भारत में सीसा प्रदूषण से हर साल 236 अरब डॉलर का नुकसान, जीडीपी का पांच फीसदी

अध्ययन में पाया गया कि 52 फीसदी मिट्टी के नमूनों में सीसे की मात्रा 5000 पार्ट्स पर मिलियन (पीपीएम) से अधिक पाई गई।
जांच किए गए 23 नमूनों में से 52 प्रतिशत में सीसा 5000 पीपीएम से अधिक मिला, जो अत्यधिक खतरनाक सीमा को दर्शाता है।
जांच किए गए 23 नमूनों में से 52 प्रतिशत में सीसा 5000 पीपीएम से अधिक मिला, जो अत्यधिक खतरनाक सीमा को दर्शाता है।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • टॉक्सिक्स लिंक के अध्ययन में बैटरी रीसाइक्लिंग क्षेत्रों की मिट्टी में सीसा खतरनाक स्तर तक पाया गया, जिससे पर्यावरण और स्वास्थ्य गंभीर प्रभावित।

  • जांच किए गए 23 नमूनों में से 52 प्रतिशत में सीसा 5000 पीपीएम से अधिक मिला, जो अत्यधिक खतरनाक सीमा दर्शाता है।

  • बच्चों और गर्भवती महिलाओं पर सीसा का सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है, जिससे मानसिक विकास, व्यवहार और स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।

  • अधिकृत रीसाइक्लिंग इकाइयों के आसपास भी सीसा प्रदूषण अधिक पाया गया, जिससे नियमों के कमजोर पालन और निगरानी की कमी सामने आई।

  • विशेषज्ञों ने अनधिकृत रीसाइक्लिंग रोकने, सख्त नियम लागू करने, जागरूकता बढ़ाने और नियमित जांच से इस समस्या के समाधान पर जोर दिया।

टॉक्सिक्स लिंक द्वारा जारी एक अध्ययन में यह सामने आया है कि भारत के कई इलाकों में बैटरी रीसाइक्लिंग इकाइयों के आसपास की मिट्टी में सीसे (लेड) का स्तर बहुत अधिक पाया गया है। यह स्थिति पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। यह अध्ययन खासतौर पर दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में किया गया।

सीसा प्रदूषण क्या है और यह कैसे फैलता है

सीसा एक जहरीली धातु है, जिसका शरीर में कोई सुरक्षित स्तर नहीं माना जाता। यह हवा, पानी, मिट्टी और भोजन के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर सकता है। खासकर बैटरी रीसाइक्लिंग के दौरान यदि सही तरीके नहीं अपनाए जाएं, तो सीसा आसपास के वातावरण में फैल जाता है। खुले में कचरा फेंकना और बिना सुरक्षा उपायों के काम करना इस समस्या को और बढ़ाता है।

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अध्ययन के मुख्य निष्कर्ष

इस अध्ययन में कुल 23 मिट्टी के नमूनों की जांच की गई। सभी नमूनों में सीसा पाया गया, जिसकी मात्रा 100 पार्ट्स पर मिलियन (पीपीएम) से लेकर 43,800 पीपीएम तक थी। चौंकाने वाली बात यह है कि लगभग 52 फीसदी नमूनों में सीसा की मात्रा 5000 पीपीएम से अधिक थी, जो कि खतरनाक स्तर माना जाता है।

इसके अलावा 31 फीसदी नमूनों में सीसा की मात्रा औद्योगिक क्षेत्रों के लिए तय मानकों से भी ज्यादा पाई गई। कुछ स्थानों पर तो बैटरी का कचरा खुले में पड़ा मिला, जिससे मिट्टी और भूजल दोनों के प्रदूषित होने का खतरा बढ़ गया।

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अधिकृत इकाइयों में भी खतरा

अध्ययन में यह भी सामने आया कि अधिकृत (औपचारिक) रीसाइक्लिंग इकाइयों के आसपास भी सीसा का स्तर ज्यादा पाया गया। यह एक चिंताजनक संकेत है कि नियमों का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है। इससे यह स्पष्ट होता है कि केवल अनुमति होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सही प्रबंधन भी जरूरी है।

स्वास्थ्य पर सीसा का प्रभाव

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, सीसा एक खतरनाक जहर है, जो हर साल लाखों लोगों की मौत का कारण बनता है। यह शरीर में जमा होकर कई अंगों को नुकसान पहुंचाता है।

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बच्चों और गर्भवती महिलाओं पर इसका असर सबसे अधिक होता है। बच्चों में यह दिमाग के विकास को प्रभावित करता है, जिससे उनकी सीखने की क्षमता कम हो सकती है। इसके अलावा व्यवहार संबंधी समस्याएं, ध्यान की कमी और मानसिक विकास में बाधा जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

गंभीर मामलों में यह बेहोशी, दौरे या मृत्यु का कारण भी बन सकता है। अंतरराष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान संस्था ने भी सीसा को कैंसरकारी तत्व के रूप में वर्गीकृत किया है।

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आर्थिक प्रभाव

सीसा प्रदूषण केवल स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित करता है। एक अध्ययन के अनुसार, सीसा के कारण कम आईक्यू और उत्पादकता में कमी से दुनिया भर में भारी आर्थिक नुकसान होता है। भारत में यह नुकसान सालाना लगभग 236 अरब डॉलर आंका गया है, जो देश के जीडीपी का लगभग पांच फीसदी है।

नियमों में कमी और लागू करने की जरूरत

भारत में बैटरी वेस्ट मैनेजमेंट के लिए नियम बनाए गए हैं, लेकिन उनका सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है। कई स्थानों पर अनधिकृत रीसाइक्लिंग इकाइयां चल रही हैं, जो बिना किसी सुरक्षा उपाय के काम करती हैं। इससे प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है।

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समाधान और आगे की राह

इस समस्या से निपटने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है। अनधिकृत रीसाइक्लिंग पर रोक लगानी होगी और नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना होगा। सभी इकाइयों में बेहतर तकनीक और सुरक्षित प्रक्रियाओं को अपनाना जरूरी है।

इसके अलावा आसपास के क्षेत्रों में नियमित रूप से मिट्टी, पानी और हवा की जांच करनी चाहिए। लोगों के स्वास्थ्य की जांच भी समय-समय पर होनी चाहिए, खासकर बच्चों की।

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जनता में जागरूकता बढ़ाना भी बहुत जरूरी है। लोगों को यह समझना होगा कि पुराने बैटरियों को सही जगह पर ही जमा करें और उन्हें खुले में न फेंकें।

बैटरी रीसाइक्लिंग से जुड़ा सीसा प्रदूषण एक गंभीर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है। यदि समय रहते सही कदम नहीं उठाए गए, तो इसके परिणाम और भी खतरनाक हो सकते हैं। सरकार, उद्योग और आम जनता को मिलकर इस समस्या का समाधान निकालना होगा, तभी हम एक सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य की ओर बढ़ सकते हैं।

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