

मामलों का आंकड़ा: कांगो में इबोला के कुल 7,614 मरीज मिले, अब तक 3,676 की मौत दर्ज।
गंभीर मृत्यु दर: इबोला महामारी से पीड़ित मरीजों की मृत्यु दर 48.3 प्रतिशत के उच्च स्तर पर पहुंची।
इतूरी में कहर: कुल संक्रमण के 77.2% मामले और नए मरीजों के 63% केवल इतूरी प्रांत से आए।
नया हॉटस्पॉट: दक्षिण सूडान सीमा पर स्थित डूंगू स्वास्थ्य क्षेत्र में इबोला का पहला नया मामला दर्ज।
संक्रमण का दायरा: देश के सात प्रांतों के 167 में से 63 स्वास्थ्य क्षेत्रों में फैला इबोला संक्रमण।
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में इबोला वायरस बीमारी का प्रकोप थमता नजर नहीं आ रहा है। नए आंकड़े बता रहे हैं कि महामारी लगातार अपने पैर पसार रही है और देश के नए हिस्सों को अपनी चपेट में ले रही है। बीते 18 सितंबर, 2026 को एक ही दिन में इबोला के 73 नए पुष्ट मामले दर्ज किए गए हैं। इन नए मामलों के सामने आने के बाद देश की स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है।
संक्रमण के फैलाव का नया नक्शा
18 सितंबर को आए कुल 73 मामलों में से सबसे ज्यादा 46 मामले इतूरी प्रांत से सामने आए हैं। इसके अलावा उत्तर किवू प्रांत में 18, हाउत-उएले में छह और त्शोपो प्रांत में तीन नए मरीजों की पुष्टि हुई है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि संक्रमण अब नए इलाकों तक पहुंच गया है।
हाउत-उएले प्रांत का डूंगू स्वास्थ्य क्षेत्र पहली बार इस बीमारी से प्रभावित हुआ है। डूंगू इलाका दक्षिण सूडान की सीमा से बिल्कुल सटा हुआ है, जिसकी वजह से अब सीमा पार संक्रमण फैलने का खतरा काफी बढ़ गया है। इसे देखते हुए अंतरराष्ट्रीय सीमाओं और जांच चौकियों पर निगरानी काफी सख्त कर दी गई है।
एक दिन में 37 लोगों की मौत
इबोला वायरस के कारण मौतों का आंकड़ा भी तेजी से बढ़ रहा है। 18 सितंबर के दिन कुल 37 लोगों ने अपनी जान गंवाई। इनमें से 25 लोगों की मौत अस्पतालों से बाहर यानी समुदायों के बीच हुई। वहीं इबोला उपचार केंद्रों के भीतर बारह मरीजों ने दम तोड़ा, जिनमें से 10 मौतें इतूरी और दो उत्तर किवू में हुईं।
हालांकि इस निराशाजनक स्थिति के बीच एक राहत भरी खबर यह भी रही कि उसी दिन इबोला उपचार केंद्रों से 41 मरीजों को छुट्टी दी गई। दो लगातार जांच रिपोर्ट के नेगिटिव आने के बाद इन्हें पूरी तरह स्वस्थ घोषित कर दिया गया।
महामारी के अब तक के आंकड़े
कांगो में जब से इस बीमारी की शुरुआत हुई है, तब से लेकर अब तक कुल 7614 पुष्ट मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इस महामारी ने अब तक 3676 लोगों की जान ले ली है। आंकड़ों के मुताबिक इस बीमारी से पीड़ित मरीजों की मृत्यु दर लगभग 48.3 प्रतिशत है।
इतूरी प्रांत इस पूरी महामारी का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है। अब तक सामने आए कुल मामलों में से लगभग 77 प्रतिशत मामले अकेले इसी प्रांत से जुड़े हैं। इतना ही नहीं, हाल ही में दर्ज किए गए नए मामलों में भी 63 प्रतिशत हिस्सेदारी इसी क्षेत्र की है। वर्तमान में कांगो के सात प्रांतों के 167 स्वास्थ्य क्षेत्रों में से 63 क्षेत्र इस जानलेवा बीमारी की चपेट में आ चुके हैं।
बचाव और नियंत्रण के प्रयास
सरकार और स्वास्थ्य संगठन इस महामारी को रोकने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। यात्रा मार्गों और जांच केंद्रों पर लगभग 99 प्रतिशत यात्रियों की कड़ाई से जांच की जा रही है। डूंगू जैसे नए प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी तंत्र को तुरंत मजबूत किया गया है। लोगों को जागरूक करने के लिए बड़े पैमाने पर सामुदायिक अभियान चलाए जा रहे हैं, जिसके तहत एक ही दिन में एक लाख दस हजार से अधिक लोगों तक बचाव के संदेश पहुंचाए गए हैं।
स्वास्थ्य व्यवस्था की गहरी चुनौतियां
तमाम प्रयासों के बावजूद कांगो की स्वास्थ्य प्रणाली बुनियादी समस्याओं से जूझ रही है। देश के पूर्वी हिस्सों में लंबे समय से जारी हिंसा और संघर्ष ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है। कई अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को नुकसान पहुंचाया गया है या उन्हें बंद करना पड़ा है। असुरक्षा के कारण डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी मरीजों तक समय पर नहीं पहुंच पा रहे हैं और दवाओं की आपूर्ति भी बाधित हो रही है। लाखों विस्थापित लोग राहत शिविरों में दयनीय स्थिति में रहने को मजबूर हैं, जहां पानी और सफाई की व्यवस्था बेहद खराब है।
भविष्य की राह और जरूरतें
कांगो की सरकार और अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों ने टीकाकरण और नए इलाज केंद्र खोलने में तेजी दिखाई है, लेकिन जमीनी स्तर पर डॉक्टरों की कमी, धन का अभाव और खराब सड़कें इस लड़ाई को बहुत कठिन बना रही हैं। जब तक देश की बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत नहीं किया जाएगा और संघर्ष प्रभावित इलाकों में शांति नहीं होगी, तब तक इबोला जैसी खतरनाक महामारियों पर पूरी तरह काबू पाना बेहद मुश्किल रहेगा।