पृथ्वी का सबसे कठोर हिमयुग था 'स्नोबॉल अर्थ', जिससे सालाना जलवायु चक्रों का चला पता

स्नोबॉल अर्थ वह समय था जब पृथ्वी पूरी तरह बर्फ से ढक गई, जलवायु प्रणाली बेहद कठोर और जीवन के लिए परिस्थितियां अत्यंत कठिन थी
अध्ययन से पता चला कि एल नीनो जैसे आधुनिक जलवायु चक्र अत्यधिक हिमयुग में भी लंबे समय तक
सक्रिय रहे
अध्ययन से पता चला कि एल नीनो जैसे आधुनिक जलवायु चक्र अत्यधिक हिमयुग में भी लंबे समय तक सक्रिय रहे प्रतीकात्मक छवि, फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • स्नोबॉल अर्थ के दौरान पृथ्वी पूरी तरह जमी होने के बावजूद जलवायु में सालाना और दशकीय उतार चढ़ाव मौजूद थे

  • स्कॉटलैंड के गारवेलाक द्वीपों की वार्व चट्टानों ने 2600 वर्षों का विस्तृत जलवायु इतिहास सुरक्षित रूप से दर्ज किया है

  • अध्ययन से पता चला कि एल नीनो जैसे आधुनिक जलवायु चक्र अत्यधिक हिमयुग में भी सक्रिय रहे लंबे समय तक

  • जलवायु मॉडल बताते हैं कि महासागर का केवल पंद्रह प्रतिशत खुला रहना भी मौसमीय गतिविधि के लिए पर्याप्त था साबित

  • यह खोज दिखाती है कि पृथ्वी की जलवायु प्रणाली अत्यंत कठिन परिस्थितियों में भी लचीली बनी रहती है हमेशा सक्षम

आज से करोड़ों साल पहले पृथ्वी पर एक ऐसा समय आया जब पूरा ग्रह बर्फ से ढक गया था। इस अवस्था को वैज्ञानिक “स्नोबॉल अर्थ” कहते हैं। अंतरिक्ष से देखने पर पृथ्वी सचमुच एक सफेद बर्फ के गोले जैसी दिखाई देती होगी। यह समय क्रायोजेनिक काल कहलाता है, जो लगभग 72 करोड़ से 63.5 करोड़ वर्ष पहले था।

इस दौरान पृथ्वी पर भयंकर ठंड थी। बर्फ की मोटी परतें ध्रुवों से लेकर भूमध्य रेखा (इक्वेटर) तक फैल गई थीं। माना जाता था कि इस समय पृथ्वी की जलवायु लगभग पूरी तरह रुक गई थी।

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पुरानी मान्यता: जलवायु पूरी तरह शांत थी

अब तक वैज्ञानिकों का विश्वास था कि स्नोबॉल अर्थ के समय वातावरण और महासागरों के बीच कोई खास संपर्क नहीं था। क्योंकि समुद्र पूरी तरह बर्फ से ढके थे, इसलिए हवा और पानी के बीच होने वाली गतिविधियां रुक गई थीं।

इस कारण यह माना जाता था कि उस समय मौसम में कोई बदलाव नहीं होता था। सालाना या दशकीय जलवायु चक्र नहीं थे, लाखों साल तक जलवायु एक जैसी जमी हुई रही लेकिन अब यह सोच बदल रही है।

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नई खोज: बर्फीली पृथ्वी पर भी बदलता मौसम

यूनिवर्सिटी ऑफ साउथैम्पटन (ब्रिटेन) के वैज्ञानिकों ने एक नई और चौंकाने वाली खोज की है। उन्होंने पाया कि स्नोबॉल अर्थ के दौरान भी जलवायु में उतार-चढ़ाव हो रहा था।

यह अध्ययन अर्थ एंड प्लेनेटरी साइंस लेटर्स पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। इस शोध के अनुसार, उस भयानक हिमयुग में भी सालाना मौसम चक्र कई वर्षों के जलवायु बदलाव, दशकों और सदियों के चक्र मौजूद थे, ठीक वैसे ही जैसे आज देखे जाते हैं।

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स्कॉटलैंड की चट्टानों ने खोला रहस्य

