

दिल्ली-एनसीआर में हवा की सेहत तेजी से बिगड़ रही है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के 17 अक्टूबर 2026 के आंकड़ों के विश्लेषण के मुताबिक, ग्रेटर नोएडा देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) एक दिन में 156 अंक उछलकर 233 पर पहुंच गया। एक दिन पहले यह 77 था।
वहीं लेह 223 एक्यूआई के साथ दूसरे और खोरा 213 के साथ तीसरे स्थान पर रहा।
गाजियाबाद में एक्यूआई 206 और नोएडा में 203 दर्ज किया गया, जबकि उत्तर प्रदेश के पांच शहर देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहे।
दिल्ली में भी प्रदूषण बढ़ा है। यहां एक्यूआई 90 से बढ़कर 159 पर पहुंच गया, जबकि फरीदाबाद में यह 91 से बढ़कर 109 दर्ज किया गया। देश के 271 शहरों के आंकड़ों में 40 शहरों की हवा साफ, 135 की संतोषजनक और 91 की मध्यम श्रेणी में रही।
चिंताजनक यह है कि मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की संख्या एक दिन में 42.2 फीसदी बढ़ गई, जबकि साफ हवा वाले शहरों की संख्या में 9.1 फीसदी की गिरावट आई।
दूसरी ओर, कर्नाटक के मदिकेरी में एक्यूआई महज 12 दर्ज किया गया, जो देश में सबसे कम रहा।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 17 अक्टूबर 2026 को देश में ग्रेटर नोएडा सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 233 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (16 अक्टूबर) को ग्रेटर नोएडा में सूचकांक 77 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 156 अंकों का भारी उछाल आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि ग्रेटर नोएडा की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
ग्रेटर नोएडा में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 400 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 12 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर ग्रेटर नोएडा की तुलना मदिकेरी से करें तो वहां स्थिति 19.4 गुणा खराब है।
इससे पहले कल देश में वातवा की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 204 दर्ज किया गया। हालांकि आज 71 अंकों के भारी सुधार के साथ वातवा में सूचकांक घटकर 133 पर पहुंच गया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 90 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 159 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 69 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 06 सितम्बर को 55 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में वृद्धि हुई है। फरीदाबाद में जहां कल एक्यूआई 91 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 109 दर्ज किया गया। मतबल की कल से वहां प्रदूषण में 18 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही वहां वायु गुणवत्ता आज मध्यम श्रेणी में है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 17 अक्टूबर 2026 को 271 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 14.8 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 49.8 फीसदी में स्थिति संतोषजनक, जबकि दूसरी तरफ 35.4 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 9.1 फीसदी की गिरावट आई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 12.3 फीसदी की कमी दर्ज की गई। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 42.2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जोकि चिंता का विषय है। वहीं आज पांच शहरों में वायु गुणवत्ता खराब दर्ज की गई, जबकि कल इन शहरों की गिनती दो रिकॉर्ड की गई थी।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में लेह (223) दूसरे जबकि खोरा (213) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह गाजियाबाद (206) चौथे स्थान पर है। नोएडा (203) – यमुना नगर (200) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
बहादुरगढ़ (191) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में मुजफ्फरनगर (191), हिंगोली (190), मंडीदीप (190) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के पांच शहर (ग्रेटर नोएडा, खोरा, गाजियाबाद, नोएडा, मुजफ्फरनगर) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि गाजियाबाद, नोएडा, यमुना नगर, बहादुरगढ़, मुजफ्फरनगर, हिंगोली, मंडीदीप, मानेसर, गजरौला, अंकलेश्वर, बल्लभगढ़, सासाराम, हाजीपुर, मेरठ, बरौत, दिल्ली, उज्जैन, हापुड़, झालावाड़, पिंपरी-चिंचवाड़, करनाल, गांधीनगर, ग्वालियर, बारां, गया, वडोदरा, झांसी, नवी मुंबई, वातवा, सागर, मोतिहारी, कोटा, नागपुर, शामली, अररिया, मुंबई, बागपत, महाड, खुर्जा, कानपुर, गुरुग्राम, मेहसाणा, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), पूर्णिया और जलगांव आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं ग्रेटर नोएडा, खोरा, श्री