

कांगो में इबोला संक्रमण दो नए स्वास्थ्य क्षेत्रों तक पहुंचा, जिससे प्रभावित क्षेत्रों की संख्या बढ़कर 63 हो गई है।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, 23 सितंबर तक कांगो में 7,890 पुष्ट मामले और 3,799 मौतें दर्ज की गई हैं।
संघर्ष और विस्थापन के कारण स्वास्थ्यकर्मियों को प्रभावित इलाकों तक पहुंचने और संक्रमित लोगों के संपर्कों का पता लगाने में कठिनाई।
बुंडिबुग्यो वायरस के लिए स्वीकृत वैक्सीन और उपचार नहीं होने से इबोला नियंत्रण अभियान के सामने बड़ी चुनौती बनी है।
डब्ल्यूएचओ ने भविष्य की महामारियों से निपटने के लिए देशों से स्वास्थ्य व्यवस्था और महामारी की तैयारी मजबूत करने को कहा।
अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआर कांगो) में इबोला का प्रकोप लगातार फैल रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, बुंडिबुग्यो वायरस से फैल रही बीमारी अब दो और स्वास्थ्य क्षेत्रों तक पहुंच गई है। इनमें सुद उबांगी प्रांत का बुलु और हाउत-उएले प्रांत का दुंगु शामिल है। दुंगु क्षेत्र दक्षिण सूडान की सीमा के पास है। नए इलाकों में संक्रमण मिलने के बाद देश में प्रभावित स्वास्थ्य क्षेत्रों की संख्या बढ़कर 63 हो गई है। ये क्षेत्र सात प्रांतों में फैले हुए हैं।
हजारों मामले, बड़ी संख्या में मौतें
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, 23 सितंबर 2026 तक डीआर कांगो में बुंडिबुग्यो वायरस से इबोला के 7,890 पुष्ट मामले सामने आए हैं। इनमें 3,799 लोगों की मौत हो चुकी है। इस बीमारी से 1,966 मरीज ठीक भी हुए हैं। हालांकि अलग-अलग इलाकों में संक्रमण की स्थिति एक जैसी नहीं है। कुछ क्षेत्रों में मामले कम हो रहे हैं, जबकि कुछ जगहों पर संक्रमण अभी भी तेजी से फैल रहा है।
इटुरी प्रांत इस बीमारी से सबसे ज्यादा प्रभावित है। यहां अब तक 6,032 पुष्ट मामले सामने आए हैं। इसके बाद नॉर्थ किवु में 1,480 मामले दर्ज किए गए हैं। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, इटुरी में संक्रमण का स्तर अगस्त के मध्य की तुलना में धीरे-धीरे कम हुआ है, लेकिन वहां अभी भी बीमारी का खतरा बना हुआ है।
संघर्ष से स्वास्थ्यकर्मियों की परेशानी
प्रेस विज्ञप्ति में डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस के हवाले से कहा गया है कि कांगो में जारी संघर्ष और लोगों के एक जगह से दूसरी जगह जाने के कारण इबोला पर काबू पाना मुश्किल हो रहा है। कई प्रभावित इलाकों तक स्वास्थ्यकर्मियों की पहुंच आसान नहीं है।
इबोला के खिलाफ लड़ाई में संक्रमित लोगों की पहचान के साथ-साथ उन लोगों का पता लगाना भी जरूरी होता है, जो किसी मरीज के संपर्क में आए हों। इसे कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग कहा जाता है। लेकिन हिंसा, असुरक्षा और लोगों के विस्थापन के कारण कुछ लोगों तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है। इससे संभावित संक्रमित लोगों की निगरानी प्रभावित हो सकती है।
विस्थापन और भीड़ से बढ़ता खतरा
संघर्ष के कारण बड़ी संख्या में लोग अपना घर छोड़कर दूसरी जगहों पर जा रहे हैं। कई बार विस्थापित लोगों को भीड़भाड़ वाली जगहों पर रहना पड़ता है। ऐसी परिस्थितियों में बीमारी के फैलने का खतरा बढ़ सकता है।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, प्रभावित इलाकों में निगरानी, मरीजों की पहचान, संपर्क में आए लोगों की निगरानी और समय पर इलाज पहुंचाने में सुरक्षा संबंधी समस्याएं बाधा बन रही हैं। इसके बावजूद स्वास्थ्यकर्मी संक्रमण को रोकने के लिए लगातार काम कर रहे हैं।
इलाज और वैक्सीन की चुनौती
बुंडिबुग्यो वायरस के मामले में एक बड़ी चुनौती प्रभावी वैक्सीन और इलाज की उपलब्धता है। डब्ल्यूएचओ ने बताया है कि बुंडिबुग्यो वायरस बीमारी से बचाव के लिए उपलब्ध इबोला वैक्सीन की प्रभावशीलता अभी पूरी तरह साबित नहीं हुई है। इसलिए उसका इस्तेमाल फिलहाल शोध प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है। साथ ही बीमारी के इलाज के लिए क्लिनिकल ट्रायल भी चल रहे हैं।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, स्वास्थ्यकर्मियों और अग्रिम पंक्ति में काम करने वाले लोगों का टीकाकरण शुरू किया जा चुका है। इलाज और वैक्सीन से जुड़े परीक्षणों को भी आगे बढ़ाया जा रहा है।
डब्ल्यूएचओ ने महामारी की तैयारी पर दिया जोर
टेड्रोस ने कहा कि मौजूदा इबोला प्रकोप को वैश्विक महामारी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने भविष्य में किसी ऐसे सांस से फैलने वाले वायरस की संभावना को लेकर देशों को तैयार रहने की जरूरत बताई, जो महामारी का रूप ले सकता है।
उन्होंने देशों से महामारी की निगरानी, स्वास्थ्य व्यवस्था और आपातकालीन तैयारी को मजबूत करने की अपील की। उनका कहना है कि किसी बड़े स्वास्थ्य संकट के आने से पहले तैयारी करना जरूरी है।
पैंडेमिक एग्रीमेंट पर भी चर्चा
डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक ने पैंडेमिक एग्रीमेंट को लेकर फैली गलत सूचनाओं पर भी चिंता जताई। विश्व स्वास्थ्य सभा ने मई 2025 में इस समझौते को अपनाया था। इसका उद्देश्य भविष्य में महामारी की रोकथाम, तैयारी और उससे निपटने के लिए देशों के बीच सहयोग को मजबूत करना है।
टेड्रोस ने उन दावों को गलत बताया जिनमें कहा जाता है कि इस समझौते के जरिए डब्ल्यूएचओ देशों की संप्रभुता अपने हाथ में ले लेगा। उनके अनुसार, समझौते का उद्देश्य देशों की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना है।
कांगो में इबोला का प्रकोप फिलहाल गंभीर बना हुआ है। मामलों की संख्या में कुछ जगहों पर कमी के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन नए इलाकों में संक्रमण पहुंचने से चुनौती बनी हुई है। डब्ल्यूएचओ और स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी जरूरत प्रभावित समुदायों तक पहुंच बढ़ाने, संक्रमित लोगों की जल्द पहचान करने और बीमारी के प्रसार को रोकने की है।