चीनी और नमक के ब्रांड उत्पादों में माइक्रोप्लास्टिक, एनजीटी ने पर्यावरण मंत्रालय से मांगी जवाबदेही

सुनवाई के दौरान पर्यावरण मंत्रालय के वकील नहीं पेश कर पाए तथ्य
खराब खानपान और जीवनशैली के मामले में विकसित देशों की राह पर भारत, तय मानकों से 60 फीसदी ज्यादा नमक का सेवन कर रहे हैं भारतीय; फोटो: आईस्टॉक
खराब खानपान और जीवनशैली के मामले में विकसित देशों की राह पर भारत, तय मानकों से 60 फीसदी ज्यादा नमक का सेवन कर रहे हैं भारतीय; फोटो: आईस्टॉक
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राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने नमक और चीनी के ज्यादातर ब्रांड्स में माइक्रोप्लास्टिक की मौजूदगी पर अपनी चिंता जाहिर करते हुए केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से जवाबदेही मांगी है। पीठ ने मंत्रालय की ओर से कोई ठोस कदम न उठाए जाने को लेकर कड़ी नाराजगी जाहिर की है।

एनजीटी के चेयरमैन और जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और उनके साथ एक्सपर्ट मेंबर डॉ. ए. सेंथिल वेल और डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने एक रिपोर्ट में खुलासे के बाद इस मामले का संज्ञान लिया है।

एनजीटी ने पाया कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की तरफ से दिया गया जवाब नाकाफी था। साथ ही जवाबी हलफनामें में कार्रवाई को लेकर जिस कार्यालय ज्ञापन का जिक्र किया गया था उसे सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किया गया।

अधिकरण ने यह भी नोट किया कि पर्यावरण मंत्रालय के वकील के पास 16 अक्टूबर 2025 के जवाबी हलफनामे की प्रति भी उपलब्ध नहीं थी, जो कि रिकॉर्ड में मौजूद है। हलफनामे के दाखिल होने की तारीख को लेकर भी विरोधाभास पाया गया, जिससे प्रक्रियात्मक चूक सामने आई।

इन परिस्थितियों में अधिकरण ने पर्यावरण मंत्रालय को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई में न्यायाधिकरण की सहायता हेतु एक जिम्मेदार अधिकारी नियुक्त किया जाए।

मामले की अगली सुनवाई 5 अगस्त 2026 को निर्धारित की गई है।

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