ग्राउंड रिपोर्ट: सौर ऊर्जा के स्याह पक्ष से उपजा खेजड़ी बचाओ आंदोलन

राजस्थान में सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थानीय जैव विविधता के लिए बन रही हैं खतरा, बड़ी संख्या में खेजड़ी कटने से लोगों में गुस्सा
खेजड़ी बचाने के लिए बीकानेर में जुलाई 2025 से जारी है धरना। सभी फोटो: भागीरथ
खेजड़ी बचाने के लिए बीकानेर में जुलाई 2025 से जारी है धरना। सभी फोटो: भागीरथ
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राजस्थान में बीकानेर सौर ऊर्जा उत्पादन का केंद्र बन रहा है और राज्य सरकार इसे बेहद आक्रामकता के साथ प्रोत्साहित कर रही है। इसे राज्य के हालिया बजट से समझा जा सकता है जिसमें केवल दो जिलों-बीकानेर और जैसलमेर में सौर परियोजनाओं के लिए 2,900 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।

राज्य की उपमुख्यमंत्री व वित्तमंत्री दिया कुमारी ने 11 फरवरी के अपने बजट भाषण में कहा कि बीकानेर में मेहरासर-दीनसर-बराला व सवाईसर-करणीसर भाटियान-बिकोलोई तथा जैसलमेर में राघवा-सेहुआ क्षेत्र में लगभग 4,830 मेगावाट क्षमता के सौर पार्कों का विकास संयुक्त उपक्रम के माध्यम से किया जाएगा। 

बजट भाषण के अनुसार, “आज राजस्थान अक्षय ऊर्जा एवं सौर ऊर्जा क्षमता में देश में अग्रणी प्रदेश बन गया है। राजस्थान को ऊर्जा प्रदेश बनाए जाने की दिशा में हमारे कार्यकाल में केन्द्रीय उपक्रमों के साथ संयुक्त उपक्रम के माध्यम से लगभग दो लाख करोड़ रुपए के निवेश के परम्परागत एवं अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं को विकसित करने के लिए एमओयू किए गए।”  

बीकानेर के लाखूसर गांव में सड़क किनारे पड़ी हैं कटी खेजड़ियां
बीकानेर के लाखूसर गांव में सड़क किनारे पड़ी हैं कटी खेजड़ियां

राजस्थान सरकार की यह आक्रामकता स्थानीय जैव विविधता के लिए खतरा बन रही है। दिया कुमारी ने बीकानेर के जिन गांवों में सौर पार्कों का जिक्र किया, वहां हाल में बड़ी संख्या में खेजड़ी काटी गई हैं। कालासर गांव के रहने वाले हरीश चौधरी ने डाउन टू अर्थ को बताया कि केवल कालासर और उससे सटे सवाईसर में 5,000 के आसपास खेजड़ी काटी जा चुकी है।

इनके नजदीकी एक अन्य गांव लाखूसर में रहने वाले भियां राम कहते हैं कि अगर हमें पता होता कि जमीन लेने वाली कंपनी सोलर प्लांट के लिए खेजड़ी के पेड़ काटेगी तो हम किसी भी कीमत पर जमीन नहीं देते। गांव के एक अन्य किसान हनुमान राम कहते हैं कि हमने तीन साल पहले लीज पर जमीन इस शर्त के साथ दी थी कि पेड़ नहीं कटने चाहिए। कंपनी ने इसका आश्वासन भी दिया लेकिन एक साल बाद ही उनके खेत से 100 खेजड़ी के पेड़ काट दिए। 

बीकानेर में साैर परियोजनाओं के लिए काटी गई हैं हजारों खेजड़ी
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खेजड़ी कटने पर उबाल 

बीकानेर समेत राजस्थान के कई जिलों में इस प्रकार खेजड़ी की अंधाधुंध कटाई ने लोगों को गुस्से से भर दिया। इसी कारण बीकानेर में बिश्नोई समाज को 2 फरवरी 2026 से खेजड़ी बचाव महापड़ाव शुरू करना पड़ा और सैकड़ों लोग आमरण अनशन पर बैठ गए। देखते ही देखते इस महापड़ाव में राजस्थान और दूसरे राज्यों से लोग पहुंचने लगे। यहां तक कि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्रियों वसुंधरा राजे और अशोक गहलोत तक को इसका समर्थन करना पड़ा। आंदोलन के समर्थन में राजस्थान के कई जिलों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। साथ ही अन्य राज्यों से भी आंदोलन को समर्थन मिलने लगा।

