प्रदूषण की उठापटक: खैरथल में बढ़कर 270 पर पहुंचा एक्यूआई, विशाखापत्तनम-फतेहपुर सीकरी में भी स्थिति खराब

इससे पहले कल बड़ौत में एक्यूआई 324 दर्ज किया गया। हालांकि आज 181 अंकों के भारी सुधार के साथ बड़ौत में सूचकांक घटकर 143 पर पहुंच गया है।
फोटो: सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट
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सारांश
  • 25 अक्टूबर 2026 को देश में वायु प्रदूषण की तस्वीर में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला।

  • सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण के मुताबिक, राजस्थान के खैरथल में एक दिन के भीतर वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 149 अंक उछलकर 270 पर पहुंच गया, जिससे यह देश का सबसे प्रदूषित शहर बन गया। यहां हवा में पीएम2.5 जैसे महीन प्रदूषक कणों का दबदबा रहा।

  • विशाखापत्तनम 254 एक्यूआई के साथ दूसरे और फतेहपुर सीकरी 241 के साथ तीसरे स्थान पर रहे। सोनीपत, मेहसाणा और गजरौला में भी हवा की गुणवत्ता खराब दर्ज की गई।

  • हालांकि, कुछ शहरों में राहत भी मिली। बड़ौत में एक्यूआई 324 से गिरकर 143 पर आ गया, जबकि दिल्ली में यह 191 से घटकर 153 दर्ज किया गया। फरीदाबाद में भी मामूली सुधार हुआ।

  • इसके विपरीत, कर्नाटक के मदिकेरी में एक्यूआई महज 13 रहा और वहां देश की सबसे साफ हवा दर्ज की गई।

  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 268 शहरों के आंकड़ों के अनुसार, केवल 27 शहरों में हवा साफ थी, जबकि 118 में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही। वहीं, 123 शहरों में एक्यूआई 100 से ऊपर दर्ज किया गया, जो प्रदूषण की व्यापक चुनौती को दर्शाता है। कई शहरों में पीएम2.5 और पीएम10 प्रमुख प्रदूषक बने रहे।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 25 अक्टूबर 2026 को देश में खैरथल सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 270 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (24 अक्टूबर) को खैरथल में सूचकांक 121 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 149 अंकों का भारी उछाल आया है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि खैरथल की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

खैरथल में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,700 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 13 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर खैरथल की तुलना मदिकेरी से करें तो वहां स्थिति 20.7 गुणा खराब है।

इससे पहले कल बड़ौत में एक्यूआई 324 दर्ज किया गया। हालांकि आज 181 अंकों के भारी सुधार के साथ बड़ौत में सूचकांक घटकर 143 पर पहुंच गया है। मतलब कि वायु गुणवत्ता बेहद खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गया है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 191 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 153 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 38 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 06 सितम्बर को 55 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64  दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल एक्यूआई 126 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 124 दर्ज किया गया। मतबल की कल से वहां प्रदूषण में 2 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही वहां वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

प्रदूषण के बदलते समीकरण

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 25 अक्टूबर 2026 को 268 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 10.1 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 44 फीसदी में स्थिति संतोषजनक, जबकि दूसरी तरफ 45.9 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा चिंताजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 3.6 फीसदी की कमी आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 10.3 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में भी कल से 2.5 फीसदी की गिरावट आई है, जोकि राहत की खबर है। वहीं आज 7 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब दर्ज की गई, जबकि कल इन शहरों की गिनती 11 रिकॉर्ड की गई थी।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में विशाखापत्तनम (254) दूसरे जबकि फतेहपुर सीकरी (241) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह सोनीपत (224) चौथे स्थान पर है। मेहसाणा (219) – गजरौला (209) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

