विश्व शांति व पर्यावरण की सुरक्षा के लिए दुनिया को चाहिए परमाणु हथियारों से मुक्ति

परमाणु परीक्षणों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दिवस: परमाणु परीक्षणों पर रोक की मांग तेज, मानव जीवन और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए दुनिया से एकजुट होकर कदम उठाने की अपील
दुनिया में अब तक 2,000 से अधिक परमाणु परीक्षण हो चुके हैं, जिनका मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ा।
दुनिया में अब तक 2,000 से अधिक परमाणु परीक्षण हो चुके हैं, जिनका मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ा।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • दुनिया में अब तक 2,000 से अधिक परमाणु परीक्षण हो चुके हैं, जिनका मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ा।

  • संयुक्त राष्ट्र ने 29 अगस्त को परमाणु परीक्षणों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित कर दुनिया को इसके खतरों से जागरूक किया।

  • 1996 में अपनाई गई सीटीबीटी संधि का उद्देश्य सभी प्रकार के परमाणु परीक्षणों पर पूरी तरह रोक लगाना है।

  • सीटीबीटी पर अधिकांश देशों ने हस्ताक्षर किए हैं, लेकिन कुछ जरूरी देशों की मंजूरी नहीं मिलने से संधि अभी लागू नहीं हुई।

  • संयुक्त राष्ट्र परमाणु परीक्षणों पर रोक और भविष्य में पूरी तरह परमाणु हथियार मुक्त दुनिया बनाने की दिशा में प्रयास कर रहा है।

हर साल 29 अगस्त को दुनिया भर में परमाणु परीक्षणों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य लोगों को परमाणु हथियारों के परीक्षण से होने वाले खतरों के बारे में जागरूक करना और परमाणु परीक्षणों को पूरी तरह रोकने की दिशा में देशों को आगे बढ़ाना है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दो दिसंबर 2009 को सर्वसम्मति से प्रस्ताव 64/35 को मंजूरी देकर 29 अगस्त को यह दिवस घोषित किया था। इस पहल की शुरुआत कजाकिस्तान ने की थी। 29 अगस्त 1991 को कजाकिस्तान में स्थित सेमिपालातिंस्क परमाणु परीक्षण स्थल को बंद किया गया था। इसी घटना की याद में यह दिन चुना गया।

1945 में शुरू हुआ परमाणु परीक्षणों का दौर

दुनिया में पहला परमाणु परीक्षण 16 जुलाई 1945 को अमेरिका के न्यू मैक्सिको में किया गया था। इसके बाद कई दशकों तक अलग-अलग देशों ने परमाणु हथियारों के परीक्षण किए। अब तक दुनिया में 2,000 से अधिक परमाणु परीक्षण हो चुके हैं।

परमाणु परीक्षणों के शुरुआती दौर में इनके स्वास्थ्य और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर बहुत कम ध्यान दिया गया। वायुमंडल में किए गए परीक्षणों से रेडियोधर्मी पदार्थ दूर-दूर तक फैल गए। इसका असर लोगों के स्वास्थ्य, जमीन, पानी और पर्यावरण पर लंबे समय तक देखा गया।

समय के साथ यह साफ हुआ कि परमाणु परीक्षण केवल युद्ध की तैयारी का मामला नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध मानव जीवन और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा से भी है।

रेडियोधर्मी विकिरण का गंभीर खतरा

परमाणु विस्फोट के बाद निकलने वाला रेडियोधर्मी विकिरण इंसानों और पर्यावरण के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। इसका प्रभाव तुरंत दिखाई नहीं देता, लेकिन लंबे समय तक लोगों और आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।

परमाणु परीक्षणों से प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों ने विकिरण के कारण कई गंभीर समस्याओं का सामना किया है। यही कारण है कि आज दुनिया के अधिकांश देश परमाणु परीक्षणों पर रोक लगाने की आवश्यकता को स्वीकार करते हैं।

सीटीबीटी से जुड़ी उम्मीद

परमाणु परीक्षणों को रोकने के लिए सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समझौता व्यापक परमाणु-परीक्षण-प्रतिबंध संधि (सीटीबीटी) है। इसे संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 10 सितंबर 1996 को अपनाया था। इसका उद्देश्य सभी प्रकार के परमाणु विस्फोटों पर रोक लगाना है।

इस संधि पर दुनिया के अधिकांश देशों ने हस्ताक्षर किए हैं और बड़ी संख्या में देशों ने इसका अनुमोदन भी किया है। इसके बावजूद सीटीबीटी अभी तक लागू नहीं हो सकी है। इसके लागू होने के लिए कुछ महत्वपूर्ण देशों का अनुमोदन जरूरी है।

संयुक्त राष्ट्र लगातार उन देशों से संधि को मंजूरी देने की अपील करता रहा है, जिनकी भागीदारी इसके लागू होने के लिए आवश्यक है।

परमाणु विस्फोटों पर नजर रखने की व्यवस्था

परमाणु परीक्षणों पर निगरानी रखने के लिए सीटीबीटी संगठन की तैयारी समिति ने दुनिया भर में एक अंतरराष्ट्रीय निगरानी व्यवस्था विकसित की है। इसमें भूकंपीय गतिविधियों, समुद्र के भीतर होने वाली हलचलों और वातावरण में रेडियोधर्मी पदार्थों सहित कई संकेतों की निगरानी की जाती है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अगर कहीं परमाणु विस्फोट किया जाता है तो उसका पता लगाया जा सके। विज्ञान और तकनीक में प्रगति ने परमाणु परीक्षणों की निगरानी और उनकी पहचान को पहले की तुलना में काफी बेहतर बनाया है।

परमाणु हथियारों से मुक्त दुनिया का लक्ष्य

संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि परमाणु परीक्षणों को रोकना परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। नए और अधिक शक्तिशाली परमाणु हथियारों के विकास पर रोक लगाने में भी इसका महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है।

26 सितंबर को परमाणु हथियारों के पूर्ण उन्मूलन का अंतरराष्ट्रीय दिवस भी मनाया जाता है। इसका उद्देश्य दुनिया को पूरी तरह परमाणु हथियारों से मुक्त करने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को बढ़ावा देना है।

शांति के लिए जरूरी है परीक्षणों पर रोक

परमाणु परीक्षणों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दिवस केवल अतीत की घटनाओं को याद करने का दिन नहीं है। यह दुनिया को परमाणु हथियारों के खतरों के प्रति सचेत करने का अवसर भी है।

परमाणु हथियारों की मौजूदगी आज भी मानवता के सामने बड़ा खतरा है। ऐसे में परमाणु परीक्षणों पर स्थायी रोक और परमाणु हथियारों के पूर्ण उन्मूलन की दिशा में अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है। 29 अगस्त का संदेश साफ है - सुरक्षित और शांतिपूर्ण दुनिया के लिए परमाणु विस्फोटों का अंत होना चाहिए।

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