कांगो में इबोला का प्रकोप जारी, अब तक 1,502 संक्रमित तथा 473 लोगों ने गंवाई जान

कांगो में इबोला के 1,502 मामले और 473 मौतें दर्ज, युगांडा में 20 संक्रमित मिले, जबकि नए उपचार के लिए क्लीनिकल परीक्षण शुरू किया गया।
कांगो में इबोला के 1,502 पुष्ट मामले सामने आए हैं, जबकि 473 लोगों की मौत हो चुकी है।
कांगो में इबोला के 1,502 पुष्ट मामले सामने आए हैं, जबकि 473 लोगों की मौत हो चुकी है।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • कांगो में इबोला के 1,502 पुष्ट मामले सामने आए हैं, जबकि 473 लोगों की मौत हो चुकी है।

  • नॉर्थ किवू और इतुरी प्रांतों में संक्रमण तेजी से फैल रहा है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ गया है।

  • युगांडा में 20 इबोला मामलों की पुष्टि हुई है, लेकिन अभी समुदाय में व्यापक संक्रमण के संकेत नहीं मिले हैं।

  • डब्ल्यूएचओ के अनुसार, असुरक्षा और सशस्त्र संघर्ष के कारण मरीजों की पहचान और संपर्क खोजने का काम प्रभावित हो रहा है।

  • बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के इलाज के लिए कांगो में दो संभावित दवाओं का क्लीनिकल परीक्षण शुरू किया गया है।

कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) में इबोला वायरस का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में अब तक इबोला के 1,502 पुष्ट मामले सामने आ चुके हैं। इनमें 473 लोगों की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, 628 मरीज अस्पतालों के आइसोलेशन वार्ड या उपचार केंद्रों में भर्ती हैं, जबकि 229 मरीज इलाज के बाद पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। यह प्रकोप मुख्य रूप से देश के पूर्वी प्रांत नॉर्थ किवू और इतुरी में फैला हुआ है।

सुरक्षा चुनौतियों से प्रभावित राहत कार्य

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में हिंसा, सशस्त्र संघर्ष और असुरक्षा के कारण बीमारी पर नियंत्रण पाने में कठिनाई हो रही है। कई इलाकों में स्वास्थ्य कर्मियों का पहुंचना आसान नहीं है। इसके कारण नए मरीजों की पहचान करने और उनके संपर्क में आए लोगों का पता लगाने का काम प्रभावित हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर मरीजों की पहचान और इलाज से संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियां इस काम को चुनौतीपूर्ण बना रही हैं।

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युगांडा में भी पहुंचे मामले

इबोला का असर पड़ोसी देश युगांडा में भी देखा गया है। वहां अब तक 20 पुष्ट मामले सामने आए हैं, जिनमें अधिकांश संक्रमण कांगो से जुड़े हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल युगांडा में समुदाय के भीतर बड़े स्तर पर संक्रमण फैलने के प्रमाण नहीं मिले हैं। देश में 21 जून के बाद कोई नया मामला सामने नहीं आया है। इसके बावजूद युगांडा और कांगो ने सीमा क्षेत्रों में निगरानी और जांच को और मजबूत कर दिया है ताकि संक्रमण को आगे फैलने से रोका जा सके।

फ्रांस में भी मिला एक संक्रमित

इस बीच, फ्रांस में भी इबोला का एक मामला सामने आया है। यह संक्रमण एक डॉक्टर में पाया गया, जो कांगो से लौटे थे। इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निगरानी और सतर्कता बढ़ा दी गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों की जांच और निगरानी बेहद जरूरी है ताकि बीमारी दूसरे देशों में न फैले।

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मई में शुरू हुआ था वर्तमान प्रकोप

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, कांगो में मौजूदा इबोला प्रकोप की आधिकारिक पहचान मई 2026 में हुई थी। हालांकि माना जा रहा है कि इससे पहले भी कुछ समय तक वायरस का संक्रमण बिना पहचान के फैलता रहा। एक जुलाई तक डब्ल्यूएचओ ने 1,460 पुष्ट मामलों और 452 मौतों की पुष्टि की थी। इसके बाद मामलों और मौतों की संख्या में और वृद्धि दर्ज की गई। इससे स्पष्ट है कि बीमारी का प्रसार अभी भी जारी है और स्थिति पर लगातार नजर रखने की आवश्यकता है।

नए उपचार की जांच शुरू

इबोला से लड़ाई में एक सकारात्मक कदम भी सामने आया है। कांगो में वायरस के बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के इलाज के लिए दो संभावित दवाओं का क्लीनिकल परीक्षण शुरू किया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडहानोम घेब्रेयसस ने बताया कि इस परीक्षण में पहले मरीज को शामिल कर लिया गया है। इस अध्ययन का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कौन-सी दवा मरीजों के इलाज में अधिक प्रभावी और सुरक्षित है। यदि परीक्षण सफल रहता है तो भविष्य में इबोला के इलाज के बेहतर विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं।

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रोकथाम के लिए जारी प्रयास

कांगो, युगांडा, विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य सहयोगी संस्थाएं मिलकर इस प्रकोप को नियंत्रित करने के प्रयास कर रही हैं। संक्रमित मरीजों का इलाज, उनके संपर्क में आए लोगों की पहचान, सीमा क्षेत्रों में निगरानी और लोगों को जागरूक करने जैसे कदम लगातार उठाए जा रहे हैं।

स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि जब तक संक्रमण पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो जाता, तब तक सतर्कता बनाए रखना और सभी आवश्यक स्वास्थ्य उपायों का पालन करना बेहद जरूरी है।

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