हर साल 70 लाख लोग सर्पदंश के शिकार, अफ्रीका में सबसे ज्यादा कहर, भारत के लिए भी खतरे की घंटी

सांप के काटने से होने वाली मौतों और गंभीर बीमारियों का असली आंकड़ा सरकारी रिकॉर्ड से कहीं ज्यादा हो सकता है। अध्ययन ने दुनिया भर में इस छिपे हुए संकट की गंभीर तस्वीर सामने रखी है।
इलाज में देरी, अस्पतालों की दूरी और एंटीवेनम की कमी से ग्रामीण इलाकों में बढ़ता जानलेवा खतरा।
इलाज में देरी, अस्पतालों की दूरी और एंटीवेनम की कमी से ग्रामीण इलाकों में बढ़ता जानलेवा खतरा।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • दुनियाभर में हर साल 21 लाख से 70 लाख तक लोग सांप के जहर के शिकार हो सकते हैं।

  • सांप के जहर से हर साल 2.74 लाख से 5.13 लाख मौतों का अनुमान, सरकारी आंकड़े अधूरे।

  • उप-सहारा अफ्रीका में सांप के जहर का सबसे ज्यादा कहर, दुनिया के कुल मामलों का 45 प्रतिशत हिस्सा।

  • इलाज में देरी, अस्पतालों की दूरी और एंटीवेनम की कमी से ग्रामीण इलाकों में बढ़ता जानलेवा खतरा।

  • डब्ल्यूएचओ का लक्ष्य 2030 तक सांप के काटने से होने वाली मौतें और दिव्यांगता आधी करना है।

सांप के काटने की खबर सुनते ही अक्सर लोगों के मन में डर बैठ जाता है। लेकिन असली खतरा तब पैदा होता है, जब सांप का जहर शरीर में पहुंच जाता है। इसे मेडिकल भाषा में ‘स्नेक एनवेनमिंग’ कहा जाता है। समय पर इलाज न मिले, तो यह जानलेवा साबित हो सकता है।

दुनिया के कई गरीब और ग्रामीण इलाकों में सांप का काटना आज भी बड़ी स्वास्थ्य समस्या है। खेतों में काम करने वाले किसान, जंगलों के आसपास रहने वाले लोग और रात में बिना रोशनी के रास्तों पर चलने वाले ग्रामीण इसकी चपेट में ज्यादा आते हैं। परेशानी यह है कि इनमें से बड़ी संख्या में लोगों को समय पर अस्पताल तक पहुंचने का मौका ही नहीं मिलता।

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सरकारी आंकड़ों में दर्ज नहीं हो पातीं कई घटनाएं

शोधकर्ताओं के एक नए अध्ययन ने बताया है कि दुनिया में सांप के काटने और उससे होने वाली मौतों का वास्तविक आंकड़ा सरकारी रिकॉर्ड से काफी बड़ा हो सकता है। शोध में 79 देशों से मिले आंकड़ों और 31 मार्च 2025 तक प्रकाशित अध्ययनों की समीक्षा की गई। इसके बाद वैज्ञानिकों ने आधुनिक सांख्यिकीय मॉडल की मदद से उन इलाकों का भी अनुमान लगाया, जहां भरोसेमंद आंकड़े उपलब्ध नहीं थे।

अध्ययन के मुताबिक, जहरीले सांपों के खतरे वाले आधे से ज्यादा देशों में यह तक दर्ज नहीं किया जाता कि हर साल कितने लोगों को सांप काटता है या कितने लोगों के शरीर में जहर फैलता है। यह शोध प्लोस मेडिसिन में प्रकाशित किया गया है।

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इसकी वजह भी साफ है। कई ग्रामीण इलाकों में अस्पताल दूर हैं, आने-जाने के साधन नहीं हैं और इलाज का खर्च उठाना मुश्किल है। ऐसे में लोग अस्पताल जाने के बजाय पारंपरिक इलाज कराने पहुंच जाते हैं। नतीजा यह होता है कि उनकी बीमारी और मौत सरकारी स्वास्थ्य रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं हो पाती।

