राष्ट्रीय राजधानी की वन भूमि पर अवैध निर्माण एवं अतिक्रमण, एनजीटी ने जारी किया नोटिस

याचीकर्ता का आरोप है कि निर्माण गतिविधियां वन संरक्षण एवं संवर्धन अधिनियम1980, दिल्ली विकास अधिनियम, 1957 तथा मास्टर प्लान दिल्ली के प्रावधानों का उल्लंघन हैं
फोटो साभार : विकिमीडिया कॉमन्स, वरुण शिव कपूर, नई दिल्ली
फोटो साभार : विकिमीडिया कॉमन्स, वरुण शिव कपूर, नई दिल्ली
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने नई दिल्ली ने वन भूमि पर कथित अवैध निर्माण एवं अतिक्रमण के मामले में गंभीर रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है।

यह मामला भाटी खुर्द स्थित महाबलीपुरम ग्रीन क्षेत्र की खसरा संख्या 1463 से संबंधित है, जहां सरकारी वन भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर पुल निर्माण किए जाने का आरोप लगाया गया है।

याचीकर्ता अरुण पाल ने आरोप लगाया है कि कुछ फार्महाउस मालिकों द्वारा बिना वैधानिक अनुमति के वन भूमि पर अवैध निर्माण गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। याचिकाकर्ता द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में वन एवं वन्यजीव विभाग, जीएनसीटीडी ने स्पष्ट किया कि संबंधित भूमि अधिसूचित वन भूमि है तथा पुल निर्माण हेतु कोई टेंडर अथवा अनुमति जारी नहीं की गई है।

इस मामले की सुनवाई एनजीटी की प्रधान पीठ कर रही है। इसमें न्यायिक सदस्य अरुण कुमार त्यागी, विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए. सेंथिल वेल एवं विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद शामिल हैं।

मामले की सुनवाई के दौरान अधिकरण के समक्ष यह भी प्रस्तुत किया गया कि उक्त निर्माण गतिविधियां वन संरक्षण एवं संवर्धन अधिनियम1980, दिल्ली विकास अधिनियम, 1957 तथा मास्टर प्लान दिल्ली के प्रावधानों का उल्लंघन हैं।

याचीकर्ता की ओर से कहा गया कि दक्षिण वन प्रभाग द्वारा 6 मार्च को जारी रोक आदेश के बावजूद निर्माण कार्य जारी है।

अधिकरण ने प्रथम दृष्टया माना कि मामला पर्यावरण एवं वन संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न उठाता है। इसके उपरांत अधिकरण ने सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

मामले की अगली सुनवाई 25 मई 2026 को निर्धारित की गई है

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