बर्नीहाट (मेघालय) (207) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में पारादीप (192), मंडीदीप (191), बहादुरगढ़ (175) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में राजस्थान के दो शहर (खैरथल, फतेहपुर सीकरी) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि खैरथल, विशाखापत्तनम, फतेहपुर सीकरी, सोनीपत, मेहसाणा, गजरौला, अंकलेश्वर, लखनऊ, मथुरा, सवाई माधोपुर, हिंगोली, जालना, मानेसर, अररिया, बड़ौत, पिंपरी-चिंचवड़, सिंगरौली, हाजीपुर, सागर, गोरखपुर, कानपुर, धारूहेड़ा, मुरादाबाद, आगरा, सतारा, महाड, डोंबिवली, नोएडा, पुणे, गाजियाबाद, झालावाड़, सिवान, बरेली, मालेगांव, उल्हासनगर, मंडीखेड़ा, मोतिहारी, अलवर, सूरत, नागपुर, उज्जैन, भोपाल, हावड़ा, राजमहेंद्रवरम, यमुनानगर, पूर्णिया, गया, डूंगरपुर और मुजफ्फरपुर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं बर्नीहाट (मेघालय), पारादीप, मंडीदीप, बहादुरगढ़, पीथमपुर, टोंक, वृंदावन, भिवाड़ी, मेरठ, बीकानेर, अहमदाबाद, भावनगर, ग्वालियर, दिल्ली, खोरा, अगरतला, बुलंदशहर, कटनी, बिलीपाड़ा, बेलापुर, पाली, भरतपुर, तालचेर, जोधपुर, वातवा, गांधीनगर, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, खुर्जा, वडोदरा, बूंदी, बागपत, चंद्रपुर, जयपुर, जैसलमेर, फरीदाबाद, मुंबई, नागौर, नारनौल, वाराणसी, अंबाला, मंडी गोबिंदगढ़, मोदीनगर, ठाणे, भिवंडी, दौसा, देवास, नवी मुंबई, गुम्मिडीपूंडी, इंदौर, अंबरनाथ, प्रयागराज, धौलपुर, चित्तौड़गढ़, सासाराम, कल्याण, प्रतापगढ़, श्रीकाकुलम, उदयपुर, मुजफ्फरनगर, बठिंडा, अजमेर, श्री गंगानगर, अमृतसर, छपरा और धुले आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 10.1 फीसदी यानी 27 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में गंगटोक, हावेरी, हुबली, कलबुर्गी, कारवार, क्योंझर, किशनगंज, कोल्हापुर, कोप्पल, मदिकेरी, मैसूर, नागांव, पंचकुला, पुडुचेरी, राजगीर, रामनगर, रूपनगर, समस्तीपुर, शिवमोगा, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 118 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें भागलपुर, भिलाई, भीलवाड़ा, भिवानी, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चरखी दादरी, चेन्नई, छाल, चित्तूर, कटक, दरभंगा, दावणगेरे, देहरादून, धारवाड़, दुर्गापुर, एलुरु, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गुंटूर, गुवाहाटी, हल्दिया, हनुमानगढ़, हापुड़, हिसार, हैदराबाद, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, जालोर, झांसी, झुंझुनू, जींद, जोरापोखर, कडप्पा, काकीनाडा, कन्नूर, करनाल, कटिहार, खन्ना, कोहिमा, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, लेह, लुधियाना, मधुबनी, मैहर, मंगलौर, मंगुराहा, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुंगेर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नासिक, नयागढ़, नेल्लोर, पलवल, परभणी, पटियाला, पटना, रायबरेली आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 116 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अलवर, अंबाला, अंबरनाथ, अमृतसर, अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बागपत, बहादुरगढ़, बालासोर, बड़ौत, बरेली, बठिंडा, बेलापुर, भरतपुर, भावनगर, भिवाड़ी, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलीपाड़ा, बुलंदशहर, बूंदी, ब्यासनगर, चंद्रपुर, छपरा, चित्तौड़गढ़, चुरू, दौसा, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धौलपुर, धुले, डोंबिवली, डूंगरपुर, फरीदाबाद, गांधीनगर, गया, गाजियाबाद, गोरखपुर, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, ग्वालियर, हाजीपुर, हिंगोली, हावड़ा, इंदौर, जयपुर, जैसलमेर, जालना, झालावाड़, जोधपुर, कल्याण, कानपुर, कटनी, खोरा, खुर्जा, लखनऊ, महाड, मालेगांव, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मानेसर, मथुरा, मेरठ, मोदीनगर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नागौर, नागपुर, नारनौल, नवी मुंबई, नोएडा, पाली, पारादीप, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, राजमहेंद्रवरम, सागर, सासाराम, सतारा, सवाई माधोपुर, सिंगरौली, सिवान, श्री गंगानगर, श्रीकाकुलम, सूरत, तालचेर, ठाणे, टोंक, उदयपुर, उज्जैन, उल्हासनगर, वडोदरा, वाराणसी, वातवा, वृंदावन और यमुनानगर शामिल हैं।

