नोएडा में स्थिति सबसे खराब, गजरौला-मुजफ्फरनगर सहित टॉप 10 में शामिल यूपी के पांच शहर

दूसरी तरफ देश में गंगटोक की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 21 रिकॉर्ड किया गया।
Photo: Vikas Choudhary / CSE
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सारांश
  • 05 अक्टूबर 2026 को देश के शहरों में वायु प्रदूषण का दबाव एक बार फिर सबसे ज्यादा नोएडा में दिखाई दिया।

  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के विश्लेषण के मुताबिक नोएडा का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 268 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में है। हालांकि, एक दिन पहले के 281 के मुकाबले इसमें 13 अंकों का सुधार हुआ है।

  • नोएडा की हवा में पीएम10 की अधिकता बनी हुई है और यहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 490 फीसदी अधिक दर्ज किया गया।

  • प्रदूषण के मामले में गजरौला 260 और मुजफ्फरनगर 251 के एक्यूआई के साथ क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। टॉप 10 प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के पांच शहर—नोएडा, गजरौला, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर और गाजियाबाद—शामिल हैं।

  • वहीं दिल्ली का एक्यूआई मामूली सुधार के साथ 187 से घटकर 184 हो गया, लेकिन हवा अब भी ‘मध्यम’ श्रेणी में है।

  • सीपीसीबी के 246 शहरों के आंकड़ों के मुताबिक 21 शहरों में हवा ‘बेहतर’, 120 में ‘संतोषजनक’ और 97 शहरों में ‘मध्यम’ रही। इसके विपरीत आठ शहरों में एक्यूआई 200 से ऊपर दर्ज हुआ।

  • देश में सबसे साफ हवा गंगटोक में रही, जहां एक्यूआई महज 21 दर्ज किया गया।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 05 अक्टूबर 2026 को एक बार फिर देश में नोएडा सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 268 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (04 अक्टूबर) को नोएडा में सूचकांक 281 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 13 अंकों का सुधार आया है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि नोएडा की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

नोएडा में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 490 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में गंगटोक की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 21 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर नोएडा की तुलना गंगटोक से करें तो वहां स्थिति 12.7 गुणा खराब है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 187 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 184 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 3 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 06 सितम्बर को 55 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64  दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल एक्यूआई 224 दर्ज किया गया था, जो आज 9 अंकों के सुधार के साथ घटकर 215 पर पहुंच गया। इसके साथ ही फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता 'खराब' बनी हुई है।

प्रदूषण के बदलते समीकरण

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 05 अक्टूबर 2026 को 246 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 8.5 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 48.8 फीसदी में स्थिति संतोषजनक, जबकि दूसरी तरफ 42.7 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 2.4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 7.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जोकि चिंता का विषय है। वहीं खराब हवा वाले शहरों की गिनती 12 से घटकर आठ पर पहुंच गई है।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में गजरौला (260) दूसरे जबकि मुजफ्फरनगर (251) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह बुलंदशहर (244) चौथे स्थान पर है। गाजियाबाद (235) – फरीदाबाद (215) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

