

09 जुलाई 2026 को देश की वायु गुणवत्ता में मिला-जुला सुधार देखने को मिला। दिल्ली ने इस साल पहली बार ‘बेहतर’ वायु गुणवत्ता दर्ज की, जहां एक्यूआई 48 तक गिर गया। पिछले दिन के 59 के मुकाबले इसमें 11 अंकों का सुधार हुआ, जो मौसम और हवा की अनुकूल परिस्थितियों का संकेत है।
फरीदाबाद में भी प्रदूषण का स्तर घटा और एक्यूआई 118 से कम होकर 108 पर पहुंच गया।
हालांकि, देश के कई हिस्सों में प्रदूषण की चुनौती बरकरार है। बिहार का आरा एक बार फिर सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां एक्यूआई 251 दर्ज किया गया। यहां पीएम2.5 कणों का स्तर बेहद अधिक रहा, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। धौलपुर और बल्लभगढ़ भी प्रदूषित शहरों की सूची में ऊपर रहे।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, 241 शहरों में से 80 शहरों की हवा साफ, 136 शहरों की हवा संतोषजनक और 23 शहरों की हवा मध्यम श्रेणी में रही।
हालांकि देश के कुछ शहरों में राहत के संकेत मिले हैं, लेकिन प्रदूषण के महीन कणों और स्थानीय प्रदूषण स्रोतों पर नियंत्रण अब भी जरूरी है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 09 जुलाई 2026 को देश में एक बार फिर आरा सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 251 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (08 जुलाई) को आरा में सूचकांक 253 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में 2 अंकों का मामूली सुधार आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि आरा की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
आरा में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,570 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में नाहरलागुन की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 15 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर आरा की तुलना नाहरलागुन से करें तो वहां स्थिति 16 गुणा खराब है।
आज दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन दर्ज किया गया, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 48 पर पहुंच गया। मतलब कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता 'बेहतर' श्रेणी में पहुंच गई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 59 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 48 पर पहुंच गया। मतलब की 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 11 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज 2026 में पहली बार वायु गुणवत्ता संतोषजनक से बेहतर श्रेणी में पहुंच गई है।
इससे पहले 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 08 जुलाई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 59 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 12 जून 2026 को सूचकांक 73 और 30 मई को 85 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 05 मई को सूचकांक 86, जबकि 04 मई को 88 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 118 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 108 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 10 अंकों के सुधार के साथ फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 09 जुलाई 2026 को 241 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 33.2 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 56.4 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 10.4 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में करीब 14.9 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरफ संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 23.6 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 4.5 फीसदी का उछाल देखा गया। वहीं दूसरी तरफ खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 33.3 फीसदी की कमी आई है, जोकि राहत की खबर है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में धौलपुर (202) दूसरे जबकि बल्लभगढ़ (194) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह सिलीगुड़ी (179) चौथे स्थान पर है। नारनौल (133)– बांसवाड़ा (129) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
बद्दी (128) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में गुम्मिडीपूंडी (124), वातवा (120) और बाड़मेर (119) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में राजस्थान के तीन शहर (धौलपुर, बांसवाड़ा, बाड़मेर) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि आरा, धौलपुर, नारनौल, गुम्मिडीपूंडी, अनंतपुर, अमृतसर, जबलपुर, गुरुग्राम, फरीदाबाद आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बद्दी, वातवा, बाड़मेर, जैसलमेर, बीड, जोरापोखर, विशाखापत्तनम, सिरोही, मंडी गोबिंदगढ़, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), पाली, जालोर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 33.2 फीसदी यानी 80 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में दिल्ली, डोंबिवली, फिरोजाबाद, गडग, गया, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुंटूर, हनुमानगढ़, हापुड़, हिंगोली, हुबली, हैदराबाद, जलगांव, जलना, कलबुर्गी, कानपुर, खुर्जा, कोहिमा, कोल्हापुर, कोल्लम, कोप्पल, कोरबा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, लखनऊ, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नवी मुंबई, नोएडा, पंपोर, पंचगांव, पंचकुला, परभणी, पटियाला, पुडुचेरी, पुणे, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, सांगली, शिवमोगा, सिलचर आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 136 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बीकानेर, बिलाईपाड़ा, बोइसर, बूंदी, ब्यासनगर, चरखी