क्या मध्य प्रदेश में विकास की भेंट चढ़ जाएंगे 15 लाख पेड़, एनजीटी ने पर्यावरण मंत्रालय से मांगा जवाब

दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर के मुताबिक सिंगरौली ब्लॉक में ही 1,397.54 हेक्टेयर वन भूमि में अब तक 35,000 पेड़ काटे जा चुके हैं। इसमें से 1,335.35 हेक्टेयर क्षेत्र घने जंगल का था। इसके अलावा अब यहां आगे 5.7 लाख पेड़ों को काटा जाना प्रस्तावित है
प्रतीकात्मक तस्वीर: आईस्टॉक
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सारांश
  • मध्य प्रदेश में विकास परियोजनाओं के लिए 15 लाख पेड़ों की कटाई के प्रस्ताव पर एनजीटी ने स्वतः संज्ञान लेते हुए केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा है।

  • यह मामला 8 जनवरी 2026 को हिंदी अखबार दैनिक भास्कर में प्रकाशित एक रिपोर्ट के आधार पर सामने आया है।

  • रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश में 50 से 100 साल पुराने 15 लाख से अधिक पेड़ों को सड़कों, रेलवे, कोयला ब्लॉकों और निर्माण परियोजनाओं के लिए काटने का प्रस्ताव है। इनमें भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और सिंगरौली जैसे इलाके प्रमुख हैं।

  • खबर में यह भी बताया गया है कि सिंगरौली ब्लॉक में ही 1,397.54 हेक्टेयर वन भूमि में अब तक 35,000 पेड़ काटे जा चुके हैं। इसमें से 1,335.35 हेक्टेयर क्षेत्र घने जंगल का था। इसके अलावा अब यहां आगे 5.7 लाख पेड़ों को काटा जाना प्रस्तावित है।

मध्य प्रदेश में 2026 के दौरान विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए 15 लाख से अधिक पेड़ों की प्रस्तावित कटाई के मामले को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने गंभीरता से लिया है। एक समाचार रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लेते हुए एनजीटी ने 13 जनवरी 2026 को इस मामले में केंद्र और राज्य सरकार की संबंधित एजेंसियों से जवाब तलब किया है।

एनजीटी ने कहा है कि यह मामला पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986, भारतीय वन अधिनियम, 1927 और जैव विविधता अधिनियम, 2002 के उल्लंघन का संकेत देता है।

अधिकरण ने इस मामले में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के वन महानिदेशक, मध्य प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (एसईआईएए), मध्य प्रदेश और भोपाल स्थित इंटीग्रेटेड रीजनल ऑफिस से जवाब मांगा है।

सभी पक्षों को अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। इस मामले में अगली सुनवाई 9 मार्च 2026 को होनी है।

गौरतलब है कि यह मामला 8 जनवरी 2026 को हिंदी अखबार दैनिक भास्कर में प्रकाशित एक रिपोर्ट के आधार पर सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश में 50 से 100 साल पुराने 15 लाख से अधिक पेड़ों को सड़कों, रेलवे, कोयला ब्लॉकों और निर्माण परियोजनाओं के लिए काटने का प्रस्ताव है। इनमें भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और सिंगरौली जैसे इलाके प्रमुख हैं।

सिंगरौली में 5.7 लाख पेड़ों को काटने की है योजना

खबर में यह भी बताया गया है कि सिंगरौली ब्लॉक में ही 1,397.54 हेक्टेयर वन भूमि में अब तक 35,000 पेड़ काटे जा चुके हैं। इसमें से 1,335.35 हेक्टेयर क्षेत्र घने जंगल का था। इसके अलावा अब यहां आगे 5.7 लाख पेड़ों को काटा जाना प्रस्तावित है।

इसी तरह खंडवा करगोल क्षेत्र में रेलवे परियोजना के लिए 1.25 लाख पेड़, विदिशा में भोपाल–कानपुर हाईवे के लिए 25,000 पेड़, इंदौर–उज्जैन मार्ग पर 3,000 पेड़ों को काटने की योजना है। इसके साथ ही भोपाल में 10 लेन सड़क परियोजना के लिए 7,871 पेड़ों को काटा जाना प्रस्तावित है, जबकि ग्वालियर में अब तक 3,000 पेड़ पहले ही काटे जा चुके हैं और यहां 6,700 और पेड़ों पर आरी चलने की आशंका है।

एनजीटी की यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब विकास परियोजनाओं और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन को लेकर देशभर में सवाल उठ रहे हैं।

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