साल 2100 तक रोजाना भारी बारिश में 41 फीसदी तक की बढ़ोतरी के आसार: शोध

उच्च-रिजॉल्यूशन जलवायु मॉडल बताते हैं कि आने वाले दशकों में भारी बारिश की घटनाएं पहले के अनुमान से कहीं अधिक बढ़ सकती हैं।
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फोटो साभार: आईस्टॉकउच्च-रिजॉल्यूशन सीईएसएम-एचआर मॉडल भारी बारिश की भविष्यवाणी में पुराने मॉडलों से कहीं अधिक सटीक पाया गया।
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सारांश
  • उच्च-रिजॉल्यूशन सीईएसएम-एचआर मॉडल भारी बारिश की भविष्यवाणी में पुराने मॉडलों से कहीं अधिक सटीक पाया गया।

  • वर्ष 2100 तक भूमि पर अत्यधिक दैनिक वर्षा में लगभग 41 फीसदी वृद्धि संभव है।

  • सीईएसएम-एचआर मॉडल ऐतिहासिक बारिश के आंकड़ों से बेहतर मेल खाता है और चरम घटनाओं को सही तरह पकड़ता है।

  • दक्षिण-पूर्वी अमेरिका जैसे क्षेत्रों में जोखिम कम-रिजॉल्यूशन मॉडल की तुलना में तीन गुना अधिक दिखाया गया।

  • सूक्ष्म मौसम तंत्र - जैसे एमसीएस और नमी का संकेद्रण को पहचानने की क्षमता भारी बारिश की सटीक भविष्यवाणी में मदद करती है।

पिछले कुछ दशकों में वैज्ञानिक पृथ्वी के बदलते जलवायु पैटर्न को समझने और भविष्य का अनुमान लगाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। हालांकि अब तक उपयोग किए गए अधिकांश जलवायु मॉडल अत्यधिक बारिश जैसी चरम मौसम घटनाओं को सटीक रूप से दर्शाने में संघर्ष करते रहे हैं।

इसका एक बड़ा कारण यह है कि पुराने या मानक मॉडल अपेक्षाकृत मोटे या कम-रिजॉल्यूशन वाले रहे हैं, जिनमें वातावरण को बड़ी-बड़ी ग्रिडों में विभाजित करके अध्ययन किया जाता है। इस कारण कई अहम सूक्ष्म मौसम प्रक्रियाएं मॉडल में ठीक से दिखाई नहीं देतीं।

लेकिन हाल ही में नेचर जियोसाइंस पत्रिका में प्रकाशित एक नए अध्ययन ने इस चुनौती को नए स्तर पर समझने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शोधकर्ताओं ने एक अधिक सटीक, उच्च-रिजॉल्यूशन मॉडल विकसित किया है, जो भारी बारिश को प्रभावित करने वाली छोटी-छोटी मौसम प्रणालियों को बेहतर तरीके से पकड़ सकता है।

कम-रिजॉल्यूशन मॉडल की सीमाएं

सीएमआईपी5 और सीएमआईपी6 जैसे पारंपरिक जलवायु मॉडल वातावरण को लगभग 100 किलोमीटर की ग्रिड में विभाजित करके अध्ययन करते हैं। यह तकनीक सिमुलेशन को कम्प्यूटर पर तेज और कम लागत वाला बनाती है, लेकिन इसमें कई बड़े समझौते भी हैं। उदाहरण के लिए, गहरे बादल, आंधी-तूफान, और मेसोस्केल कन्वेक्टिव सिस्टम (एमसीएस) जैसी घटनाएं इतनी छोटी और जटिल होती हैं कि 100 किमी के पैमाने पर इन्हें ठीक से समझना मुश्किल होता है।

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इन्हीं सीमाओं के कारण भारी बारिश की भविष्यवाणी अक्सर कमजोर साबित होती है।

उच्च-रिजॉल्यूशन सीईएसएम-एचआर मॉडल क्या दिखाता है?

