।

भविष्य में बेहतर इलाज की उम्मीद

शोधकर्ता अब जहर के दूसरे प्रमुख विषैले तत्वों के खिलाफ भी इसी तरह के प्रोटीन विकसित करने पर काम कर रहे हैं। उनका लक्ष्य ऐसी एंटीवेनम दवाएं बनाना है, जो कई प्रकार के सांपों के जहर पर असर कर सकें।

शोध दल के प्रमुख सीन बी. कैरोल के अनुसार, प्रकृति ने पहले ही इस समस्या का समाधान खोज रखा है। अब वैज्ञानिकों का काम इन प्राकृतिक सुरक्षा तत्वों को समझकर बड़े पैमाने पर उपयोग के लिए तैयार करना है।

यह भी पढ़ें
भारत में सांप के काटने का संकट गहराएगा, जलवायु परिवर्तन है बड़ी वजह
सांपों के खून में मिले खास प्रोटीन से वैज्ञानिक बना रहे नई और प्रभावी एंटीवेनम दवा।

इंसानों के साथ जानवरों के इलाज में भी होगा उपयोग

वैज्ञानिकों का मानना है कि इस नई तकनीक का पहला व्यावसायिक इस्तेमाल पशुओं के इलाज में हो सकता है। इसके बाद इसे इंसानों के लिए विकसित किया जा सकता है।

नई पीढ़ी की एंटीवेनम दवाएं अधिक सुरक्षित, सस्ती और आसानी से बड़े स्तर पर बनाई जा सकेंगी। यह खोज दुनिया भर में सांप के काटने से होने वाली मौतों को कम करने की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकती है। प्रकृति में मौजूद सांपों की अपनी सुरक्षा प्रणाली अब इंसानों के लिए जीवन बचाने वाली दवा का रास्ता खोल सकती है।

Down to Earth- Hindi
hindi.downtoearth.org.in