ग्राउंड रिपोर्ट: एक धरने से बचीं हजारों खेजड़ियां

बीकानेर के नौखा दैया में खेजड़ी बचाने के लिए 18 जुलाई 2024 से जारी है धरना
नौखा दैया गांव में खेजड़ी बचाने के लिए ग्रामीणों ने एकजुटता दिखाई। फोटो: कान्हा राम गोदारा
नौखा दैया गांव में खेजड़ी बचाने के लिए ग्रामीणों ने एकजुटता दिखाई। फोटो: कान्हा राम गोदारा
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568 दिन। 15 फरवरी 2026 को खेजड़ला रोही में चारों ओर से सोलर प्लांट से घिरे खेत में धरने का 568वां दिन था। किशना राम गोदारा ने धरने को अपनी पहचान से जोड़ लिया है। उनका साफ मानना है कि उनके परिवार और पूरे गांव का अस्तित्व काफी हद तक खेजड़ी से जुड़ा है। इसी को बचाने के लिए उन्होंने 18 जुलाई 2024 को अपने खेत में धरना शुरू किया। दिन रात खेत में रहकर वह खेजड़ी को कटने से बचाने के हर संभव प्रयास कर रहे हैं। इन पेड़ों को अपने पुरखों की विरासत मानने वाले किशना राम इनकी रक्षा को अपना दायित्व समझते हैं।

किशना राम पश्चिमी राजस्थान के बीकानेर जिले के नौखा दैया गांव के रहने वाले हैं। उनके गांव में करीब 3,000 बीघा (2,000 एकड़) क्षेत्र को खेजड़ला रोही कहते हैं। इस क्षेत्र में 150-200 साल से कम से कम 15,000 खेजड़ी खड़ी हैं। खुद उनके 38 बीघा के खेत में इसके 200 पेड़ हैं। उन्हें अपने खेतों में खड़ीं खेजड़ियां बेहद प्रिय हैं। उनके धरने का उद्देश्य सोलर प्लांट से इनकी रक्षा करना है।

धरने पर बैठे किशना राम गोदारा (बाएं से दूसरे)
धरने पर बैठे किशना राम गोदारा (बाएं से दूसरे)

किशना राम का कहना है कि सोलर कंपनी ने समझौता करने और धरना खत्म करने के लिए उन्हें लालच दिया, डराया-धमकाया, मुकदमे किए लेकिन खेजड़ी के लिए उन्होंने समझौता नहीं किया। उनकी तीन मुख्य मांगों हैं। पहली, राज्यवृक्ष खेजड़ी की कटाई पर पूरी तरह रोक, दूसरी, राजस्थान ट्री एक्ट बनाया जाए और तीसरी, बिना पेड़ काटे सोलर प्लांट लगाए जाएं। 

नौखा दैया गांव की 2,300 बीघा जमीन सोलर परियोजना में जा चुकी है और 500 बीघा जमीन और जाने वाली है। यहां 300 मेगावाट क्षमता सोलर प्लांट चल रहा है। इस प्लांट के लिए जुलाई 2024 में सैकड़ों खेजड़ी के पेड़ों को रातोंरात काट दिया था, इसी के बाद किशना राम धरने पर बैठ गए। बाद में बिश्नाई समाज ने उनके धरने के समर्थन में 18 जुलाई 2025 से बीकानेर में कलेक्ट्रेट के सामने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। धरने के बाद सोलर परियोजना के लिए उनके गांव में खेजड़ी की कटाई नहीं हुई और कंपनी को बिना पेड़ काटे परियोजना का अंजाम देना पड़ा। 

धरने के कारण सोलर कंपनी को बिना खेजड़ी के पेड़ काटने परियोजना का काम करना पड़ा। फोटो : कान्हा राम गोदारा
धरने के कारण सोलर कंपनी को बिना खेजड़ी के पेड़ काटने परियोजना का काम करना पड़ा। फोटो : कान्हा राम गोदारा

हालांकि जिले के दूसरे कई गांवों में किसानों में इस प्रकार की जागरुकता और तत्परता के अभाव में बड़े स्तर पर पेड़ों की कटाई नहीं रुकी और रातोंरात हजारों पेड़ काट दिए गए। भानीपुरा गांव के किसानों का अनुमान है कि गांव में करीब 10 हजार खेजड़ियों की कटाई हुई है। करीब 400 परिवारों और 2,500 की आबादी वाले इस गांव की जमीन का बड़ा हिस्सा सोलर परियोजना में चला गया है।

गांव के सरपंच प्रतिनिधि ईश्वर राम के अनुसार, सोलर प्लांट का काम तेजी से चल रहा है और अब तक 85,000 बीघा में से 10,000 बीघा जमीन कंपनी ले चुकी है और जल्द ही बाकी जमीन भी कंपनी के पास चली जाएगी। उनका आरोप है कि कंपनी रात के वक्त हथियारबंद लोगों की निगरानी में खेजड़ी के पेड़ों की कटाई कराती है और प्रशासन को इसकी भनक नहीं लगती। ग्रामीणों ने इसके विरोध में चार महीने पहले प्लांट के सामने धरना भी दिया था।

बीकानेर में सोलर परियोजनाओं के लिए खेजड़ी कटने पर इस प्रकार के कई धरने दिए गए, लेकिन कंपनियों इनके आगे नहीं झुकीं। किशना राम गोदारा के नेतत्व में खेजड़ला रोही का धरना इस मामले में काफी सफल रहा।

किशना राम ने डाउन टू अर्थ को बताया कि वह सोलर परियोजना के विरोधी नहीं हैं। इसे उन स्थानों पर लगाना चाहिए जहां जमीन अनुपयोगी है और उसके पर्यावरण पर प्रभाव नहीं है। कृषि भूमि और पर्यावरण की कीमत पर इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।

वह कहते हैं कि उनके क्षेत्र में नहर आ पानी है, इसलिए यहां परियोजनाएं आ रही हैं। किसानों के हिस्से का पानी इन परियोजनाओं को जा रहा है। उनका कहना है कि गांव में लगे सोलर प्रोजेक्ट के लिए रोज 5,000-6,000 हजार लीटर के 20 टैंकर पानी इस्तेमाल हो रहा है।

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