नए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने कम्युनिटी अर्थ सिस्टम मॉडल (सीईएसएम) के उच्च-रिजॉल्यूशन संस्करण सीईएसएम-एचआर का उपयोग किया। यह मॉडल वातावरण को 10 से 25 किमी की बहुत छोटी ग्रिडों में बांटकर विश्लेषण करता है। इसका कम-रिजॉल्यूशन संस्करण सीईएसएम-एलआर लगभग 100 किमी की ग्रिड इस्तेमाल करता है। इस छोटे और सूक्ष्म विभाजन से मॉडल कई ऐसी घटनाएं पकड़ सकता है जो पहले संभव नहीं थीं।

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शोधकर्ताओं ने 1920 से 2100 तक की अवधि के लिए दोनों मॉडलों के परिणामों की तुलना की। निष्कर्ष चौंकाने वाले हैं:

1. भारी बारिश में बड़ा इजाफा

उच्च-रिजॉल्यूशन मॉडल दिखाता है कि आने वाले दशकों में अत्यधिक बारिश में पहले सोचे मुकाबले कहीं ज्यादा वृद्धि हो सकती है।

सीईएसएम-एचआर के अनुसार, साल 2100 तक भूमि पर रोजमर्रा भारी बारिश में लगभग 41 फीसदी तक बढ़ सकती है

जबकि सीईएसएम-एलआर इसे सिर्फ 24.8 फीसदी की वृद्धि दिखाता था।

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2. सालाना अधिकतम रोजना बारिश

सीईएसएम-एचआर : 16.6 मिमी प्रति दिन की वृद्धि

सीईएसएम-एलआर: 6.4 मिमी प्रति दिन की वृद्धि

यह बताता है कि मोटे मॉडल कई गुना कम वृद्धि दर्शा रहे थे।

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क्षेत्रीय अंतर: अमेरिका का उदाहरण

अध्ययन में पाया गया कि क्षेत्रीय स्तर पर अंतर और भी गंभीर हैं। उदाहरण के लिए, अमेरिका में:

  • पश्चिमी तट पर दोनों मॉडल समान वृद्धि दिखाते हैं।

  • परंतु दक्षिण-पूर्वी अमेरिका में सीईएसएम-एचआर लगभग 12 मिमी प्रति दिन की वृद्धि दर्शाता है, जबकि सीईएसएम-एलआर सिर्फ 4 मिमी प्रति दिन।

  • यानी उच्च-रिजॉल्यूशन मॉडल जोखिम को लगभग तीन गुना अधिक दिखाता है।

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इतिहास से बेहतर मेल

शोधकर्ताओं ने यह भी जांचा कि दोनों मॉडल पिछले दशकों के वास्तविक बारिश के आंकड़ों से कितना मेल खाते हैं। उन्होंने आर99पी नामक एक मापदंड इस्तेमाल किया, जो उन दिनों की कुल वर्षा को दर्शाता है जब वर्षा 99वें पर्सेंटाइल से ऊपर जाती है।

  • वास्तविक औसत: 38.3 मिमी प्रति दिन

  • सीईएसएम-एचआर: 41.3 मिमी प्रति दिन - बहुत नजदीक, हल्का-सा अधिक अनुमान

  • सीईएसएम-एलआर : 28.1 मिमी प्रति दिन - काफी कम अनुमान

  • इससे स्पष्ट होता है कि उच्च-रिजॉल्यूशन मॉडल ऐतिहासिक भारी बारिश को भी बेहतर तरीके से पकड़ता है।

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बेहतर प्रदर्शन क्यों?

उच्च-रिजॉल्यूशन मॉडल बेहतर इसलिए है क्योंकि वह उन मौसम तंत्रों को पकड़ लेता है जो भारी बारिश को उत्पन्न करते हैं, जैसे:

  • मेसोस्केल कन्वेक्टिव सिस्टम (एमसीएस)

  • स्थानीय नमी का संकेद्रण

  • छोटे पैमाने पर वायुमंडलीय परिसंचरण

ये सभी घटनाएं गर्म होती दुनिया में ज्यादा सक्रिय होने लगी हैं, और कम-रिजॉल्यूशन मॉडल इन्हें अक्सर अनदेखा कर देते हैं।

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भविष्य के लिए सीख

शोधकर्ताओं का कहना है कि 10 से 25 किमी रिजॉल्यूशन वाले वैश्विक मॉडल भविष्यवाणी में बड़ा सुधार ला सकते हैं। इससे नीतियों, आपदा प्रबंधन और जल संसाधन योजना को अधिक भरोसेमंद आंकड़ा मिल सकता है।

अभी भी और अधिक मॉडलों और मल्टी-मॉडल तुलना की जरूरत है, ताकि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितताओं को कम किया जा सके।

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अध्ययन से साफ पता चलता है कि भारी बारिश की घटनाएं भविष्य में पहले की अपेक्षा कहीं अधिक गंभीर हो सकती हैं। उच्च-रिजॉल्यूशन मॉडल न केवल इन घटनाओं की ऐतिहासिक समझ में सुधार लाते हैं, बल्कि भविष्य की भविष्यवाणियों को भी अधिक वास्तविकता के करीब ले जाते हैं। इस तरह के मॉडल हमें तैयार रहने, जान-माल की हानि कम करने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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