दादरी, चेन्नई, छपरा, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कटक, दौसा, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फतेहाबाद, गांधीनगर, गोरखपुर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हावड़ा, इंदौर, जयपुर, जालंधर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कडप्पा, कैथल, कल्याण, कन्नूर, करौली, करनाल, कारवार, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खन्ना, किशनगंज, कोलकाता, कोटा, कुरुक्षेत्र, मछलीपट्टनम, मदुरै, महाद, मैहर, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मानेसर, मंगलौर, मेरठ, मेहसाणा, मिलुपारा, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नलबाड़ी, नासिक, नेल्लोर, पलवल, पानीपत, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पूर्णिया, रायबरेली आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 23 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अमृतसर, अनंतपुर, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बाड़मेर, बीड, धनबाद, फरीदाबाद, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, जबलपुर, जैसलमेर, जालोर, जोरापोखर, मंडी गोबिंदगढ़, नारनौल, पाली, सिलीगुड़ी, सिरोही, वातवा, विशाखापत्तनम आदि शामिल हैं।
इसी तरह आरा (253), धौलपुर (202) में स्थिति खराब दर्ज की गई है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 241 में से 80 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 136 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 08 जुलाई को यह आंकड़ा 110 दर्ज किया गया था।
23 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज एक बार फिर आरा में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 251 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (08 जुलाई) को आरा में सूचकांक 253 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में 2 अंकों का मामूली सुधार आया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 59 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 48 पर पहुंच गया। मतलब की 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 11 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज 2026 में पहली बार वायु गुणवत्ता संतोषजनक से बेहतर श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 118 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 108 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 10 अंकों के सुधार के साथ फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 09 जुलाई को सिलीगुड़ी (179) चौथे स्थान पर है, वहीं धौलपुर (202) दूसरे, जबकि बल्लभगढ़ (194) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 64, गाजियाबाद में 50, गुवाहाटी में 96, गुरूग्राम में 110, नोएडा में 45, ग्रेटर नोएडा में 30 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 73 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 46, चेन्नई में 76, चंडीगढ़ में 43, हैदराबाद में 44, जयपुर में 62 और पटना में 61 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 80 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अकोला, अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), आसनसोल, बदलापुर, बागपत, बेगूसराय, भरतपुर, भिलाई, भिवंडी, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बक्सर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, छाल, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, देहरादून, दिल्ली, डोंबिवली, फिरोजाबाद, गडग, गया, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुंटूर, हनुमानगढ़, हापुड़, हिंगोली, हुबली, हैदराबाद, जलगांव, जलना, कलबुर्गी, कानपुर, खुर्जा, कोहिमा, कोल्हापुर, कोल्लम, कोप्पल, कोरबा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, लखनऊ, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नवी मुंबई, नोएडा, पंपोर, पंचगांव, पंचकुला, परभणी, पटियाला, पुडुचेरी, पुणे, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, सांगली, शिवमोगा, सिलचर, शिवसागर, सोलापुर, श्रीनगर, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, टोंक, विजयपुरा, वृंदावन शामिल हैं।
वहीं आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, बागलकोट, बहादुरगढ़, बालासोर, बारां, बरबिल, बारीपाड़ा, बैरकपुर, बठिंडा, बेलापुर, बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बीकानेर, बिलाईपाड़ा, बोइसर, बूंदी, ब्यासनगर, चरखी दादरी, चेन्नई, छपरा, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कटक, दौसा, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फतेहाबाद, गांधीनगर, गोरखपुर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हावड़ा, इंदौर, जयपुर, जालंधर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कडप्पा, कैथल, कल्याण, कन्नूर, करौली, करनाल, कारवार, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खन्ना, किशनगंज, कोलकाता, कोटा, कुरुक्षेत्र, मछलीपट्टनम, मदुरै, महाद, मैहर, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मानेसर, मंगलौर, मेरठ, मेहसाणा, मिलुपारा, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नलबाड़ी, नासिक, नेल्लोर, पलवल, पानीपत, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पूर्णिया, रायबरेली, रायरंगपुर, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रोहतक, राउरकेला, रूपनगर, सागर, सहरसा, समस्तीपुर, सतना, सवाई माधोपुर, सीकर, श्री गंगानगर, सूरत, तालचेर, ठाणे, थूथुकुडी, तिरुमाला, तिरुपति, तुमडीह, उदयपुर, उज्जैन, उल्हासनगर, वडोदरा, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, यमुना नगर आदि 136 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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