फ्रांस में शमोंडा वायरस से पहली इंसानी मौत, पशुओं से इंसानों में संक्रमण को लेकर बढ़ी चिंता

डब्ल्यूएचओ ने कहा- फिलहाल बड़े पैमाने पर फैलने का खतरा कम, आइए जानते हैं क्या है शमोंडा वायरस
मिज नामक छोटे काटने वाले कीड़ों से फैलता है शमोंडा वायरस, पशुपालकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की बढ़ी चिंता।
मिज नामक छोटे काटने वाले कीड़ों से फैलता है शमोंडा वायरस, पशुपालकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की बढ़ी चिंता।प्रतीकात्मक छवि, साभार आईस्टॉक
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सारांश
  • फ्रांस में शमोंडा वायरस से पहली इंसानी मौत, गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज की संक्रमण के बाद हालत बिगड़ी।

  • नाइजीरिया में 1965 में मिला था वायरस, अब यूरोप के एक दर्जन से अधिक देशों में पशुओं तक पहुंचा।

  • संक्रमित पशुओं में बुखार, दस्त और दूध उत्पादन में कमी, गर्भपात तथा भ्रूण में विकृति का भी खतरा।

  • मिज नामक छोटे काटने वाले कीड़ों से फैलता है शमोंडा वायरस, पशुपालकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की बढ़ी चिंता।

  • डब्ल्यूएचओ के मुताबिक इंसानों में संक्रमण का मामला असाधारण, फिलहाल बड़े पैमाने पर फैलने का खतरा बेहद कम है।

फ्रांस में शमोंडा वायरस से संक्रमित एक मरीज की मौत के बाद स्वास्थ्य जगत में चिंता बढ़ गई है। यह वायरस अब तक मुख्य रूप से गाय-बैलों और दूसरे पशुओं को प्रभावित करने के लिए जाना जाता था। इंसान में संक्रमण का यह पहला दर्ज मामला बताया जा रहा है। हालांकि स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल इस घटना से बड़े पैमाने पर इंसानी संक्रमण फैलने का खतरा कम है।

क्या है शमोंडा वायरस?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, शमोंडा वायरस एक ऐसा वायरस है, जो मुख्य रूप से मवेशियों को प्रभावित करता है। इसका प्रसार छोटे, काटने वाले कीड़ों यानी मिज के जरिए होता है। ये कीड़े संक्रमित पशुओं को काटने के बाद दूसरे पशुओं तक वायरस पहुंचा सकते हैं।

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इस वायरस की पहचान पहली बार वर्ष 1965 में अफ्रीकी देश नाइजीरिया में मवेशियों में हुई थी। इसके बाद अफ्रीका और एशिया के कुछ हिस्सों में भी इसकी मौजूदगी दर्ज की गई। अब यूरोप में इसका फैलना पशुपालकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए नई चुनौती बन गया है।

यूरोप के कई देशों तक पहुंचा वायरस

इस साल जुलाई के आखिर में यूरोप में शमोंडा वायरस की मौजूदगी सामने आई। 20 अक्टूबर तक एक दर्जन से अधिक यूरोपीय देशों में इसके मामले सामने आने की खबर थी। इनमें फ्रांस, जर्मनी, स्पेन और आयरलैंड जैसे बड़े पशुपालन वाले देश भी शामिल हैं।

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फ्रांस के अधिकारियों को आशंका है कि यह वायरस देश में वसंत ऋतु से ही पशुओं के बीच फैल रहा था। हालांकि इसकी वास्तविक व्यापकता का पता लगाना आसान नहीं है।

पशुओं के लिए कितना खतरनाक?

शमोंडा वायरस से संक्रमित पशुओं में बुखार, दस्त और दूध उत्पादन में कमी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। गर्भवती पशुओं में गर्भपात और गर्भस्थ शिशु में गंभीर विकृतियां भी हो सकती हैं। कुछ घोड़ों में तंत्रिका तंत्र से जुड़ी समस्याएं सामने आने की बात भी कही गई है।

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दूध उत्पादन घटने और पशुओं की सेहत बिगड़ने से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। हालांकि यूरोप में सामने आए वायरस के नए रूपों का लंबे समय में क्या असर होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

इंसानों के लिए कितना बड़ा खतरा?

फ्रांस में जिस मरीज की मौत हुई, उसका इलाज ल्योन के एक अस्पताल में चल रहा था। मरीज पहले से गंभीर बीमारी से जूझ रहा था और उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहद कमजोर थी।

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फ्रांसीसी अधिकारियों को शक है कि मरीज को पूर्वी फ्रांस में मिज के काटने से संक्रमण हुआ था। मरीज के मस्तिष्क से जुड़ी जटिलताओं का संबंध शमोंडा वायरस से होने की आशंका भी जताई गई है। हालांकि, संक्रमण और मौत की पूरी जांच अभी जारी है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह एक अलग-थलग मामला है और फिलहाल इससे बड़े पैमाने पर इंसानी संक्रमण फैलने की आशंका कम है।

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निगरानी की चुनौती

शमोंडा वायरस को विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूओएएच) की सूचीबद्ध बीमारियों में शामिल नहीं किया गया है। यूरोपीय संघ के पशु स्वास्थ्य कानून के तहत भी इस पर बीमारी-विशेष की अनिवार्य निगरानी लागू नहीं है। ऐसे में इसके वास्तविक प्रसार से जुड़े आंकड़े अधूरे हो सकते हैं।

फिलहाल विशेषज्ञों के सामने सबसे बड़ी चुनौती वायरस पर नजर रखना और पशुओं में इसके फैलाव को समझना है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने साफ किया है कि इंसान की मौत का यह मामला असाधारण था। इसलिए घबराने के बजाय सतर्कता, वैज्ञानिक जांच और बेहतर निगरानी पर जोर देना जरूरी है।

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