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इस आंदोलन को मिल रहे व्यापक जनसमर्थन को देखते हुए मुख्यमंत्री ने 5 फरवरी को विधानसभा में खेजड़ी बचाने के लिए कानून बनाने की घोषणा की। 12 फरवरी को राजस्व विभाग की तरफ से जारी आदेश में सभी कलेक्टरों को कहा गया, “प्रदेश में राज्य वृक्ष खेजड़ी के सांस्कृतिक एवं विशिष्ट पहचान एवं आमजन की आवश्यकता और भावनाओं के मद्देनजर राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में खेजड़ी संरक्षण हेतु विशेष कानून लाने का विनिश्चय किया गया है। उक्त कानून को अतिशीघ्र लागू किया जाना प्रस्तावित है। साथ ही राज्य सरकार प्रदेश में खेजड़ी संरक्षण एवं अवैध कटाई नहीं होने देने के प्रति पूर्णत संकल्पित है। अतः इस क्रम में प्रभावी कार्रवाई करें।”

सरकार के इस आश्वासन के बाद बीकानेर में चल रहा महापड़ाव तो खत्म कर दिया गया, लेकिन कलेक्ट्रेट के सामने खेजड़ला रोही के समर्थन में चल रहा धरना जारी है। महापड़ाव के संयोजकों में शामिल रामगोपाल बिश्नोई ने डाउन टू अर्थ को बताया कि हमारी सरकार से यही मांग थी कि जब तक कानून न बने, तब तक वह ऐसा आदेश जारी करे जिससे कटाई पर रोक लग जाए।

कालासर गांव के पास बन सोलर प्लांट में कटी खेजड़ी
कालासर गांव के पास बन सोलर प्लांट में कटी खेजड़ी

उन्होंने बताया, “कानून बनाने के लिए मुख्यमंत्री से चार बार मुलाकात करनी पड़ी। हमने उन्हें कानून का मसौदा भी दिया था और कार्रवाई न करने पर महापड़ाव की घोषणा की थी। महापड़ाव से पहले खेजड़ी की कटाई जारी रहने पर हमने पहले आठ जिले भी बंद कराए थे।” वह कहते हैं कि सरकार ने मौखिक आदेश में इसी सत्र (बजट सत्र) में कानून लाने का कहा है, इसी आश्वासन पर महापड़ाव उठा है। अगर सरकार अपनी बात पर खरी नहीं उतरती है तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।  

रामगोपाल के अनुसार, वर्तमान कानून भूमि से जुड़े हैं। पेड़ों की सुरक्षा के लिए कानून नहीं हैं। इसीलिए ट्री प्रोटेक्शन कानून की मांग की गई। उन्होंने कहा कि खेजड़ी के कटने पर प्रशासन 100 रुपए प्रति पेड़ से अधिक जुर्माना नहीं लगा सकता। यह जुर्माना 1955 में बने टेनेंसी कानून (काश्तकार कानून) के तहत है।

रामगोपाल बिश्नाई के अनुसार, 1955 में जब कानून में 100 रुपए जुर्माने का प्रावधान किया गया था तब 100 रुपए में सवा तोला सोना आता है। अब सोना डेढ़ लाख रुपए से ऊपर पहुंच चुका है और जुर्माने की राशि में बदलाव नहीं हुआ। हालांकि दिसंबर 2025 में जुर्माने की यह राशि 1,000 रुपए की गई है। रामगोपाल इसे भी कमतर बताते हुए कहते हैं कि अगर जुर्माना लगाना ही है तो अभी के सवा तौला सोने के भाव से जुर्माना लगना चाहिए। यह प्रति पेड़ करीब दो लाख रुपए पड़ेगा। इतना भारी जुर्माना लगने पर कोई खेजड़ी को काटने की हिम्मत नहीं करेगा। 

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