

400 स्वास्थ्यकर्मियों पर हुए अध्ययन में 84.5 प्रतिशत मास्क पर बैक्टीरियल दूषण पाया गया, जिससे स्वच्छता पर सवाल उठे।
जांच में 1.5 प्रतिशत मास्क पर मरसा मिला, जो अस्पतालों में गंभीर संक्रमण का कारण बन सकता है।
वार्डों में काम करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों के मास्क पर बैक्टीरिया का स्तर आईसीयू कर्मचारियों की तुलना में अधिक पाया गया।
खराब हाथों की स्वच्छता और सर्जिकल मास्क का इस्तेमाल अधिक बैक्टीरियल लोड से जुड़ा पाया गया, अध्ययन में सामने आया।
शोधकर्ताओं ने मास्क सही तरीके से संभालने, समय पर बदलने और संक्रमण नियंत्रण के उपायों पर अधिक ध्यान देने की सलाह दी।
अस्पतालों में मरीजों की देखभाल करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों के मास्क पर बड़ी संख्या में बैक्टीरिया पाए गए हैं। डिस्कवर पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित एक नए अध्ययन में सामने आया है कि स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा पहने गए 84.5 प्रतिशत मास्क बैक्टीरिया से दूषित थे। इनमें कुछ मास्क पर मेथिसिलिन-रेसिस्टेंट स्टैफिलोकोकस ऑरियस यानी मरसा भी पाया गया।
यह अध्ययन एक भारतीय महानगर के सेकेंडरी और टर्शियरी अस्पतालों में काम करने वाले 400 स्वास्थ्यकर्मियों पर किया गया। शोधकर्ताओं ने स्वास्थ्यकर्मियों से उनकी उम्र, काम की प्रकृति, स्वच्छता की आदतों और मास्क के इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी ली। इसके साथ ही उनके मास्क और अस्पताल के आसपास के वातावरण से नमूने भी लिए गए।
मास्क पर मिले कई तरह के बैक्टीरिया
शोधकर्ताओं ने सामान्य बैक्टीरियल कल्चर और आधुनिक विटेक-2 प्रणाली की मदद से नमूनों में मौजूद सूक्ष्मजीवों की पहचान की। जांच में पाया गया कि 400 में से बड़ी संख्या में मास्क की सतह पर बैक्टीरिया मौजूद थे।
कुल 84.5 प्रतिशत मास्क पर बैक्टीरियल संक्रमण या दूषण पाया गया। वहीं 1.5 प्रतिशत मास्क पर मरसा मिला। इसके अलावा 0.25 प्रतिशत मास्क पर मेथिसिलिन-सेंसिटिव स्टैफिलोकोकस ऑरियस यानी एमएसएसए पाया गया।
मरसा एक ऐसा बैक्टीरिया है जो कई सामान्य एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधी होता है। अस्पतालों में इसकी मौजूदगी को इसलिए गंभीर माना जाता है, क्योंकि यह कमजोर और बीमार मरीजों में संक्रमण का कारण बन सकता है।
मास्क के अंदरूनी हिस्से पर मिला मरसा
अध्ययन का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह था कि मरसा केवल मास्क की अंदरूनी सतह पर पाया गया। शोधकर्ताओं का मानना है कि इसका संबंध अस्पताल के वातावरण से होने के बजाय स्वास्थ्यकर्मी की नाक में मौजूद बैक्टीरिया से हो सकता है।
अस्पताल के वातावरण से लिए गए नमूनों में भी कई ऐसे ही बैक्टीरिया पाए गए, जो मास्क पर मिले थे। इससे यह संकेत मिलता है कि स्वास्थ्यकर्मी जिस वातावरण में काम करते हैं, वहां मौजूद सूक्ष्मजीव भी मास्क पर जमा हो सकते हैं।
हालांकि, शोधकर्ताओं ने यह साबित नहीं किया कि मास्क पर पाए गए बैक्टीरिया सीधे किसी मरीज या स्वास्थ्यकर्मी में संक्रमण का कारण बने।
वार्डों में ज्यादा, आईसीयू में कम बैक्टीरिया
अध्ययन में मास्क पर मौजूद बैक्टीरिया की मात्रा अलग-अलग अस्पताल क्षेत्रों में अलग पाई गई। सबसे ज्यादा बैक्टीरियल लोड वार्डों में काम करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों के मास्क पर मिला। इसके मुकाबले आईसीयू में काम करने वाले कर्मचारियों के मास्क पर बैक्टीरिया की मात्रा कम थी।
शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि हाथों की सफाई से जुड़ी आदतों का मास्क पर बैक्टीरिया की मात्रा से संबंध था। जिन स्वास्थ्यकर्मियों में हाथों की स्वच्छता बेहतर नहीं थी, उनके मास्क पर बैक्टीरिया की संख्या अधिक पाई गई।
मास्क के प्रकार और इस्तेमाल का भी असर
अध्ययन में मास्क के प्रकार को भी एक महत्वपूर्ण कारक पाया गया। सर्जिकल मास्क का इस्तेमाल अधिक बैक्टीरियल लोड से जुड़ा था। वहीं अस्पताल की ओर से दिए गए मास्क का इस्तेमाल कम बैक्टीरियल दूषण से जुड़ा पाया गया।
शोधकर्ताओं ने उम्र, लिंग, मरीजों के साथ संपर्क, काम के घंटे और मास्क कितने समय तक पहना गया जैसे कई अन्य कारकों का भी अध्ययन किया। सभी कारकों को एक साथ देखने के बाद अस्पताल का क्लिनिकल सेटिंग बैक्टीरियल दूषण का महत्वपूर्ण कारण बना रहा।
संक्रमण का खतरा साबित नहीं हुआ
विशेषज्ञों के लिए यह अध्ययन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अस्पतालों में मास्क लंबे समय तक इस्तेमाल किए जाते हैं और उनके ऊपर पसीना, सांस से निकलने वाली नमी और आसपास के सूक्ष्मजीव जमा हो सकते हैं। ऐसे में मास्क को सही तरीके से संभालना और समय पर बदलना संक्रमण नियंत्रण का एक अहम हिस्सा हो सकता है।
हालांकि, अध्ययन से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि दूषित मास्क से अस्पताल में संक्रमण फैलता है। अध्ययन एक निश्चित समय पर किया गया था और इसमें कारण और परिणाम के बीच सीधा संबंध स्थापित नहीं किया गया।
शोधकर्ताओं ने अस्पतालों में मास्क के इस्तेमाल और उन्हें संभालने के लिए सख्त नियमों की जरूरत बताई है। उन्होंने नियमित रूप से मास्क बदलने, हाथों की स्वच्छता बनाए रखने और मास्क को सही तरीके से संभालने पर जोर दिया है। साथ ही, यह पता लगाने के लिए और शोध की जरूरत बताई गई है कि दूषित मास्क वास्तव में मरीजों या स्वास्थ्यकर्मियों में संक्रमण फैलाने में कितनी भूमिका निभाते हैं।