प्रदूषण का हाल: सिंगरौली में बढ़कर 363 पर पहुंचा एक्यूआई, दिल्ली-गाजियाबाद में आया सुधार

28 जनवरी 2026 को देश में सिंगरौली की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित रही, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 363 दर्ज किया गया।
भागलपुर शहर में एनएच 33 का हाल, धूल के कारण लोग मास्क पहनकर चल रहे। फोटो : विकास चौधरी/सीएसई
भागलपुर शहर में एनएच 33 का हाल, धूल के कारण लोग मास्क पहनकर चल रहे। फोटो : विकास चौधरी/सीएसई
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सारांश
  • सिंगरौली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 363 तक पहुंच गया है, जो देश में सबसे खराब है। यहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 2,300 फीसदी अधिक है।

  • सिंगरौली में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,300 फीसदी अधिक है।

  • दूसरी ओर, दिल्ली और गाजियाबाद में सुधार देखा गया है, जहां एक्यूआई क्रमशः 255 और 234 पर है।

  • राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो कल से प्रदूषण में अच्छा खासी गिरावट आई है, इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता बेहद खराब से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।

  • देश के 237 शहरों में से केवल 6.3 फीसदी में हवा साफ है।

  • 28 जनवरी 2026 को 237 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 6.3 फीसदी शहरों में हवा साफ है।

  • वहीं 41.8 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 51.9 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं।

विश्लेषण से पता चला है कि 28 जनवरी 2026 को देश में सिंगरौली की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित रही, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 363 दर्ज किया गया। इससे पहले 27 जनवरी को सिंगरौली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 335 दर्ज किया गया। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 28 अंकों का इजाफा हुआ है। हालांकि सिंगरौली में वायु गुणवत्ता अभी भी बेहद खराब बनी हुई है।                 

रुझानों में सामने आया है कि सिंगरौली की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी हैं। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। 

सिंगरौली में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,300 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में दमोह की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 26 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर में सिंगरौली की तुलना दमोह से करें तो वहां स्थिति 13 गुणा खराब है।

इससे पहले कल देश में गाजियाबाद की हवा सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 376 दर्ज किया गया था। हालांकि आज 142 अंकों के सुधार के साथ गाजियाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 234 पर पहुंच गया है।

राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो कल से प्रदूषण में अच्छा खासी गिरावट आई है, इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता बेहद खराब से खराब श्रेणी में पहुंच गई है। कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 336 दर्ज किया गया था, जो आज 28 जनवरी को 81 अंकों के भारी सुधार के साथ घटकर 255 पर पहुंच गया है।

इससे पहले 14 नवंबर को दिल्ली में 2025 का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 461 तक पहुंच गया।     

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 28 जनवरी 2026 को 237 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 6.3 फीसदी शहरों में हवा साफ है।

वहीं 41.8 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 51.9 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज भी हवा चिंताजनक बनी हुई है।

बता दें कि कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 11.8 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 32 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में करीब 8.3 फीसदी की कमी आई है। इसी तरह खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में भी कल से 34.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। बेहद खराब हवा वाले शहरों की गिनती में भी कल से 44.4 फीसदी की कमी आई है, जोकि राहत की खबर है।

फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 136 (-55) रिकॉर्ड किया गया है।  

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में नारनौल (328) दूसरे जबकि धारूहेड़ा (324) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 315 अंकों के साथ अंगुल चौथे स्थान पर है। चरखी दादरी-टोंक में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 313 और 287 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

सीकर (285) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में गुरुग्राम (267), बूंदी (259) और दिल्ली (255) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के चार शहर (नारनौल, धारूहेड़ा, चरखी दादरी, गुरुग्राम) और राजस्थान के तीन शहर (टोंक, सीकर, बूंदी) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि सिंगरौली, नारनौल, धारूहेड़ा, चरखी दादरी, टोंक, सीकर, गुरुग्राम, बूंदी, दिल्ली, गुम्मिडीपूंडी, हाजीपुर, ब्यासनगर, चूरू, गाजियाबाद, समस्तीपुर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), नोएडा, जयपुर, झुंझुनू, सुआकाती, नाहरलागुन, भरतपुर, भिवाड़ी, बारां, राजमहेंद्रवरम, बीकानेर, ब्रजराजनगर, तालचेर, ग्रेटर नोएडा, तुमकुरु, बहादुरगढ़, सवाई माधोपुर, पीथमपुर, बारबिल, बागपत, आसनसोल, बारीपदा, कोलकाता, हल्दिया, नागपुर, पाली, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, क्योंझर, मुजफ्फरपुर, बिलासपुर, छाल, दुर्गापुर, बेगूसराय, चेन्नई, बर्नीहाट, तिरुमाला, बेतिया, मुंगेर, रोहतक आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं विशाखापत्तनम, कुंजेमुरा, धनबाद, कोटा, बल्लभगढ़, हावड़ा, गुवाहाटी, राउरकेला, चंद्रपुर, सहरसा, छपरा, मिलुपारा, फरीदाबाद, नागौर, ग्वालियर, सिलीगुड़ी, अजमेर, वातवा, सिवान, कटनी, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), हनुमानगढ़, चिक्काबल्लापुर, रतलाम, पटना, सागर, उल्हासनगर, पेरुंदुरई, अहमदाबाद, गांधीनगर, बदलापुर, रामनगर, श्री गंगानगर, आगरा, भोपाल, करौली, अमरावती (महाराष्ट्र), बांसवाड़ा, परभनी, यमुना नगर, नांदेड़, उदयपुर, बेंगलुरु, गया आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 6.3 फीसदी यानी महज 15 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बरेली, चिक्कमगलुरु, दमोह, फिरोजाबाद, कैथल, खुर्जा, पंचगांव, रूपनगर, शिलांग, शिवमोगा, श्रीनगर, तंजावुर, वृंदावन आदि शामिल हैं। 

