डायसन स्वॉर्म तारे की रोशनी रोककर ऊर्जा को इन्फ्रारेड गर्मी में बदलता है, जिससे असामान्य संकेत दिखाई देते हैं। फोटो साभार: आईस्टॉक
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

डायसन स्वॉर्म की तलाश में जुटे वैज्ञानिक, अंतरिक्ष में मिल सकते हैं एलियन सभ्यता के संकेत

एलियन सभ्यता की खोज में नया सुराग, वैज्ञानिकों को ठंडे इन्फ्रारेड संकेतों वाले तारों के आसपास डायसन स्वॉर्म जैसी रहस्यमयी संरचनाओं की तलाश से उम्मीद बढ़ी

Dayanidhi

  • वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि डायसन स्वॉर्म जैसी संरचनाएं अंतरिक्ष में उन्नत एलियन सभ्यता के सबसे बड़े संकेत साबित हो सकती हैं।

  • रेड ड्वार्फ और व्हाइट ड्वार्फ तारों के आसपास डायसन स्वॉर्म बनाना आसान माना जा रहा है, नई रिसर्च में दावा किया गया।

  • डायसन स्वॉर्म तारे की रोशनी रोककर ऊर्जा को इन्फ्रारेड गर्मी में बदलता है, जिससे असामान्य संकेत दिखाई देते हैं।

  • जेम्स वेब और वाइज टेलीस्कोप ऐसे ठंडे लेकिन चमकदार इन्फ्रारेड स्रोतों की खोज में लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

  • वैज्ञानिकों को पांच संभावित डायसन स्वॉर्म उम्मीदवार मिले हैं, जिनकी अब गहराई से जांच और निगरानी की जा रही है।

अंतरिक्ष में एलियन जीवन की खोज लंबे समय से वैज्ञानिकों के लिए सबसे बड़ा रहस्य बनी हुई है। अब वैज्ञानिकों का मानना है कि वे “डायसन स्वॉर्म” नाम की विशाल संरचनाओं की मदद से उन्नत एलियन सभ्यताओं का पता लगा सकते हैं। हाल ही में आई एक नई रिसर्च में बताया गया है कि कुछ खास प्रकार के तारों के आसपास असामान्य इन्फ्रारेड संकेत दिखाई दें तो वे एलियन तकनीक का सबूत हो सकते हैं।

क्या है डायसन स्वॉर्म

साल 1960 में प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी फ्रीमैन डायसन ने यह विचार दिया था। उनके अनुसार यदि कोई सभ्यता तकनीक में इंसानों से बहुत आगे निकल जाए, तो वह अपने तारे के चारों ओर ऊर्जा इकट्ठा करने के लिए विशाल ढांचा बना सकती है। शुरुआत में इसे “डायसन स्फीयर” कहा गया था, लेकिन बाद में वैज्ञानिकों ने माना कि एक पूरा ठोस गोला बनाना लगभग असंभव है। इसलिए अब “डायसन स्वॉर्म” शब्द ज्यादा इस्तेमाल होता है।

डायसन स्वॉर्म में लाखों या करोड़ों छोटे-छोटे ऊर्जा संग्राहक तारे के चारों ओर घूमते रहते हैं। इनका काम तारे की रोशनी और गर्मी को पकड़कर ऊर्जा में बदलना होता है। ऐसी व्यवस्था किसी बेहद उन्नत सभ्यता की पहचान मानी जा सकती है।

छोटे तारे क्यों हैं बेहतर लक्ष्य

नई रिसर्च के अनुसार, लाल बौने तारे यानी रेड ड्वार्फ ऐसे ढांचे खोजने के लिए सबसे अच्छे लक्ष्य हो सकते हैं। ये तारे हमारे सूर्य से छोटे होते हैं और बहुत धीरे-धीरे अपना ईंधन खर्च करते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि कुछ रेड ड्वार्फ तारे खरबों साल तक जीवित रह सकते हैं।

क्योंकि ये तारे छोटे होते हैं, इसलिए इनके आसपास डायसन स्वॉर्म बनाना आसान हो सकता है। ऐसे ढांचे को तारे के काफी पास स्थापित किया जा सकता है, जिससे निर्माण में कम सामग्री लगेगी।

