

तीन डिग्री तापमान बढ़ने पर भारत के 80 फीसदी से ज्यादा बुजुर्गों को खतरनाक गर्मी का सामना करना पड़ सकता है।
दिल्ली और गंगा के मैदानी इलाकों में बुजुर्गों को सालाना 2,000 घंटे से ज्यादा खतरनाक गर्मी झेलनी पड़ सकती है।
मई से सितंबर के बीच दिन के साथ रात में भी गर्मी बढ़ने से बुजुर्गों को राहत मिलने के आसार घटेंगे।
उम्र बढ़ने के साथ शरीर की गर्मी नियंत्रित करने की क्षमता घटती है, इसलिए बुजुर्ग कम तापमान पर भी प्रभावित होते हैं।
विशेषज्ञों ने गर्मी से बचाव के लिए बुजुर्गों को विशेष चेतावनी, स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षित ठंडे स्थान उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
दुनिया में बढ़ता तापमान आने वाले वर्षों में लोगों, खासकर बुजुर्गों के लिए बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन सकता है। लैंसेट प्लैनेटरी हेल्थ में प्रकाशित एक नए अध्ययन के अनुसार, अगर वैश्विक तापमान में तीन डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक की बढ़ोतरी होती है, तो भारत, चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों के बुजुर्गों को दिन और रात दोनों समय कई महीनों तक खतरनाक गर्मी का सामना करना पड़ सकता है।
यह स्थिति केवल परेशानी या असुविधा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। लंबे समय तक गर्मी में रहने से शरीर के लिए अपना सामान्य तापमान बनाए रखना मुश्किल हो जाता है।
भारत पर सबसे ज्यादा असर
अध्ययन में भारत को गर्मी के लिहाज से दुनिया के सबसे संवेदनशील देशों में शामिल किया गया है। तीन डिग्री सेल्सियस वैश्विक तापमान वृद्धि की स्थिति में भारत की आधी से ज्यादा आबादी को साल में कम से कम 180 घंटे ऐसी गर्मी का सामना करना पड़ सकता है, जिसे शरीर के लिए सहन करना मुश्किल माना जाता है। बुजुर्गों में यह खतरा 80 प्रतिशत से भी ज्यादा हो सकता है।
दिल्ली और गंगा के मैदानी इलाकों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। अध्ययन के मुताबिक, वैश्विक तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी पर ही इस क्षेत्र के बुजुर्गों को साल में करीब 1,000 घंटे तक खतरनाक गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। तापमान में बढ़ोतरी तीन डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने पर यह समय 2,000 घंटे से अधिक हो सकता है।
मई से सितंबर तक सबसे ज्यादा खतरा
शोधकर्ताओं के अनुसार, खतरनाक गर्मी पूरे साल एक जैसी नहीं रहेगी। इसका बड़ा हिस्सा मई से सितंबर के बीच केंद्रित होगा। इस दौरान अगर दिन के साथ रात का तापमान भी ऊंचा रहा, तो शरीर को आराम करने और खुद को ठंडा करने का पर्याप्त समय नहीं मिलेगा।
तीन डिग्री से अधिक तापमान वृद्धि की स्थिति में बुजुर्गों को लगातार कई महीनों तक दिन और रात दोनों समय खतरनाक गर्मी झेलनी पड़ सकती है। इससे बिजली, कूलिंग की सुविधाओं, अस्पतालों और सरकार की गर्मी से बचाव की योजनाओं पर भारी दबाव पड़ सकता है।
बुजुर्गों को गर्मी ज्यादा क्यों सताती है?
उम्र बढ़ने के साथ शरीर की गर्मी नियंत्रित करने की क्षमता कम हो जाती है। बुजुर्गों को कम पसीना आता है और उनकी रक्त वाहिकाएं गर्मी के अनुसार उतनी तेजी से प्रतिक्रिया नहीं कर पातीं। गर्म मौसम में उनके दिल पर भी ज्यादा दबाव पड़ता है।
पहले किए गए कई अध्ययनों में स्वस्थ युवाओं के शरीर की गर्मी सहने की क्षमता को आधार बनाया गया था। नए अध्ययन में अलग-अलग उम्र के लोगों को शामिल किया गया है। शोधकर्ताओं ने 15 से 39 वर्ष, 40 से 59 वर्ष और 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों की गर्मी सहने की क्षमता का अध्ययन किया। इससे पता चलता है कि बुजुर्गों के लिए खतरनाक गर्मी का स्तर युवाओं की तुलना में काफी पहले आ सकता है।
केवल गर्मी की चेतावनी काफी नहीं
विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी से बचाव के लिए केवल चेतावनी जारी करना पर्याप्त नहीं है। गर्मी से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले लोगों की पहचान करना और उन्हें समय पर मदद पहुंचाना भी जरूरी है।
बुजुर्गों, अकेले रहने वाले लोगों, लंबे समय से बीमार लोगों, खराब हवा वाले घरों में रहने वालों और जिनके पास पंखे या ठंडक की भरोसेमंद सुविधा नहीं है, उन्हें विशेष सहायता की जरूरत होगी। गर्मी की चेतावनी में केवल अधिकतम तापमान को आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। तापमान के साथ हवा में नमी, रात का तापमान, गर्मी कितने समय तक रहती है और स्थानीय आबादी की स्थिति को भी ध्यान में रखना होगा।
रोजगार और खेती पर भी असर
भारत में बढ़ती गर्मी का असर स्वास्थ्य के साथ-साथ रोजगार और खेती पर भी पड़ सकता है। गंगा के मैदानी इलाकों में गर्मी का सबसे ज्यादा असर खेती के महत्वपूर्ण मौसम से भी जुड़ा है। अगर दिन और रात दोनों समय गर्मी बनी रहती है, तो मजदूरों के लिए सुबह या शाम जैसे अपेक्षाकृत ठंडे समय में काम करना भी मुश्किल हो सकता है।
इससे किसानों और बाहर काम करने वाले दूसरे लोगों की सेहत, आय और काम करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। लंबे समय में इसका असर कृषि उत्पादन और खाद्य सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।
उत्सर्जन कम करना जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारों को गर्मी से बचाव के लिए अभी से तैयारी बढ़ानी होगी। बुजुर्गों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, समय पर चेतावनी, सुरक्षित ठंडे स्थान और बिजली की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी होगा।
हालांकि सबसे महत्वपूर्ण कदम वैश्विक तापमान बढ़ने की गति को कम करना है। अगर ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में बुजुर्गों के लिए लंबे समय तक चलने वाली दिन-रात की गर्मी एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन सकती है।