हर साल 21 लाख से 70 लाख तक मामले

शोधकर्ताओं का अनुमान है कि दुनिया भर में हर साल कम से कम 21 लाख लोगों के शरीर में सांप का जहर पहुंचता है। हालांकि वास्तविक संख्या 70 लाख तक हो सकती है। अध्ययन में सांप के जहर से होने वाली सालाना मौतों का अनुमान 2.74 लाख से 5.13 लाख के बीच लगाया गया है। यानी यह संकट पहले समझे जाने के मुकाबले कहीं अधिक गंभीर हो सकता है।

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वैज्ञानिकों ने जलवायु, सांपों की प्रजातियों, आबादी और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों जैसे कारकों का इस्तेमाल करके उन क्षेत्रों का अनुमान लगाया, जहां सांप के काटने का खतरा अधिक है। इससे उन जगहों की तस्वीर भी सामने आ सकी, जहां सरकारी आंकड़े लगभग न के बराबर हैं।

उप-सहारा अफ्रीका पर सबसे ज्यादा मार

अध्ययन के अनुसार, दुनिया में सांप के जहर से होने वाली घटनाओं और मौतों का करीब 45 प्रतिशत हिस्सा उप-सहारा अफ्रीका में केंद्रित है। इस क्षेत्र में नाइजीरिया, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और इथियोपिया जैसे देशों पर खास दबाव है।

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यहां जहरीले सांपों की कई प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें सॉ-स्केल्ड वाइपर, पफ एडर, अफ्रीकी कोबरा और मांबा शामिल हैं। खेतों में नंगे पैर या बिना सुरक्षा वाले जूते पहनकर काम करना भी खतरा बढ़ाता है।

मुसीबत तब और बढ़ जाती है, जब अस्पताल दूर हों और जहर का असर रोकने वाली एंटीवेनम दवा आसानी से उपलब्ध न हो। भारत और दक्षिण एशिया के दूसरे हिस्सों में भी ग्रामीण आबादी के लिए ऐसी चुनौतियां मौजूद हैं।

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जान बचने के बाद भी खत्म नहीं होती मुश्किल

सांप के काटने से बच जाना ही हमेशा पूरी तरह ठीक हो जाना नहीं होता। अध्ययन का अनुमान है कि हर साल 8 लाख से अधिक लोग लंबे समय तक रहने वाली शारीरिक अक्षमता का सामना कर सकते हैं। कुछ लोगों को हाथ-पैर गंवाने पड़ते हैं, जबकि दूसरे लोग स्थायी शारीरिक परेशानियों से जूझते हैं।

इसका असर पूरे परिवार पर पड़ता है। कमाने वाला व्यक्ति काम करने में असमर्थ हो जाए, तो घर की आमदनी घटती है और इलाज का खर्च बढ़ जाता है। इस तरह सांप का जहर स्वास्थ्य के साथ-साथ परिवार की आर्थिक स्थिति पर भी गहरी चोट करता है।

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सही जगह दवा, समय पर इलाज ही बचाएगा जान

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 2030 तक सांप के काटने से होने वाली मौतों और अक्षमता को आधा करने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को पाने के लिए केवल अस्पतालों में इलाज की व्यवस्था करना काफी नहीं होगा। यह जानना भी जरूरी है कि खतरा किन इलाकों में सबसे ज्यादा है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान करके वहां एंटीवेनम का पर्याप्त भंडार रखा जा सकता है। ग्रामीण स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण देने और मरीजों को तेजी से अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत करने से भी कई जानें बच सकती हैं।

सांप के काटने का संकट लंबे समय से आंकड़ों के अंधेरे में छिपा रहा है। अब जरूरत है कि इस खतरे को गंभीरता से लिया जाए, ताकि सही समय पर सही इलाज उन लोगों तक पहुंचे, जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।

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