

न्यूयॉर्क में 30 साल बाद खसरे से पहली मौत, लुईस काउंटी में मासूम की जान गई, स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा।
अमेरिका में खसरे के 4,588 मामले दर्ज, पिछले साल से दोगुने से ज्यादा संक्रमण ने बढ़ाई स्वास्थ्य अधिकारियों की चिंता।
खसरे से बचाव के लिए 95 फीसदी टीकाकरण जरूरी, लेकिन अमेरिका में घटती वैक्सीन कवरेज बनी बड़ी चुनौती।
गवर्नर ने टीकाकरण नीतियों पर संघीय सरकार को घेरा, कहा- दशकों की स्वास्थ्य उपलब्धियां खतरे में।
सीडीसी के अनुसार, पेंसिल्वेनिया में 1,338 खसरे के मामले, दक्षिण कैरोलिना और यूटा में भी 500 से ज्यादा संक्रमित मरीज सामने आए।
अमेरिका के न्यूयॉर्क राज्य से आई एक दुखद खबर ने पूरे देश को झकझोर दिया है। ग्रामीण इलाके लुईस काउंटी में खसरे (मीजल्स) से संक्रमित एक बच्चे की मौत हो गई। पिछले 30 वर्षों में यह न्यूयॉर्क में खसरे से हुई पहली मौत है। एक मासूम की मौत ने अमेरिका में टीकाकरण व्यवस्था, स्वास्थ्य नीतियों और सरकार की जिम्मेदारी पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
95 फीसदी टीकाकरण जरूरी, लेकिन कवरेज में गिरावट
खसरा कोई मामूली संक्रामक बीमारी नहीं है। यह वायरस बेहद तेजी से फैलता है और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने वालों को आसानी से अपनी चपेट में ले सकता है। शुरुआत में बुखार, खांसी, नाक बहना और आंखें लाल होने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। इसके बाद शरीर पर लाल चकत्ते उभरने लगते हैं। गंभीर मामलों में निमोनिया, दिमाग में सूजन और यहां तक कि मौत भी हो सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, खसरे के हर 1,000 मामलों में लगभग एक से तीन मरीजों की मौत हो सकती है। इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका एमएमआर (मीजल्स, मम्प्स और रूबेला) वैक्सीन है।
अमेरिका ने साल 2000 में देश के भीतर खसरे के लगातार प्रसार को रोकने में सफलता हासिल की थी। इसके पीछे व्यापक टीकाकरण अभियान और लोगों में जागरूकता की बड़ी भूमिका थी। लेकिन हाल के वर्षों में बच्चों के टीकाकरण की दर में गिरावट आई है। विशेषज्ञों के अनुसार, खसरे के प्रकोप को रोकने के लिए लगभग 95 प्रतिशत आबादी का टीकाकरण जरूरी है। इस स्तर से नीचे पहुंचने पर बीमारी के फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
2026 में 4,588 मामले, कई राज्यों में हाहाकार
अमेरिका में खसरे का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। अक्टूबर 2026 के अंत तक रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (सीडीसी) ने देशभर में खसरे के 4,588 मामलों की पुष्टि की थी। यह आंकड़ा वर्ष 2025 में दर्ज मामलों के मुकाबले दोगुने से भी अधिक है।
पेंसिल्वेनिया में स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक बताई जा रही है। वहां स्वास्थ्य अधिकारियों ने इसी अवधि तक 1,338 मामले दर्ज किए। दक्षिण कैरोलिना और यूटा में भी 500 से अधिक मामले सामने आए हैं।
सीडीसी ने इस साल खसरे से जुड़ी तीन मौतों की पुष्टि की है, जबकि कुछ राज्यों के स्वास्थ्य विभागों ने इससे अधिक मौतों की जानकारी दी है। पेंसिल्वेनिया के अधिकारियों ने छह मौतों की रिपोर्ट दी है। इन आंकड़ों के बीच न्यूयॉर्क के बच्चे की मौत ने चिंता और बढ़ा दी है।
संघीय सरकार पर उठे सवाल
रिपोर्ट के मुताबिक, न्यूयॉर्क की गवर्नर ने इस घटना के लिए संघीय सरकार की टीकाकरण नीति पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि टीकाकरण के क्षेत्र में दशकों की मेहनत और उपलब्धियों को कमजोर करने का खामियाजा आम परिवारों को भुगतना पड़ सकता है।
अक्टूबर की शुरुआत में राज्य में आपदा आपातकाल घोषित किया गया था। पड़ोसी राज्यों और ग्रामीण इलाकों में बढ़ते मामलों को देखते हुए यह कदम उठाया गया। इसके तहत पैरामेडिक्स, दाइयों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को खसरे का टीका लगाने की अनुमति देने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा बढ़ाया गया। नर्सों को भी जांच के आदेश देने की अनुमति दी गई।
अमेरिकी स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग के सचिव भी टीकाकरण को लेकर अपने बयानों और नीतिगत बदलावों के कारण आलोचनाओं का सामना कर रहे हैं। उनके कार्यकाल में बचपन के टीकाकरण संबंधी सरकारी सिफारिशों में व्यापक बदलाव किए गए हैं।
हालांकि विभाग ने इस घटना पर दुख जताते हुए कहा कि सीडीसी के महामारी विशेषज्ञ न्यूयॉर्क के स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। वे बीमारी की निगरानी, आंकड़ों के विश्लेषण और संक्रमण पर काबू पाने की रणनीति बनाने में मदद कर रहे हैं। विभाग ने यह भी दोहराया कि एमएमआर वैक्सीन खसरे से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
सवाल सिर्फ एक मौत का नहीं, आने वाली पीढ़ियों का है
न्यूयॉर्क में बच्चे की मौत ने एक कड़वी सच्चाई सामने रख दी है। जिस बीमारी को टीकाकरण के जरिए काफी हद तक नियंत्रित किया जा चुका था, वह फिर बच्चों के लिए खतरा बन रही है।
सवाल यह है कि जब बचाव का टीका मौजूद है, तब मासूमों की जान क्यों जा रही है? स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए यह सिर्फ एक बीमारी का प्रकोप नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की परीक्षा भी है। टीकाकरण को लेकर भ्रम, गिरती कवरेज और नीतिगत अनिश्चितता के बीच सबसे बड़ी कीमत उन बच्चों को चुकानी पड़ सकती है, जिनके पास अपने स्वास्थ्य से जुड़े फैसले लेने का अधिकार तक नहीं है।
एक बच्चे की मौत पूरे समाज के लिए चेतावनी है। खसरे से लड़ाई अस्पतालों में नहीं, जागरूकता, भरोसे और समय पर टीकाकरण से जीती जाएगी।