आज देश के जिन 99 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें चंडीगढ़, चित्तूर, कोयंबटूर, दौसा, दावनगेरे, देहरादून, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, गंगटोक, गोरखपुर, हापुड़, हिसार, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जालंधर, जलगांव, जींद, कडप्पा, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करनाल, कटिहार, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोल्लम, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मदिकेरी, मदुरै, महाड, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मेरठ, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरनगर, मैसूर, नागपट्टिनम, नासिक, नवी मुंबई, पलवल, पंपोर, पंचकुला, पटियाला, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज आदि शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 99 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अमरावती (महाराष्ट्र), अररिया, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बागपत, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बारीपदा, बैरकपुर, बेगूसराय, बेंगलुरु, बेतिया, भरतपुर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बीकानेर, बिलासपुर, ब्रजराजनगर, बर्नीहाट, चंद्रपुर, चेन्नई, छाल, छपरा, चिक्काबल्लापुर, चित्तौड़गढ़, देवास, धनबाद, दुर्गापुर, एलूर, फरीदाबाद, गांधीनगर, गया, ग्रेटर नोएडा, गुवाहाटी, ग्वालियर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हावड़ा, जबलपुर, जैसलमेर, जालोर, झालावाड़, जोधपुर, करौली, कटनी, क्योंझर, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, लातूर, मालेगांव, मंडीदीप, मानेसर, मिलुपारा, मोतिहारी, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागौर, नागपुर, नांदेड़, पाली, परभनी, पटना, पेरुंदुरई, पीथमपुर, प्रतापगढ़, पुणे, पूर्णिया, राजमहेंद्रवरम, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, रोहतक, राउरकेला, सागर, सहरसा, सवाई माधोपुर, सिलीगुड़ी, सिवान, श्री गंगानगर, तालचेर, तिरुमाला, तुमकुरु, उदयपुर, उल्हासनगर, वातवा, यमुना नगर शामिल हैं।

आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 19 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में अमरावती (आंध्रप्रदेश), बूंदी, ब्यासनगर, चूरू, कटक, दिल्ली, गाजियाबाद, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, हाजीपुर, जयपुर, झुंझुनू, नाहरलागुन, नोएडा, समस्तीपुर, सीकर, सुआकाती, टोंक, विशाखापत्तनम शामिल हैं। वहीं अंगुल, चरखी दादरी, धारूहेड़ा, नारनौल, सिंगरौली में वायु गुणवत्ता 'बेहद खराब' है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 237 में से महज 15 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 99 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 27 जनवरी 2026 को यह आंकड़ा 75 दर्ज किया गया था।

99 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज सिंगरौली (363) में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक सिंगरौली में कल से एक्यूआई में 28 अंकों का उछाल आया है। हालांकि वायु गुणवत्ता अभी भी बेहद खराब बनी हुई है। बता दें कल सिंगरौली में एक्यूआई 335 दर्ज किया गया था।

इससे पहले कल देश में गाजियाबाद की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब एक्यूआई बढ़कर 376 तक पहुंच गया था। हालांकि आज 142 अंकों के भारी सुधार के साथ गाजियाबाद में सूचकांक 234 पर पहुंच गया है।

दिल्ली में आज प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक 336 दर्ज किया गया, जो आज घटकर 255 पर पहुंच गया है। मतलब कि कल से दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में 81 अंकों की भारी गिरावट आई है। हालांकि चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 1,600 फीसदी अधिक खराब है।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट दर्ज की गई है, जहां सूचकांक 136 (-55) रिकॉर्ड किया गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।   

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 28 जनवरी को अंगुल चौथे स्थान पर है, वहीं नारनौल (328) दूसरे, जबकि धारूहेड़ा (324) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 134, गाजियाबाद में 234, गुवाहाटी में 163, गुरूग्राम में 267, नोएडा में 217, ग्रेटर नोएडा में 189 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 70 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 90, चेन्नई में 147, चंडीगढ़ में 64, हैदराबाद में 84, जयपुर में 213 और पटना में 115 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 15 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अंबाला, बागलकोट, बरेली, चिक्कमगलुरु, दमोह, फिरोजाबाद, कैथल, खुर्जा, पंचगांव, रूपनगर, शिलांग, शिवमोगा, श्रीनगर, तंजावुर, वृंदावन शामिल हैं।

वहीं अहमदनगर, आइजोल, अकोला, अलवर, अमृतसर, अनंतपुर, अंकलेश्वर, आरा, बद्दी, बाड़मेर, बठिंडा, बेलापुर, बेलगाम, भागलपुर, भिलाई, भिवंडी, बोइसर, बुलंदशहर, बक्सर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चित्तूर, कोयंबटूर, दौसा, दावनगेरे, देहरादून, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, गंगटोक, गोरखपुर, हापुड़, हिसार, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जालंधर, जलगांव, जींद, कडप्पा, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करनाल, कटिहार, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोल्लम, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मदिकेरी, मदुरै, महाड, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मेरठ, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरनगर, मैसूर, नागपट्टिनम, नासिक, नवी मुंबई, पलवल, पंपोर, पंचकुला, पटियाला, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुदुचेरी, पुडुकोट्टई, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, रामनाथपुरम, ऋषिकेश, सांगली, सतना, सिलचर, सिरोही, सिरसा, शिवसागर, सोलापुर, सूरत, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुपति, वापी, वाराणसी, विजयपुरा, विजयवाड़ा, विरार, यादगीर आदि 99 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:

376 अंकों के साथ प्रदूषण में पहले स्थान पर गाजियाबाद, दिल्ली में भी बिगड़े हालात

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