

नायलॉन और रासायनिक मांझा: पक्षियों और प्राकृतिक वातावरण के लिए गंभीर खतरा, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प अपनाना आवश्यक
पतंग उड़ाते समय बिजली के तार और खुले स्थानों की सुरक्षा: दुर्घटना और पर्यावरण नुकसान से बचाव का महत्व
टूटे हुए मांझे और पतंग का सही निपटान: प्रकृति को प्रदूषण से बचाने और जीवन सुरक्षा सुनिश्चित करने का तरीका
पर्यावरण-अनुकूल सूती मांझा अपनाना: पारंपरिक उत्सव में प्रकृति की रक्षा और पक्षियों की जान बचाने का समाधान
सामूहिक जागरूकता और जिम्मेदारी: मकर संक्रांति के दौरान उत्सव की मस्ती के साथ पर्यावरण संरक्षण की पहल जरूरी
भारत में मकर संक्रांति का त्योहार हर साल बड़े उत्साह और खुशी के साथ मनाया जाता है। यह पर्व सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक है और इसे सर्दियों के अंत की शुरुआत माना जाता है। इस साल मकर संक्रांति आज, 14 जनवरी को मनाई जा रही है। हालांकि इस बार त्योहार के समय उत्तर भारत के कई हिस्सों में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे का असर बना हुआ है।
मकर संक्रांति का विशेष महत्व किसानों और ग्रामीण जीवन से जुड़ा हुआ है। यह फसल कटाई का समय होता है और किसान अपनी मेहनत की फसल के लिए ईश्वर का धन्यवाद करते हैं। यह त्योहार मेहनत, संतुलन और आपसी सहयोग का संदेश देता है। इस दिन लोग एक-दूसरे को तिल, गुड़ और मिठाइयां बांटते हैं, जिससे आपसी रिश्तों में मिठास बढ़ती है।
इस अवसर पर देश के कई हिस्सों में पतंग उड़ाने की परंपरा है। छतों, खुले मैदानों और मोहल्लों में रंग-बिरंगी पतंगें आसमान को सुंदर बना देती हैं। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी पतंग उड़ाने का आनंद लेते हैं। यह दृश्य त्योहार के उत्साह और खुशी को और बढ़ा देता है।
लेकिन पिछले कुछ वर्षों से पतंग उड़ाने के दौरान चीनी और नायलॉन मांझा एक बड़ी समस्या बनकर सामने आया है। नायलॉन या केमिकल से बना मांझा बहुत तेज और खतरनाक होता है। इससे कई बार गंभीर दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। दोपहिया वाहन चलाने वाले लोग और पैदल चलने वाले सबसे अधिक जोखिम में रहते हैं। अचानक गले या चेहरे पर मांझा लगने से गहरी चोट लग सकती है और कई मामलों में जान भी जा चुकी है।
साल 2017 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा प्रतिबंधित किए जाने के बावजूद, चीनी मांझा चोरी-छिपे बेचा जा रहा है। भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 के तहत, इसके इस्तेमाल पर 5,000 रुपये का जुर्माना या एक साल तक की कैद की सजा हो सकती है। लेकिन मात्र कानून ही लोगों की जान नहीं बचा सकता - यह हम पर निर्भर करता है कि हम जिम्मेवारी से काम करें।
चीनी और नायलॉन का मांझा क्यों है हानिकारक?
हर साल हजारों पक्षी चीनी और नायलॉन के मांझे की चपेट में आते हैं। यह नुकीला, नष्ट होने वाला नहीं होता है और इसमें पिसे हुए कांच की परत होती है, जिससे पक्षियों को उड़ान के दौरान घातक चोट लग जाती है।
इसके अलावा पतंगें बिजली की तारों में फंस जाती हैं, जिससे बिजली आपूर्ति बाधित होती है और आग लगने का खतरा भी बना रहता है। इसलिए लोगों से अपील की जाती है कि वे खुले और सुरक्षित स्थानों पर ही पतंग उड़ाएं और बिजली के तारों से दूर रहें।
चीनी व नायलॉन मांझा न केवल इंसानों के लिए बल्कि पक्षियों के लिए भी बेहद खतरनाक है। कई पक्षी उड़ते समय मांझे में उलझकर घायल हो जाते हैं या अपनी जान गंवा देते हैं। यह पर्यावरण के लिए भी नुकसानदायक है क्योंकि यह मांझा नष्ट नहीं होता और लंबे समय तक प्रकृति को नुकसान पहुंचाता है।
पर्यावरण प्रेमियों और पशु-पक्षी संरक्षण से जुड़े लोगों ने नायलॉन मांझे के इस्तेमाल पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि केवल प्रतिबंध लगाना काफी नहीं है, बल्कि अवैध रूप से मांझा बेचने वालों पर सख्ती से कार्रवाई होनी चाहिए। पुलिस और स्थानीय प्रशासन से दुकानों और बाजारों में जांच करने की मांग की गई है।
लोगों को चाहिए कि वे सूती और पर्यावरण के अनुकूल मांझे का ही इस्तेमाल करें। साथ ही, टूटे हुए पतंग और मांझे को इधर-उधर न फेंकें, बल्कि सही तरीके से नष्ट करें। थोड़ी सी सावधानी से कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।
मकर संक्रांति खुशी, एकता और सौहार्द का पर्व है। कुछ पलों की मस्ती किसी की जान पर भारी न पड़े, इसका ध्यान रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। यदि हम सुरक्षित और जिम्मेदारी से त्योहार मनाएं, तो यह पर्व सही मायनों में खुशहाली और सामूहिक आनंद का संदेश देगा।