संरक्षित क्षेत्र आग का खतरा कम करते हैं, लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण अब वे भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। फोटो साभार: आईस्टॉक
जंगल

पिछले 23 सालों में 40 लाख हेक्टेयर से अधिक संरक्षित उष्णकटिबंधीय जंगल आग में नष्ट हुए

संरक्षित उष्णकटिबंधीय जंगलों में आग का बढ़ता खतरा, 2001 से 2024 तक 40 लाख हेक्टेयर जंगल नष्ट, ब्राजील सबसे अधिक प्रभावित, संरक्षण के बावजूद चिंता बढ़ी

Dayanidhi

  • 2001 से 2024 तक संरक्षित उष्णकटिबंधीय जंगलों का 40 लाख हेक्टेयर से अधिक हिस्सा जंगल की आग में नष्ट हुआ।

  • 2016 के बाद संरक्षित जंगलों में आग से होने वाला वार्षिक नुकसान पहले की तुलना में करीब नौ गुना बढ़ा।

  • ब्राजील में सबसे ज्यादा नुकसान दर्ज हुआ, जबकि बोलीविया और इंडोनेशिया भी जंगलों की बढ़ती आग से प्रभावित रहे।

  • संरक्षित क्षेत्र आग का खतरा कम करते हैं, लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण अब वे भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं।

  • विशेषज्ञों ने जंगल बचाने के लिए संरक्षण के साथ आग रोकने, स्थानीय भागीदारी और जलवायु परिवर्तन पर नियंत्रण को जरूरी बताया।

दुनिया के उष्णकटिबंधीय इलाकों में जंगलों की सुरक्षा को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। एक नए अध्ययन के अनुसार, साल 2001 से 2024 के बीच 40 लाख हेक्टेयर से अधिक संरक्षित उष्णकटिबंधीय जंगल, जंगल की आग में नष्ट हो गए। यह क्षेत्रफल करीब 99 लाख एकड़ के बराबर है और वेल्स के आकार से लगभग दोगुना है।

यूनिवर्सिटी ऑफ शेफील्ड के शोधकर्ताओं ने यह अध्ययन किया है। यह पहली बार है जब दुनिया भर के संरक्षित उष्णकटिबंधीय जंगलों में आग से हुए नुकसान और संरक्षित क्षेत्र होने के असर का इतने बड़े स्तर पर अध्ययन किया गया है। अध्ययन के नतीजे जर्नल ग्लोबल चेंज बायोलॉजी में प्रकाशित हुए हैं।

साल 2016 के बाद तेजी से बढ़ी आग

शोधकर्ताओं ने साल 2001 से 2024 तक जंगलों में लगी आग और जंगलों के नुकसान से जुड़े उपग्रह आंकड़ों का अध्ययन किया। इसके साथ ही उन्होंने दुनिया के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में मौजूद 9,700 से अधिक संरक्षित क्षेत्रों के नक्शों का भी इस्तेमाल किया।

अध्ययन में पाया गया कि साल 2016 के बाद संरक्षित जंगलों में आग से होने वाला नुकसान अचानक बहुत बढ़ गया। 2016 के बाद हर साल आग से प्रभावित क्षेत्र पहले के वर्षों की तुलना में करीब नौ गुना अधिक रहा। सबसे चिंताजनक बात यह है कि केवल वर्ष 2024 में ही पिछले 24 वर्षों में हुए कुल नुकसान का लगभग एक-तिहाई हिस्सा दर्ज किया गया।

ब्राजील में सबसे ज्यादा नुकसान

आग से नष्ट हुए संरक्षित उष्णकटिबंधीय जंगलों का करीब 89 प्रतिशत हिस्सा उष्णकटिबंधीय अमेरिका में है। इनमें ब्राजील सबसे ज्यादा प्रभावित देश रहा। दुनिया भर में हुए कुल नुकसान का लगभग दो-तिहाई हिस्सा अकेले ब्राजील में दर्ज किया गया। इसके अलावा बोलीविया और इंडोनेशिया में भी जंगलों को भारी नुकसान हुआ।

