भूटान में जलवायु परिवर्तन और गांव खाली होने की बढ़ती समस्या: रिपोर्ट का खुलासा

नए शोध रिपोर्ट में कहा गया है कि भूटान में जलवायु परिवर्तन से खेती प्रभावित, गांव खाली हो रहे हैं, लोग शहरों और विदेशों की ओर पलायन कर रहे हैं
नए शोध में पाया गया कि भूटान के 205 में से 138 क्षेत्रों में जनसंख्या घट रही है और गांव खाली हो रहे हैं।
नए शोध में पाया गया कि भूटान के 205 में से 138 क्षेत्रों में जनसंख्या घट रही है और गांव खाली हो रहे हैं।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • भूटान में जलवायु परिवर्तन से खेती प्रभावित हो रही है, बारिश और तापमान में बदलाव से ग्रामीण जीवन कठिन होता जा रहा है।

  • नए शोध में पाया गया कि भूटान के 205 में से 138 क्षेत्रों में जनसंख्या घट रही है और गांव खाली हो रहे हैं।

  • युवाओं का तेजी से शहरों और विदेशों की ओर पलायन बढ़ रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में श्रम की भारी कमी हो गई है।

  • बदलते मौसम, भूस्खलन और ग्लेशियर पिघलने से प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ा है, जिससे खेती और जीवन दोनों प्रभावित हैं।

  • भूटान सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जल संरक्षण पर काम कर रही है ताकि पलायन रोका जा सके और टिकाऊ विकास सुनिश्चित हो।

हिमालयी देश भूटान आज दो बड़ी समस्याओं का सामना कर रहा है, जो हैं जलवायु परिवर्तन और ग्रामीण क्षेत्रों से लोगों का तेजी से पलायन होना। हाल ही में आई एक नई शोध रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि गांवों से लोग सिर्फ रोजगार के लिए ही नहीं, बल्कि बदलते मौसम और खेती की मुश्किल हालात के कारण भी शहरों और विदेशों की ओर जा रहे हैं।

यह अध्ययन रॉयल थिम्फू कॉलेज के वार्षिक शोध पत्र में प्रकाशित हुआ है, जिसमें कई विशेषज्ञों ने भाग लिया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि जलवायु परिवर्तन सीधे तौर पर हमेशा पलायन का कारण नहीं बनता, लेकिन यह ग्रामीण जीवन को कठिन बनाकर लोगों को मजबूर करता है कि वे गांव छोड़ दें।

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खेती पर बढ़ता दबाव

भूटान एक पहाड़ी देश है, जहां अधिकतर लोग खेती पर निर्भर हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में मौसम बहुत अनिश्चित हो गया है। कभी बहुत अधिक बारिश होती है तो कभी लंबे समय तक सूखा पड़ जाता है। इससे खेती करना मुश्किल हो गया है।

शोध में बताया गया है कि बढ़ता तापमान, बारिश के बदलते पैटर्न और फसलों में कीटों की बढ़ोतरी ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई जगहों पर फसलें खराब हो रही हैं और पानी की उपलब्धता भी बदल रही है। इसके कारण ग्रामीण लोग खेती छोड़ने पर मजबूर हो रहे हैं।

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गांवों से शहरों की ओर बढ़ता पलायन

रिपोर्ट के अनुसार भूटान के 205 क्षेत्रों में से 138 क्षेत्रों में जनसंख्या में कमी दर्ज की गई है। खासकर पूर्वी भूटान से लोग पश्चिमी हिस्सों के शहरों की ओर जा रहे हैं।

इस बदलाव से गांवों में काम करने वाले युवा कम हो रहे हैं। खेती करने के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं और कई पारंपरिक खेती प्रणालियां धीरे-धीरे खत्म हो रही हैं। गांवों में बुजुर्ग लोगों की संख्या बढ़ रही है, जिससे सामाजिक ढांचा कमजोर हो रहा है।

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विदेशों की ओर बढ़ता रुझान

केवल देश के अंदर ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी भूटानी लोगों की संख्या बढ़ रही है। लगभग 67,000 लोग ऑस्ट्रेलिया में रह रहे हैं। यह संख्या एक छोटे देश के लिए काफी बड़ी मानी जाती है, क्योंकि भूटान की कुल जनसंख्या आठ लाख से थोड़ी ही अधिक है।

विदेश जाने वाले युवा अक्सर बेहतर शिक्षा और नौकरी की तलाश में जाते हैं। इसे “ब्रेन ड्रेन” यानी प्रतिभा का पलायन भी कहा जाता है।

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शोध पत्र में रॉयल यूनिवर्सिटी ऑफ भूटान के शोधकर्ता के हवाले से कहा गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि और जीवन दोनों ही कठिन होते जा रहे हैं, इसलिए लोग बेहतर अवसरों की तलाश में बाहर जा रहे हैं।

जलवायु और जीवन पर असर

शोध में यह भी बताया गया है कि जलवायु परिवर्तन के कारण भूटान में बाढ़, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ रहा है। पहाड़ी इलाकों में यह खतरे और भी गंभीर हो जाते हैं क्योंकि यहां जमीन अस्थिर होती है।

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इसके साथ ही ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे पानी के स्रोतों पर असर पड़ रहा है। इससे आने वाले समय में स्थिति और कठिन हो सकती है। शोध पत्र में कहा गया है कि ग्रामीण घरों का खाली होना जलवायु परिवर्तन का सबसे स्पष्ट और चिंताजनक संकेत है।

सामाजिक बदलाव और चुनौतियां

गांवों से लोगों के जाने का असर केवल खेती तक सीमित नहीं है। इससे परिवारों और समाज के रिश्तों पर भी असर पड़ रहा है। जब युवा बाहर चले जाते हैं तो बुजुर्गों की देखभाल कम हो जाती है। कई गांव धीरे-धीरे खाली होने लगते हैं। इससे एक नई समस्या पैदा हो रही है, ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन टिकाऊ नहीं रह जाता। कई घर बंद पड़े हैं और जमीनें खाली हो रही हैं।

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सरकार और भविष्य की दिशा

भूटान सरकार इस स्थिति को गंभीरता से देख रही है। सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, जल संरक्षण बढ़ाने और पर्यावरण आधारित समाधान अपनाने पर काम कर रही है।

भूटान दुनिया का एक ऐसा देश भी है जो “कार्बन नेगेटिव” माना जाता है, यानी यह जितना कार्बन पैदा करता है, उससे अधिक को वातावरण से कम करता है। इसके बावजूद यह देश जलवायु परिवर्तन से काफी प्रभावित हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, खेती और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत नहीं किया गया, तो पलायन और तेज हो सकता है।

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नई शोध रिपोर्ट यह दिखाती है कि जलवायु परिवर्तन और आर्थिक अवसरों की कमी मिलकर भूटान के ग्रामीण क्षेत्रों को खाली कर रहे हैं। यह केवल एक पर्यावरणीय समस्या नहीं है, बल्कि एक सामाजिक और आर्थिक चुनौती भी है, जिसका समाधान समय रहते करना जरूरी है।

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