

महाराष्ट्र एफडीए ने पारा युक्त नौ कॉस्मेटिक उत्पादों पर लगाई रोक, टॉक्सिक्स लिंक ने देशभर में प्रतिबंध की मांग उठाई।
जांच में स्किन लाइटनिंग क्रीमों में मिला खतरनाक पारा और सीसा, उपभोक्ताओं की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता।
पारा युक्त सौंदर्य उत्पादों से स्वास्थ्य खतरे का खुलासा, सरकार से सख्त निगरानी और कार्रवाई की अपील।
गोरा करने वाली क्रीमों पर बढ़ी सख्ती, महाराष्ट्र की कार्रवाई के बाद देशव्यापी प्रतिबंध की मांग तेज हुई।
टॉक्सिक्स लिंक ने कहा, जहरीले कॉस्मेटिक उत्पादों पर रोक जरूरी, स्वास्थ्य और पर्यावरण बचाने के लिए उठाए जाएं कदम।
त्वचा को गोरा करने का दावा करने वाली कई क्रीमों और कॉस्मेटिक उत्पादों में जहरीले तत्व पाए जाने के बाद महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने सख्त कार्रवाई की है। विभाग ने नौ उत्पादों को मानक गुणवत्ता के अनुरूप नहीं पाया और उनकी बिक्री, भंडारण और वितरण पर तुरंत रोक लगा दी है। इन उत्पादों को बाजार से वापस लेने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
पर्यावरण और स्वास्थ्य सुरक्षा संगठन टॉक्सिक्स लिंक ने महाराष्ट्र एफडीए के इस कदम का स्वागत करते हुए देशभर में पारा (मरकरी) युक्त त्वचा गोरा करने वाले उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि जहरीले कॉस्मेटिक उत्पादों का खतरा केवल किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है और पूरे देश में सख्त निगरानी की जरूरत है।
आठ क्रीम और एक साबुन में मिला पारा
महाराष्ट्र एफडीए ने 10 जुलाई 2026 को जारी सूचना में बताया कि प्रयोगशाला जांच के दौरान नौ स्किन लाइटनिंग उत्पादों में पारा तय सीमा से अधिक पाया गया। इनमें आठ क्रीम और एक साबुन शामिल हैं। एक उत्पाद में सीसा (लेड) की मात्रा भी निर्धारित स्तर से अधिक मिली।
जिन उत्पादों पर कार्रवाई की गई है, उनमें स्किनिया कोरियन गोरी ब्यूटी क्रीम, फेस फ्रेश गोल्ड प्लस ब्यूटी क्रीम और ब्यूटी सीरम, डैजलर एटर्ना डे केयर लाइट क्रीम, पार्ले ब्यूटी क्रीम, मलिका प्रीमियम ब्यूटी क्रीम, गोरी ब्यूटी क्रीम विद लाइकोपीन, गोरी व्हाइटनिंग सोप, पार्ले गोल्डी एडवांस्ड ब्यूटी क्रीम पर्ल शाइन और हानिया ब्यूटी क्रीम शामिल हैं।
उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर बड़ा खतरा
रिपोर्ट में टॉक्सिक्स लिंक के हवाले से कहा गया कि पारा एक बेहद खतरनाक धातु है, जो लंबे समय तक इस्तेमाल किए जाने पर शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। पारा युक्त क्रीम लगाने से यह त्वचा के माध्यम से शरीर में पहुंच सकता है और दिमाग, गुर्दे तथा तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों और शिशुओं पर पारे का असर अधिक गंभीर हो सकता है। इससे बच्चों के मानसिक विकास पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ने का खतरा रहता है। इन उत्पादों से निकलने वाला पारा पानी और पर्यावरण में पहुंचकर लंबे समय तक प्रदूषण का कारण बन सकता है।
केवल महाराष्ट्र नहीं, पूरे देश में कार्रवाई जरूरी
टॉक्सिक्स लिंक ने कहा कि महाराष्ट्र एफडीए की कार्रवाई यह दिखाती है कि मजबूत निगरानी से लोगों को खतरनाक उत्पादों से बचाया जा सकता है। हालांकि, उन्होंने कहा कि सिर्फ एक राज्य में कार्रवाई पर्याप्त नहीं है।
रिपोर्ट में पारा युक्त त्वचा गोरा करने वाली क्रीमें अभी भी देश के कई हिस्सों में दुकानों, अनौपचारिक बाजारों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। इसलिए पूरे देश में ऐसे उत्पादों पर रोक लगाने और नियमों का सख्ती से पालन कराने की जरूरत है।
रंग गोरा करने की सोच का फायदा उठा रहे उत्पाद
टॉक्सिक्स लिंक ने यह भी चिंता जताई कि कई स्किन लाइटनिंग उत्पाद समाज में मौजूद गोरे रंग की पसंद और रंगभेद की सोच का फायदा उठाकर बेचे जाते हैं। कई उपभोक्ताओं को यह जानकारी नहीं होती कि इन उत्पादों में स्वास्थ्य के लिए खतरनाक रसायन मौजूद हो सकते हैं।
संगठन ने कहा कि लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ कॉस्मेटिक बाजार की नियमित जांच भी जरूरी है, ताकि खतरनाक उत्पादों को बाजार तक पहुंचने से रोका जा सके।
केंद्र सरकार से सख्त नियम बनाने की अपील
भारत पारे से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए बने मिनामाटा कन्वेंशन का सदस्य है। टॉक्सिक्स लिंक का कहना है कि पारा युक्त कॉस्मेटिक उत्पादों की बिक्री इस समझौते के उद्देश्यों के विपरीत है।
संगठन ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) और भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) से मांग की है कि पारा युक्त त्वचा गोरा करने वाले उत्पादों के निर्माण, आयात, बिक्री और वितरण पर देशभर में रोक लगाई जाए। इसके साथ ही कॉस्मेटिक उत्पादों की नियमित जांच, ऑनलाइन बाजारों की निगरानी, सीमा शुल्क स्तर पर सख्ती और नियम तोड़ने वाली कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग भी की गई है।