नई पीढ़ी में जैविक उम्र बढ़ने के संकेत अधिक मिले, जिससे कम उम्र में कैंसर का खतरा बढ़ने की आशंका सामने आई।
ब्रिटेन और अमेरिका के बड़े अध्ययनों में युवा पीढ़ी का शरीर समान उम्र में पिछली पीढ़ियों से जैविक रूप से अधिक बूढ़ा मिला।
तेजी से जैविक उम्र बढ़ने वाले लोगों में 55 वर्ष से पहले होने वाले ठोस कैंसर का खतरा करीब 8 प्रतिशत अधिक पाया गया।
प्रतिरक्षा प्रणाली की अधिक उम्र का संबंध फेफड़ों के कैंसर से, जबकि वसा ऊतक की उम्र का संबंध आंत के कैंसर से मिला।
वैज्ञानिकों का मानना है कि जीवनशैली और पर्यावरणीय बदलाव जैविक उम्र बढ़ाने में भूमिका निभा सकते हैं, लेकिन कारण अभी स्पष्ट नहीं हैं।
कैंसर को लंबे समय से बढ़ती उम्र से जुड़ी बीमारी माना जाता है। उम्र बढ़ने के साथ शरीर की कोशिकाओं में धीरे-धीरे नुकसान होता रहता है। इससे कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। लेकिन अब दुनिया के कई हिस्सों में युवा लोगों में कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। खासकर 55 साल या उससे कम उम्र में होने वाले कैंसर ने वैज्ञानिकों का ध्यान खींचा है।
अब शोधकर्ता यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या नई पीढ़ी के लोगों का शरीर पिछली पीढ़ियों की तुलना में तेजी से बूढ़ा हो रहा है। अमेरिका की वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं के एक अध्ययन में इस संभावना के समर्थन में महत्वपूर्ण संकेत मिले हैं।
जैविक उम्र और असली उम्र में अंतर
किसी व्यक्ति की उम्र कितनी है, यह उसके जन्म से बीते वर्षों के आधार पर पता चलता है। इसे कालानुक्रमिक उम्र कहा जाता है। लेकिन शरीर की अंदरूनी स्थिति हमेशा उसकी वास्तविक उम्र जैसी नहीं होती।
इसे समझने के लिए वैज्ञानिक ‘जैविक उम्र’ का इस्तेमाल करते हैं। जैविक उम्र से पता लगाने की कोशिश की जाती है कि शरीर अंदर से कितना बूढ़ा हो चुका है। इसके लिए खून में मौजूद अलग-अलग रसायनों, प्रोटीन, मेटाबॉलिज्म और शरीर के अंगों में होने वाले बदलावों का अध्ययन किया जाता है।
उदाहरण के लिए, 40 साल के दो लोगों की वास्तविक उम्र समान हो सकती है, लेकिन उनके शरीर की जैविक उम्र अलग-अलग हो सकती है। एक व्यक्ति का शरीर स्वस्थ और कम उम्र का दिखाई दे सकता है, जबकि दूसरे का शरीर जैविक रूप से अधिक उम्र का हो सकता है।
नई पीढ़ी में ज्यादा दिखे उम्र बढ़ने के संकेत
शोधकर्ताओं ने ब्रिटेन के यूके बायोबैंक में शामिल 1.54 लाख से अधिक युवाओं के आंकड़ों का अध्ययन किया। इसके साथ ही अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ के ‘ऑल ऑफ अस’ कार्यक्रम के 10 हजार से अधिक लोगों के आंकड़ों को भी देखा गया।
अध्ययन में अलग-अलग समय में जन्मे लोगों की जैविक उम्र की तुलना की गई। ब्रिटेन में 1965 से 1974 के बीच जन्मे लोगों में जैविक उम्र बढ़ने के संकेत 1950 से 1954 के बीच जन्मे लोगों की तुलना में अधिक पाए गए।