कुरुक्षेत्र (204) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में मानेसर (201), अंबाला (196) और डोंबिवली (193) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के पांच शहर (नोएडा, गजरौला, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर और गाजियाबाद) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि गजरौला, मुजफ्फरनगर, कुरुक्षेत्र, मानेसर, अंबाला, डोंबिवली, गुरुग्राम, जींद, मोदीनगर, मुरादाबाद, समस्तीपुर, गुम्मिडीपूंडी, मुंगेर, बरेली, ब्रजराजनगर, ग्रेटर नोएडा, मंडी गोबिंदगढ़, विशाखापत्तनम, बद्दी, कोलकाता, हाजीपुर, खोरा, धारूहेड़ा, हावड़ा, वाराणसी, पूर्णिया, मोतिहारी, अररिया, जालंधर, देहरादून, चरखी दादरी, लखनऊ, दुर्गापुर, नागपुर, मुजफ्फरपुर, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), नवी मुंबई और कानपुर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं नोएडा, बुलंदशहर, गाजियाबाद, फरीदाबाद, बागपत, मेरठ, बहादुरगढ़, भिवाड़ी, दिल्ली, अगरतला, अंबरनाथ, तालचेर, पारादीप, दौसा, वृंदावन, गोरखपुर, सिरसा, खुर्जा, पीथमपुर, परभणी, हिसार, अंकलेश्वर, चंद्रपुर, बारीपाड़ा, शामली, सोलापुर, भिवानी, हल्दिया, देवास, जलना, फतेहाबाद, हिंगोली, अहमदाबाद, सासाराम, वडोदरा, फतेहपुर सीकरी, गांधीनगर, सवाई माधोपुर, मंडीदीप, बीकानेर, जोरापोखर, लुधियाना, श्री गंगानगर, वातवा, बर्नीहाट (मेघालय), जैसलमेर, नारनौल, उल्हासनगर, कल्याण, ग्वालियर, बैरकपुर, नांदेड़, टोंक, नागौर, पाली, बिलाईपाड़ा, बोइसर, भावनगर, गया और रोहतक आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 8.5 फीसदी यानी 21 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में मदिकेरी, मंडीखेड़ा, नाहरलागुन, पंचगांव, पुडुचेरी, राजगीर, राजसमंद, रतलाम, ऋषिकेश, शिलांग, सिलीगुड़ी, तिरुवनंतपुरम आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 120 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गुंटूर, गुवाहाटी, हनुमानगढ़, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जलगांव, जालौर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, कडप्पा, काकीनाडा, करौली, कटिहार, कटनी, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, लातूर, मछलीपट्टनम, महाद, मैहर, मालेगांव, मंगलौर, मंगुराहा, मथुरा, मेहसाणा, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुंबई, नागांव, नलबाड़ी, नासिक, नयागढ़, पलवल, पंपोर, पंचकुला, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, रायबरेली, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राउरकेला, रूपनगर, सागर, सांगली, सतारा, सतना, सीकर, सिलचर, सिरोही आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 97 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें अगरतला, अहमदाबाद, अंबाला, अंबरनाथ, अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बागपत, बहादुरगढ़, बालासोर, बरेली, बारीपाड़ा, बैरकपुर, भावनगर, भिवाड़ी, भिवानी, भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलाईपाड़ा, बोइसर, ब्रजराजनगर, बर्नीहाट (मेघालय), चंद्रपुर, चरखी दादरी, चित्तौड़गढ़, कटक, दौसा, देहरादून, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, डोंबिवली, दुर्गापुर, फतेहाबाद, फतेहपुर सीकरी, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हिंगोली, हिसार, हावड़ा, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलना, जींद, जोरापोखर, कल्याण, कानपुर, खोरा, खुर्जा, कोलकाता, लखनऊ, लुधियाना, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, मेरठ, मोदीनगर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नागौर, नागपुर, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, नवी मुंबई, पाली, पारादीप, परभणी, पीथमपुर, पूर्णिया, रोहतक, समस्तीपुर, सासाराम, सवाई माधोपुर, शामली, सिरसा, सोलापुर, श्री गंगानगर, तालचेर, टोंक, उल्हासनगर, वडोदरा, वाराणसी, वातवा, विशाखापत्तनम और वृंदावन शामिल हैं।

वहीं देश में आज बुलंदशहर, फरीदाबाद, गजरौला, गाजियाबाद, कुरुक्षेत्र, मानेसर, मुजफ्फरनगर और नोएडा में स्थिति खराब है। इन शहरों में सूचकांक 200 से ऊपर दर्ज किया गया है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 246 में से 21 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 120 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 04 अक्टूबर को यह आंकड़ा 123 दर्ज किया गया था।

97 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज एक बार फिर नोएडा में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 268 दर्ज किया गया, जोकि ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (04 अक्टूबर) को नोएडा में सूचकांक 281 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 13 अंकों का सुधार आया है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 187 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 184 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 3 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल एक्यूआई 224 दर्ज किया गया था, जो आज 9 अंकों के सुधार के साथ घटकर 215 पर पहुंच गया। इसके साथ ही फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता 'खराब' बनी हुई है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 05 अक्टूबर को बुलंदशहर (244) चौथे स्थान पर है, वहीं गजरौला (260) दूसरे, जबकि मुजफ्फरनगर (251) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 109, गाजियाबाद में 235, गुवाहाटी में 61, गुरूग्राम में 191, नोएडा में 268, ग्रेटर नोएडा में 150 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 86 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 115, चेन्नई में 64, चंडीगढ़ में 87, हैदराबाद में 74, जयपुर में 106 और पटना में 86 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 21 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में आरा, बदलापुर, बेतिया, गंगटोक, कैथल, कलबुर्गी, करनाल, कुरनूल, मदिकेरी, मंडीखेड़ा, नाहरलागुन, पंचगांव, पुडुचेरी, राजगीर, राजसमंद, रतलाम, ऋषिकेश, शिलांग, सिलीगुड़ी, तिरुवनंतपुरम और विरार शामिल हैं।

वहींआगरा, अहमदनगर, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्र प्रदेश), अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, आसनसोल, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बाड़मेर, बठिंडा, बीड, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भिलाई, भीलवाड़ा, भोपाल, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बूंदी, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चूरू, दमोह, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गुंटूर, गुवाहाटी, हनुमानगढ़, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जलगांव, जालौर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, कडप्पा, काकीनाडा, करौली, कटिहार, कटनी, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, लातूर, मछलीपट्टनम, महाद, मैहर, मालेगांव, मंगलौर, मंगुराहा, मथुरा, मेहसाणा, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुंबई, नागांव, नलबाड़ी, नासिक, नयागढ़, पलवल, पंपोर, पंचकुला, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, रायबरेली, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राउरकेला, रूपनगर, सागर, सांगली, सतारा, सतना, सीकर, सिलचर, सिरोही, शिवसागर, सिवान, सोनीपत, श्रीनगर, सूरत, टेन्सा, ठाणे, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, तुमडीह, उदयपुर, उज्जैन, वापी, विजयवाड़ा और यादगीर आदि120 शहरोंमेंवायुगुणवत्तासंतोषजनकरही, जहांसूचकांक 51 से 100 केबीचदर्जकियागया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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