शोधकर्ताओं के अनुसार, यह स्थिति केवल जंगलों के लिए ही खतरा नहीं है। उष्णकटिबंधीय जंगल बड़ी मात्रा में कार्बन को अपने अंदर रखते हैं। जब ये जंगल आग में जलते हैं तो कार्बन वातावरण में पहुंचता है और जलवायु परिवर्तन की समस्या और गंभीर हो सकती है।

संरक्षित क्षेत्र फिर भी देते हैं सुरक्षा

अध्ययन का एक सकारात्मक पहलू भी सामने आया है। शोधकर्ताओं ने संरक्षित और गैर-संरक्षित जंगलों की तुलना की। उन्होंने ऐसे जंगलों को चुना जो तापमान, बारिश, आबादी और आसपास के जंगल जैसे कई मामलों में एक-दूसरे से मिलते-जुलते थे।

इस तुलना से पता चला कि संरक्षित क्षेत्रों में आग लगने का खतरा आमतौर पर कम रहता है। अमेरिका के करीब आधे अध्ययन किए गए क्षेत्रों में संरक्षित जंगलों के जलने की संभावना समान परिस्थितियों वाले गैर-संरक्षित जंगलों से कम थी। अफ्रीका में यह अंतर और ज्यादा रहा, जहां करीब 70 प्रतिशत क्षेत्रों में संरक्षित जंगलों को फायदा मिला।

इससे साफ है कि संरक्षित क्षेत्र बनाना आज भी जंगलों को बचाने का एक प्रभावी तरीका है।

लेकिन संरक्षण अकेला काफी नहीं

हालांकि, शोधकर्ताओं ने एक गंभीर चिंता भी जताई है। समय के साथ संरक्षित और गैर-संरक्षित दोनों जंगलों में आग की घटनाएं लगभग एक जैसी तेजी से बढ़ रही हैं। इसका मतलब है कि संरक्षित क्षेत्र आग से पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं।

शोध में शोधकर्ता के हवाले से कहा गया कि संरक्षित क्षेत्र आग के खतरे को कम करते हैं, लेकिन जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव से उन्हें पूरी सुरक्षा नहीं मिल सकती। उनके अनुसार, उष्णकटिबंधीय जंगलों की ज्यादातर आग इंसानी गतिविधियों से जुड़ी होती है। इसलिए स्थानीय समुदायों और जमीन के मालिकों के साथ मिलकर आग को रोकना जरूरी है।

अब आग की रोकथाम पर जोर जरूरी

शोधकर्ताओं का कहना है कि भविष्य की वन संरक्षण योजनाओं में जंगल की आग को भी प्रमुखता से शामिल करना होगा। जलवायु परिवर्तन, बढ़ता तापमान और मौसम में बदलाव जंगलों को अधिक सूखा और आग के लिए संवेदनशील बना रहे हैं। अल नीनो जैसी मौसमी घटनाएं भी कई क्षेत्रों में आग का खतरा बढ़ा सकती हैं।

अध्ययन में इस्तेमाल किए गए 30 मीटर तक की बारीकी वाले उपग्रह आंकड़ों से जंगलों को पूरी तरह नष्ट करने वाली आग की पहचान की गई। हालांकि, कम तीव्रता वाली आग से होने वाले नुकसान को इसमें पूरी तरह शामिल नहीं किया गया है। इसलिए शोधकर्ताओं का मानना है कि वास्तविक नुकसान इससे भी ज्यादा हो सकता है।

यह अध्ययन एक साफ संदेश देता है कि संरक्षित क्षेत्र बनाना जरूरी है, लेकिन अब केवल संरक्षण की सीमा तय करना पर्याप्त नहीं होगा। जंगलों को बचाने के लिए आग की रोकथाम, स्थानीय लोगों की भागीदारी और जलवायु परिवर्तन पर नियंत्रण-तीनों पर एक साथ काम करना होगा।