

कांगो में इबोला संक्रमण तेजी से फैल रहा है, 598 मामले और 115 मौतें दर्ज, हालात बेहद चिंताजनक बने हुए
यूगांडा में भी इबोला के नए मामले सामने आए, दो मौतें दर्ज, स्वास्थ्य एजेंसियां सतर्कता बढ़ा रही हैं लगातार बढ़ रही
इटुरी प्रांत को प्रकोप का केंद्र माना जा रहा है, जहां स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी दबाव बना हुआ है लगातार
हिंसा और विस्थापन के कारण राहत कार्य और टीकाकरण अभियान गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं लगातार कार्य बाधित
अफ्रीका सीडीसी और संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है यदि नियंत्रण विफल
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला बीमारी का प्रकोप तेजी से बढ़ता जा रहा है। सेंटर्स फॉर डिजीज कण्ट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) अनुसार आठ जून, 2026 तक कुल 598 पुष्टि किए गए मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें 115 लोगों की मौत हो चुकी है। यह स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है क्योंकि हर सप्ताह नए मामले सामने आ रहे हैं।
यूगांडा में भी इबोला वायरस के मामलों को लेकर सीडीसी ने नई जानकारी जारी की है। यहां आठ जून तक के आंकड़ों के अनुसार, देश में अब तक 19 पुष्टि किए गए मामले सामने आए हैं। इसके साथ ही दो लोगों की मौत हो चुकी है। यह स्थिति दिखाती है कि इबोला संक्रमण पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और अभी भी नए मामलों का खतरा बना हुआ है।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्दी और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो यह बीमारी और भी बड़े क्षेत्र में फैल सकती है। यह प्रकोप इबोला वायरस के बुंडिबुग्यो स्ट्रेन के कारण फैला है। इसे 15 मई को आधिकारिक रूप से घोषित किया गया था।
नए मामले और बढ़ती चिंता
ताजा रिपोर्ट के अनुसार, केवल एक दिन में 48 नए मामले दर्ज किए गए, जिनमें 14 लोगों की मौत भी शामिल है। यह संकेत देता है कि बीमारी का फैलाव तेज हो रहा है। वहीं राहत की बात यह है कि तीन और मरीज ठीक हो गए हैं, जिससे अब तक कुल 22 मरीजों की रिकवरी हो चुकी है।
फिर भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है क्योंकि संक्रमण “कम्युनिटी ट्रांसमिशन” यानी समुदाय के भीतर फैल रहा है। इसका मतलब है कि बीमारी केवल अस्पतालों या ज्ञात मरीजों तक सीमित नहीं है, बल्कि सामान्य लोगों के बीच भी फैल रही है।
अस्पतालों में स्थिति और इलाज की चुनौती
रिपोर्ट के मुताबिक, इस समय कुल 297 मरीज अलग-अलग आइसोलेशन केंद्रों या अस्पतालों में रखे गए हैं। इनमें 113 पुष्टि किए गए मरीज और 184 संदिग्ध मामले शामिल हैं। स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी दबाव है क्योंकि संसाधन सीमित हैं और मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
अफ्रीका सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (अफ्रीका सीडीसी) ने भी चेतावनी दी है कि कई स्वास्थ्य केंद्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी है। अस्पतालों में साफ पानी, मेडिकल कचरे को नष्ट करने के लिए इंसीनेरेटर, सुरक्षा उपकरण (पीपीई) और संक्रमण रोकने वाले सामान की कमी है। इससे इलाज और संक्रमण नियंत्रण दोनों कठिन हो रहे हैं।
हिंसा और सुरक्षा की समस्या
इबोला के इस प्रकोप को रोकने में सबसे बड़ी बाधा पूर्वी कांगो में चल रही हिंसा और असुरक्षा है। संयुक्त राष्ट्र की मानवीय एजेंसी ओसीएचए के अनुसार, कई क्षेत्रों में सशस्त्र समूह सक्रिय हैं, जिससे स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को वहां पहुंचने में कठिनाई हो रही है।
विशेष रूप से इटुरी प्रांत में स्थिति गंभीर है, जो इस प्रकोप का केंद्र माना जा रहा है। यहां कई स्वास्थ्य क्षेत्रों तक पहुंच सीमित हो गई है, जिससे टीकाकरण और इलाज अभियान प्रभावित हो रहे हैं।
उत्तर किवु और दक्षिण किवु में हालात
नॉर्थ किवु प्रांत में हाल ही में हिंसा की कई घटनाएं हुई हैं। 30 मई से छह जून के बीच हुए हमलों में कम से कम 40 नागरिकों की मौत हुई है। इन घटनाओं ने स्थानीय लोगों को और अधिक असुरक्षित बना दिया है और राहत कार्यों में बाधा डाली है।
वहीं साउथ किवु प्रांत में भी हालात बेहतर नहीं हैं। हाल की झड़पों के कारण लगभग 15,000 लोग विस्थापित हो गए हैं और उन्होंने मिति-मुर्हेसा स्वास्थ्य क्षेत्र में शरण ली है। चिंता की बात यह है कि इस क्षेत्र में ही इबोला के पुष्टि किए गए मामले मौजूद हैं, जिससे संक्रमण के और फैलने का खतरा बढ़ गया है।
अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की चेतावनी
अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों ने इस स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को तुरंत मजबूत नहीं किया गया, तो यह प्रकोप तेजी से अन्य क्षेत्रों में फैल सकता है। अफ्रीका सीडीसी ने कहा है कि मौजूदा हालात में स्वास्थ्य व्यवस्था कमजोर है और संसाधनों की भारी कमी है।
संयुक्त राष्ट्र ने भी चेतावनी दी है कि हिंसा और विस्थापन के कारण राहत कार्य प्रभावित हो रहे हैं, जिससे बीमारी पर नियंत्रण पाना और कठिन हो गया है।
कुल मिलाकर, कांगो में इबोला का यह प्रकोप केवल एक स्वास्थ्य संकट नहीं बल्कि एक मानवीय आपात स्थिति बनता जा रहा है। बढ़ते मामले, सीमित चिकित्सा सुविधाएं और लगातार जारी हिंसा मिलकर स्थिति को और गंभीर बना रहे हैं। यदि तुरंत प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो यह बीमारी और अधिक लोगों के जीवन को खतरे में डाल सकती है।