अरक्षिव (arXiv) नामक पत्रिका में प्रकाशित शोध में सफेद बौने तारों यानी व्हाइट ड्वार्फ का भी जिक्र किया गया है। ये ऐसे तारे होते हैं जो अपने जीवन के अंतिम चरण में बहुत छोटे और घने बन जाते हैं। इनके आसपास भी ऊर्जा इकट्ठा करने वाली संरचनाएं बनाना अपेक्षाकृत आसान माना जा रहा है।

कैसे दिखाई देगा डायसन स्वॉर्म

वैज्ञानिक तारों को समझने के लिए हर्ट्जस्प्रंग-रसेल डायग्राम नामक प्रणाली का उपयोग करते हैं। इसमें तारों को उनकी चमक और तापमान के आधार पर अलग-अलग जगह पर रखा जाता है। लेकिन यदि किसी तारे के चारों ओर डायसन स्वॉर्म हो, तो उसकी पहचान बदल जाएगी।

ऐसी संरचना तारे की सामान्य रोशनी को रोक लेगी। इसके बाद वह ऊर्जा गर्मी के रूप में बाहर निकलेगी। यानी तारे की दृश्य रोशनी कम हो जाएगी और इन्फ्रारेड विकिरण बढ़ जाएगा।

वैज्ञानिकों के अनुसार, सामान्य रेड ड्वार्फ तारों का तापमान लगभग 3000 केल्विन होता है, जबकि डायसन स्वॉर्म से निकलने वाली गर्मी केवल 50 केल्विन तक हो सकती है। इतनी ठंडी लेकिन चमकदार वस्तु अंतरिक्ष में बेहद असामान्य मानी जाएगी।

धूल रहित संकेत बन सकते हैं सुराग

वैज्ञानिकों का कहना है कि डायसन स्वॉर्म की एक और खास पहचान यह हो सकती है कि उसके आसपास धूल न हो। सामान्य तारों के आसपास अक्सर गैस और धूल के बादल पाए जाते हैं, जिनसे विशेष प्रकार के स्पेक्ट्रल संकेत मिलते हैं।

लेकिन यदि कोई कृत्रिम संरचना मौजूद हो, तो वह काफी “साफ” दिखाई दे सकती है। इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि वह प्राकृतिक वस्तु है या किसी उन्नत तकनीक का परिणाम।

अजीब रोशनी से भी मिल सकता है संकेत

यदि डायसन स्वॉर्म पूरी तरह बंद न हो और उसमें जगह-जगह खाली हिस्से हों, तो तारे की रोशनी अनियमित तरीके से बदलती दिखाई दे सकती है। वैज्ञानिक इसे “असामान्य लाइट कर्व” कहते हैं।

ऐसी रोशनी प्राकृतिक ग्रहों या तारों जैसी नहीं होगी। यदि किसी तारे की चमक बार-बार अजीब तरीके से बदलती मिले, तो वह वैज्ञानिकों के लिए जांच का विषय बन सकता है।

पहले से मिल चुके हैं कुछ उम्मीदवार

इन्फ्रारेड संकेत खोजने में जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप और वाइज जैसे टेलीस्कोप अहम भूमिका निभा रहे हैं। पिछले साल प्रोजेक्ट हेफेस्टोस नाम की एक रिसर्च में लगभग 50 लाख तारों का अध्ययन किया गया था।

इस दौरान सात ऐसे तारे मिले जिनमें डायसन स्वॉर्म जैसे संकेत दिखाई दिए। बाद में एक तारे को सूची से हटा दिया गया क्योंकि उसके पीछे एक विशाल ब्लैक होल मौजूद था। हालांकि अब भी कई संभावित उम्मीदवार वैज्ञानिकों की निगरानी में हैं।

भविष्य में मिल सकता है बड़ा सबूत

वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी तक एलियन सभ्यता का कोई पक्का प्रमाण नहीं मिला है। फिर भी डायसन स्वॉर्म की खोज महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यह पूरी तरह विज्ञान और भौतिकी के नियमों पर आधारित है।

यदि भविष्य में किसी तारे से असामान्य इन्फ्रारेड संकेत, धूल की कमी और अजीब रोशनी एक साथ मिलती है, तो यह मानव इतिहास की सबसे बड़ी खोज साबित हो सकती है। इससे यह सवाल भी बदल जाएगा कि “क्या हम ब्रह्मांड में अकेले हैं?”