उष्णकटिबंधीय पीटलैंड में बढ़ रही हैं आग की घटनाएं: अध्ययन

पिछले 2000 वर्षों के आंकड़ों में पीटलैंड आग की घटनाओं में गिरावट के बाद 20वीं सदी में अचानक तेज वृद्धि दर्ज की गई
पीटलैंड में बहुत अधिक कार्बन जमा होता है, आग लगने पर यह कार्बन वातावरण में जाकर जलवायु परिवर्तन को बढ़ाता है।
पीटलैंड में बहुत अधिक कार्बन जमा होता है, आग लगने पर यह कार्बन वातावरण में जाकर जलवायु परिवर्तन को बढ़ाता है।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • पीटलैंड में बहुत अधिक कार्बन जमा होता है, आग लगने पर यह कार्बन वातावरण में जाकर जलवायु परिवर्तन को बढ़ाता है।

  • वैज्ञानिकों ने मिट्टी में मिले पुराने कोयले के टुकड़ों से आग का इतिहास समझा और लंबे समय के बदलावों का अध्ययन किया।

  • इंसानी गतिविधियां जैसे जंगलों की कटाई, खेती और जमीन सुखाना पीटलैंड में आग बढ़ने का सबसे बड़ा कारण बन गई हैं।

  • पीटलैंड की सुरक्षा, सही प्रबंधन से आग की घटनाओं को कम किया जा सकता है व पर्यावरण को बचाया जा सकता है।

उष्णकटिबंधीय पीटलैंड धरती के बहुत खास इलाके होते हैं। ये जगहें गीली मिट्टी से बनी होती हैं और इनके अंदर बहुत बड़ी मात्रा में कार्बन जमा रहता है। यह कार्बन हजारों साल में धीरे-धीरे इकट्ठा होता है। वैज्ञानिक मानते हैं कि दुनिया के सभी जंगलों से भी ज्यादा कार्बन पीटलैंड में छिपा हुआ है।

नई समस्या: तेजी से बढ़ती आग

ग्लोबल चेंज बायोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, पिछले 100 सालों में पीटलैंड में आग लगने की घटनाएं बहुत तेजी से बढ़ी हैं। एक नया अध्ययन बताता है कि यह बढ़ोतरी पिछले 2000 सालों के मुकाबले बहुत ज्यादा है। यह एक गंभीर चिंता का विषय है।

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वैज्ञानिकों ने कैसे किया अध्ययन?

वैज्ञानिकों ने पीटलैंड की मिट्टी में दबे हुए कोयले के छोटे टुकड़ों का अध्ययन किया। ये टुकड़े पुरानी आग के निशान होते हैं। इनकी मदद से उन्होंने लगभग 2000 सालों का इतिहास समझा और जाना कि पहले आग कैसे लगती थी।

अध्ययन से पता चला कि पहले आग का संबंध मौसम से था। जब ज्यादा सूखा पड़ता था, तब आग ज्यादा लगती थी। लेकिन पिछले 1000 सालों में आग की घटनाएं धीरे-धीरे कम हो गई थीं। यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया थी।

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पीटलैंड में बहुत अधिक कार्बन जमा होता है, आग लगने पर यह कार्बन वातावरण में जाकर जलवायु परिवर्तन को बढ़ाता है।

20वीं सदी में अचानक बड़ा बदलाव आया। आग की घटनाएं बहुत तेजी से बढ़ने लगीं। यह बदलाव प्राकृतिक नहीं था, बल्कि इंसानों की गतिविधियों के कारण हुआ।

इंसानी गतिविधियां मुख्य कारण

पीटलैंड में बढ़ती आग का मुख्य कारण इंसानों द्वारा किए गए काम हैं। खासकर दक्षिण-पूर्व एशिया में लोग खेती और विकास के लिए पीटलैंड को सुखा देते हैं। जंगलों को काटा जाता है और जमीन को साफ किया जाता है। जब पीटलैंड सूख जाता है, तो वह बहुत जल्दी आग पकड़ लेता है। यही कारण है कि अब वहां ज्यादा आग लग रही है।

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अलग-अलग क्षेत्रों की स्थिति

दक्षिण-पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया के कुछ हिस्सों में आग ज्यादा बढ़ी है। वहीं अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के दूर-दराज क्षेत्रों में अभी यह समस्या कम है। लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि भविष्य में वहां भी खतरा बढ़ सकता है।

पर्यावरण पर असर

पीटलैंड में आग लगने से बहुत ज्यादा कार्बन हवा में जाता है। इससे ग्लोबल वार्मिंग बढ़ती है। तापमान बढ़ने से सूखा बढ़ता है और फिर आग की घटनाएं और बढ़ जाती हैं। यह एक खतरनाक चक्र बन जाता है।

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पीटलैंड में बहुत अधिक कार्बन जमा होता है, आग लगने पर यह कार्बन वातावरण में जाकर जलवायु परिवर्तन को बढ़ाता है।

क्या है समाधान?

इस समस्या को रोकने के लिए हमें पीटलैंड की रक्षा करनी होगी। हमें इन क्षेत्रों को सुखाने से बचाना चाहिए। जहां नुकसान हो चुका है, वहां सुधार करना जरूरी है। साथ ही, खेती और विकास के लिए सुरक्षित और टिकाऊ तरीके अपनाने चाहिए। सरकार, वैज्ञानिक और आम लोगों को मिलकर काम करना होगा।

पीटलैंड हमारे पर्यावरण के लिए बहुत जरूरी हैं। अगर हम इन्हें नहीं बचाएंगे, तो भविष्य में बड़ी समस्या हो सकती है। इसलिए अभी से सही कदम उठाना बहुत जरूरी है।

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