अमेरिका के आंकड़ों में यह अंतर और बड़ा था। 1990 से 1999 के बीच जन्मे लोगों में जैविक उम्र बढ़ने का स्तर 1965 से 1969 के बीच जन्मे लोगों की तुलना में काफी अधिक पाया गया।
शोधकर्ताओं का कहना है कि इसका अर्थ यह नहीं है कि हर युवा व्यक्ति तेजी से बूढ़ा हो रहा है। यह बड़े समूहों के औसत आंकड़ों में दिखाई देने वाला अंतर है।
तेजी से बूढ़ा होता शरीर और कैंसर का खतरा
इसके बाद वैज्ञानिकों ने यह पता लगाने की कोशिश की कि जैविक उम्र बढ़ने और कम उम्र में कैंसर होने के बीच कोई संबंध है या नहीं।
अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों में शरीर के तेजी से बूढ़ा होने के संकेत अधिक थे, उनमें कम उम्र में होने वाले ठोस कैंसर का खतरा करीब 8 प्रतिशत अधिक था। जिन लोगों में जैविक उम्र बढ़ने के संकेत सबसे ज्यादा थे, उनमें यह खतरा सबसे कम संकेत वाले लोगों की तुलना में करीब 15 प्रतिशत अधिक पाया गया।
शोधकर्ताओं ने शरीर के अलग-अलग हिस्सों की जैविक उम्र का भी अध्ययन किया। इसमें कुछ खास संबंध सामने आए। अधिक उम्र वाली दिखाई देने वाली प्रतिरक्षा प्रणाली का संबंध कम उम्र में फेफड़ों के कैंसर के अधिक खतरे से पाया गया। वहीं, वसा ऊतक यानी शरीर की चर्बी के तेजी से बूढ़ा होने का संबंध कम उम्र में आंत के कैंसर से मिला।
आधुनिक जीवनशैली पर भी नजर
वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी यह साफ नहीं है कि नई पीढ़ी में जैविक उम्र बढ़ने के संकेत क्यों ज्यादा दिखाई दे रहे हैं। मोटापा, खराब खान-पान, शराब का सेवन, कम शारीरिक गतिविधि और शरीर के मेटाबॉलिज्म में गड़बड़ी जैसे कई कारण कैंसर के खतरे से जुड़े हैं।
लेकिन इनमें से कोई एक कारण कम उम्र में कैंसर के बढ़ते मामलों को पूरी तरह नहीं समझा सकता। इसलिए शोधकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि आधुनिक जीवनशैली, पर्यावरण और सामाजिक बदलाव शरीर पर लंबे समय में किस तरह असर डाल रहे हैं।
भविष्य में पहले हो सकती है पहचान
शोधकर्ताओं का मानना है कि अगर जैविक उम्र और कैंसर के बीच संबंध को बेहतर तरीके से समझा गया, तो भविष्य में कम उम्र में कैंसर के ज्यादा खतरे वाले लोगों की पहचान की जा सकती है। इससे ऐसे लोगों के लिए रोकथाम और जांच पहले शुरू करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, वैज्ञानिकों ने साफ किया है कि यह अध्ययन यह साबित नहीं करता कि तेजी से जैविक उम्र बढ़ना सीधे कैंसर का कारण बनता है। फिलहाल दोनों के बीच संबंध पाया गया है। इस संबंध को समझने के लिए अभी और शोध की जरूरत है।
फिर भी यह अध्ययन एक महत्वपूर्ण सवाल सामने लाता है। क्या आधुनिक जीवन और बदलता पर्यावरण नई पीढ़ी के शरीर पर ऐसा असर डाल रहे हैं, जिससे वह पहले की पीढ़ियों की तुलना में जल्दी बूढ़ा हो रहा है? इस सवाल का जवाब भविष्य में कम उम्र में बढ़ते कैंसर को समझने और उसकी रोकथाम के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।