इसी तरह बर्नीहाट (मेघालय), फतेहपुर सीकरी, गजरौला, खैरथल, मेहसाणा, सोनीपत और विशाखापत्तनम में स्थिति खराब दर्ज की गई है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 268 में से 27 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 118 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 24 अक्टूबर को यह आंकड़ा 107 दर्ज किया गया था।

116 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज खैरथल में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 270 दर्ज किया गया, जोकि ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (24 अक्टूबर) को खैरथल में सूचकांक 121 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 149 अंकों का भारी उछाल आया है।

इससे पहले कल बड़ौत में एक्यूआई 324 दर्ज किया गया। हालांकि आज 181 अंकों के भारी सुधार के साथ बड़ौत में सूचकांक घटकर 143 पर पहुंच गया है। मतलब कि वायु गुणवत्ता बेहद खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गया है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 191 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 153 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 38 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल एक्यूआई 126 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 124 दर्ज किया गया। मतबल की कल से वहां प्रदूषण में 2 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही वहां वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 25 अक्टूबर को सोनीपत (224) चौथे स्थान पर है, वहीं विशाखापत्तनम (254) दूसरे, जबकि फतेहपुर सीकरी (241) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 154, गाजियाबाद में 125, गुवाहाटी में 80, गुरूग्राम में 134, नोएडा में 131, ग्रेटर नोएडा में 134 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 124 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 163, चेन्नई में 58, चंडीगढ़ में 74, हैदराबाद में 73, जयपुर में 126 और पटना में 85 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 27 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में आइजोल, बेंगलुरु, बेतिया, बक्सर, चामराजनगर, गंगटोक, हावेरी, हुबली, कलबुर्गी, कारवार, क्योंझर, किशनगंज, कोल्हापुर, कोप्पल, मदिकेरी, मैसूर, नागांव, पंचकुला, पुडुचेरी, राजगीर, रामनगर, रूपनगर, समस्तीपुर, शिवमोगा, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम और विजयपुरा शामिल हैं।

वहीं अकोला, अमरावती (आंध्र प्रदेश), अमरावती (महाराष्ट्र), अनंतपुर, अनपरा, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (बिहार), बागलकोट, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बारीपदा, बाड़मेर, बैरकपुर, बीड, बेगूसराय, बेलगाम, भागलपुर, भिलाई, भीलवाड़ा, भिवानी, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चरखी दादरी, चेन्नई, छाल, चित्तूर, कटक, दरभंगा, दावणगेरे, देहरादून, धारवाड़, दुर्गापुर, एलुरु, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गुंटूर, गुवाहाटी, हल्दिया, हनुमानगढ़, हापुड़, हिसार, हैदराबाद, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, जालोर, झांसी, झुंझुनू, जींद, जोरापोखर, कडप्पा, काकीनाडा, कन्नूर, करनाल, कटिहार, खन्ना, कोहिमा, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, लेह, लुधियाना, मधुबनी, मैहर, मंगलौर, मंगुराहा, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुंगेर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नासिक, नयागढ़, नेल्लोर, पलवल, परभणी, पटियाला, पटना, रायबरेली, रायचुर, रायपुर, रायरंगपुर, राजकोट, राजसमंद, रतलाम, ऋषिकेश, रोहतक, राउरकेला, सहरसा, सांगली, सतना, शामली, सीकर, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिरोही, सिरसा, सीतामढ़ी, शिवसागर, सोलापुर, सुआकाती, टेन्सा, थूथुकुडी, तिरुमाला, तिरुपति, तुमडीह, विजयवाड़ा और विरार आदि 118 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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