यह महत्वपूर्ण खोज स्कॉटलैंड के पश्चिमी तट पर स्थित गारवेलाक द्वीपों की चट्टानों से हुई। यहां पर पाई गई विशेष प्रकार की परतदार चट्टानों को वार्व कहा जाता है।

ये चट्टानें हर साल बनने वाली पतली परतों से बनी हैं, एक परत एक वर्ष का रिकॉर्ड, पूरी तरह सुरक्षित और साफ अवस्था में हैं। वैज्ञानिकों ने पोर्ट आस्कैग फॉर्मेशन की लगभग 2,600 परतों का अध्ययन किया, यानी 2,600 वर्षों का जलवायु इतिहास।

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कैसे बनीं ये चट्टानी परतें?

अध्ययन से पता चला कि ये परतें बर्फ के नीचे गहरे, शांत पानी में बनीं, सर्दी और गर्मी के मौसम में होने वाले जमाव और पिघलाव से बनीं, बिना लहरों या तूफानों के सुरक्षित रहीं। इसका मतलब है कि ये चट्टानें एक प्राकृतिक आंकड़े रिकॉर्डर की तरह काम करती हैं।

चौंकाने वाले जलवायु चक्र

जब वैज्ञानिकों ने परतों की मोटाई का सांख्यिकीय अध्ययन किया, तो उन्हें आश्चर्यजनक परिणाम मिले। जिनमें कुछ चक्र हर कुछ सालों में दोहराते हैं, कुछ सूर्य की गतिविधि से जुड़े हैं, इनमें से कुछ चक्र आज के एल नीनो जैसे जलवायु पैटर्न से मिलते-जुलते हैं।

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क्या पूरी स्नोबॉल अर्थ ऐसी ही थी?

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह स्थिति शायद पूरे स्नोबॉल अर्थ में नहीं थी। शोधकर्ता के अनुसार, स्नोबॉल अर्थ आम तौर पर बहुत ठंडी और स्थिर थी, यह जलवायु गतिविधि शायद हजारों वर्षों का छोटा दौर थी। यह पूरी अवधि का प्रतिनिधित्व नहीं करती, यानी बर्फीली शांति के बीच-बीच में हलचल के छोटे दौर आए होंगे।

जलवायु मॉडल क्या बताते हैं?

शोधकर्ताओं ने कंप्यूटर आधारित जलवायु मॉडल भी बनाए। इनसे पता चला कि अगर पूरा महासागर बर्फ से ढका हो, तो जलवायु चक्र रुक जाते हैं। लेकिन अगर लगभग 15 फीसदी समुद्र खुला हो, तो मौसम सक्रिय हो सकता है। भूमध्य रेखा के पास थोड़े से खुले पानी से भी हवा और समुद्र की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

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आधुनिक जैसे जलवायु चक्र बन सकते हैं, स्लशबॉल और वाटरबेल्ट पृथ्वी यह खोज इस विचार को मजबूत करती है कि स्नोबॉल अर्थ पूरी तरह जमी हुई नहीं थी। बीच-बीच में स्लशबॉल अर्थ (आंशिक रूप से जमी) या वाटरबेल्ट (खुले पानी की पट्टियां) जैसी अवस्थाएं आई होंगी।

आज और भविष्य के लिए क्या मायने?

यह शोध सिर्फ अतीत की कहानी नहीं है। इससे हमें समझ आता है कि पृथ्वी की जलवायु प्रणाली कितनी मजबूत है, कितनी संवेदनशील भी है। बेहद कठिन परिस्थितियों में भी चल सकती है। यह जानकारी भविष्य के जलवायु संकट और अन्य ग्रहों पर जीवन की संभावना को समझने में भी मदद करती है।

स्नोबॉल अर्थ के समय भी पृथ्वी पूरी तरह मृत नहीं थी। बर्फ के नीचे, चुपचाप, जलवायु की धड़कन चलती रही। स्कॉटलैंड की चट्टानों ने हमें यह अद्भुत कहानी सुनाई है जो एक जमी हुई पृथ्वी, जिसमें फिर भी जीवन की हलचल मौजूद थी।

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