

डोलड्रम डे यानी शांत और हवा रहित दिन समुद्र को गर्म करते हैं, कोरल ब्लिचिंग की घटनाएं बढ़ाती हैं।
ट्रेड विंड्स समुद्र की प्राकृतिक एयर कंडीशनर हैं; जब ये रुकती हैं, पानी जल्दी गर्म होकर कोरल पर दबाव डालता है।
दिसंबर और अप्रैल में ट्रेड विंड्स की कमी समुद्र की गर्मी जल्दी बढ़ाती है और लंबे समय तक रहती है।
बड़े वायुमंडलीय तरंगें ट्रेड विंड्स को रोकती हैं, डोलड्रम डे बढ़ाती हैं, जिससे ग्रेट बैरियर रीफ को नुकसान होता है।
जलवायु परिवर्तन और मौसम अस्थिरता से ब्लिचिंग अधिक होने की संभावना बढ़ती है, मॉनिटरिंग और पूर्वानुमान महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
ग्रेट बैरियर रीफ, ऑस्ट्रेलिया का एक विश्व धरोहर स्थल है और यह दुनिया के सबसे बड़े प्रवाल भित्तियों (कोरल रीफ) में से एक है। लेकिन आज यह रीफ तेजी से खतरे में है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इसके पीछे समुद्र के पानी का अत्यधिक गर्म होना और “डोलड्रम डे” यानी शांत और हवा रहित दिन सबसे बड़ी वजह हैं।
डोलड्रम डे क्या है?
“डोलड्रम” एक पुराना समुद्री शब्द है। पहले के समय में समुद्री जहाज जब लंबे समय तक बिना हवा के क्षेत्रों में फंस जाते थे, तो उन्हें पानी और भोजन की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। आज, यह शब्द उन दिनों के लिए इस्तेमाल होता है जब समुद्र और आसमान दोनों शांत रहते हैं, यानी समुद्री हवा, खासकर ट्रेड विंड्स, गायब हो जाती हैं।
ट्रेड विंड्स का महत्व
ट्रेड विंड्स समुद्र की प्राकृतिक “एयर कंडीशनिंग” का काम करती हैं। ये हवाएं समुद्र की सतह को ठंडा करती हैं और पानी को हिलाती हैं। जब ये हवाएं नहीं चलतीं, तो समुद्र जल्दी गर्म हो जाता है। गर्म पानी कोरल के लिए खतरनाक होता है। जब पानी का तापमान बहुत बढ़ जाता है, तो कोरल “ब्लिचिंग” यानी सफेद पड़ने लगते हैं और उनका जीवन संकट में पड़ जाता है।
सालों के अध्ययन से पता चला
मोनाश यूनिवर्सिटी और एआरसी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर द वेदर ऑफ द 21 सेंचुरी ने करीब तीन दशक के मौसम के आंकड़ों का अध्ययन किया। शोधकर्ताओं ने पाया कि जब बड़े पैमाने पर वायुमंडलीय तरंगें बनती हैं, तो यह ट्रेड विंड्स को रोक सकती हैं। इसके कारण लंबे समय तक “डोलड्रम डे” आते हैं।
विशेष रूप से, दिसंबर और अप्रैल के महीनों में अगर ट्रेड विंड्स नहीं चलतीं, तो समुद्र ठंडा नहीं होता। इसके कारण गर्मी जल्दी बढ़ती है और लंबे समय तक रहती है। यही समय है जब समुद्र के पानी का तापमान सबसे ज्यादा बढ़ता है और कोरल पर दबाव पड़ता है।
ब्लिचिंग की घटनाएं और मौसम
वेदर एंड क्लाइमेट डायनामिक्स नामक पत्रिका में प्रकाशित शोध में यह भी देखा गया कि जब मास ब्लिचिंग होती है, तो उस साल गर्म महीनों में ज्यादा “शांत और साफ” दिन होते हैं और ट्रेड विंड्स कम चलती हैं। इसका मतलब है कि गर्मी जल्दी बढ़ती है और लंबे समय तक रहती है।
शोध पत्र में शोधकर्ता के हवाले से कहा गया है कि ट्रेड विंड्स समुद्र के लिए प्राकृतिक एयर कंडीशनर की तरह हैं। जब ये विफल हो जाती हैं, तो पानी जल्दी गर्म हो जाता है और कोरल को खतरा होता है। इन पैटर्न को समझकर हम भविष्य में ब्लिचिंग को रोकने या कम करने की कोशिश कर सकते हैं।
शोध का महत्व
शोध पत्र में शोधकर्ता के हवाले से कहा गया है कि जब रीफ पर मास ब्लिचिंग होती है, तो डोल्ड्रम्स अधिक समय तक रहते हैं। ये शांत दिन और ट्रेड विंड्स का अभाव समुद्र के तापमान को बढ़ाता है। यदि मौसम का यह पैटर्न शुरू और अंत दोनों में बना रहे, तो ब्लिचिंग के लिए आदर्श परिस्थितियां बन जाती हैं।
शोध से यह स्पष्ट होता है कि केवल गर्मी ही ब्लिचिंग का कारण नहीं है, बल्कि मौसमी हवा की कमी और समुद्र की लगातार गर्मी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
भविष्य के लिए कदम
जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम प्रणाली अस्थिर होती जा रही है। ऐसे में ट्रेड विंड्स की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। समुद्र के तापमान पर स्थानीय मौसम के प्रभाव को समझना और मॉनिटर करना जरूरी है। इससे हमें अर्ली वॉर्निंग सिस्टम बनाने में मदद मिल सकती है, ताकि रीफ को बचाने के उपाय समय पर किए जा सकें।
शोध में कहा गया है कि जैसा कि स्थानीय मौसम ग्रेट बैरियर रीफ के पानी के तापमान को प्रभावित करता है, ट्रेड विंड्स की संरचना और उनका टूटना समझना बहुत जरूरी है। यह हमें समुद्री लू या हीटवेव और ब्लिचिंग की घटनाओं की निगरानी और पूर्वानुमान में मदद करेगा।
ग्रेट बैरियर रीफ की सुरक्षा केवल कोरल और समुद्री जीवन के लिए नहीं, बल्कि पूरी पृथ्वी के पर्यावरण के लिए भी जरूरी है। डोलड्रम डे और ट्रेड विंड्स का अध्ययन हमें यह समझने में मदद करता है कि क्यों कुछ सालों में ब्लिचिंग की घटनाएं ज्यादा होती हैं। इस जानकारी से हम भविष्य में रीफ को बचाने और संरक्षण के लिए बेहतर योजनाएं बना सकते हैं।