गंगानगर, बीकानेर, बर्नीहाट (मेघालय), अहमदाबाद, अंबरनाथ, बुलंदशहर, सतारा, पीथमपुर, अगरतला, भावनगर, बठिंडा, गोरखपुर, भिवाड़ी, पुणे, बेलापुर, सूरत, कुरुक्षेत्र, कैथल, जोरापोखर, अंबाला, भोपाल, चित्तौड़गढ़, पाली, नागौर, उदयपुर, पानीपत, जबलपुर, उल्हासनगर, मंडी गोबिंदगढ़, औरंगाबाद (बिहार), चंद्रपुर, फरीदाबाद, गुम्मिडीपूंडी, वाराणसी, विरार, प्रतापगढ़, जालोर, अहमदनगर, धुले और रायचूर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 14.7 फीसदी यानी 40 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में कटक, दावणगेरे, देहरादून, फिरोजाबाद, गंगटोक, कलबुर्गी, क्योंझर, कोप्पल, कोरबा, मदिकेरी, मंगलौर, मिलुपारा, नाहरलागुन, नयागढ़, नेल्लोर, पंचकूला, पुडुचेरी, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, ऋषिकेश, राउरकेला, रूपनगर, शिवमोगा, श्रीनगर आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 135 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें दरभंगा, दौसा, धनबाद, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, एलुरु, फतेहाबाद, गुंटूर, गुवाहाटी, हल्दिया, हनुमानगढ़, हावेरी, हिसार, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलना, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कडप्पा, कल्याण, कन्नूर, करौली, कारवार, कटिहार, कटनी, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मैहर, मालेगांव, मंडीखेड़ा, मंगुराहा, मथुरा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नलबाड़ी, नांदेड़, नारनौल, नासिक, पंचगांव, पारादीप, परभणी, पटियाला, पटना, प्रयागराज, रायबरेली, रायपुर, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रतलाम, रोहतक, सहरसा, समस्तीपुर, सांगली, सतना, सवाई माधोपुर, शिलांग, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिरोही, सिरसा आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 91 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अगरतला, अहमदाबाद, अहमदनगर, अंबाला, अंबरनाथ, अंकलेश्वर, अररिया, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बागपत, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बारां, बरौत, बाड़मेर, बठिंडा, बेलापुर, भावनगर, भिवाड़ी, भोपाल, बीकानेर, बुलंदशहर, बूंदी, बर्नीहाट (मेघालय), चंद्रपुर, चित्तौड़गढ़, दिल्ली, देवास, धुले, डोंबिवली, फरीदाबाद, गजरौला, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, ग्वालियर, हाजीपुर, हापुड़, हिंगोली, जबलपुर, जलगांव, जालोर, झालावाड़, झांसी, जोरापोखर, कैथल, कानपुर, करनाल, खैरथल, खुर्जा, कोटा, कुरुक्षेत्र, महाड, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, मानेसर, मेरठ, मेहसाणा, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरनगर, नागौर, नागपुर, नवी मुंबई, पाली, पलवल, पानीपत, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, पुणे, पूर्णिया, रायचूर, सागर, सासाराम, सतारा, शामली, सीकर, श्री गंगानगर, सूरत, उदयपुर, उज्जैन, उल्हासनगर, वडोदरा, वाराणसी, वातवा, विरार और यमुना नगर शामिल हैं।
इसी तरह ग्रेटर नोएडा (233), लेह (223), खोरा (213), गाजियाबाद (206) और नोएडा (203) में स्थिति खराब दर्ज की गई है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 271 में से 40 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 135 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 16 अक्टूबर को यह आंकड़ा 154 दर्ज किया गया था।
91 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज ग्रेटर नोएडा में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 233 दर्ज किया गया, जोकि ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (16 अक्टूबर) को ग्रेटर नोएडा में सूचकांक 77 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 156 अंकों का भारी उछाल आया है।
इससे पहले कल देश में वातवा की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 204 दर्ज किया गया। हालांकि आज 71 अंकों के भारी सुधार के साथ वातवा में सूचकांक घटकर 133 पर पहुंच गया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 90 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 159 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 69 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में वृद्धि हुई है। फरीदाबाद में जहां कल एक्यूआई 91 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 109 दर्ज किया गया। मतबल की कल से वहां प्रदूषण में 18 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही वहां वायु गुणवत्ता आज मध्यम श्रेणी में है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 17 अक्टूबर को गाजियाबाद (206) चौथे स्थान पर है, वहीं लेह (223) दूसरे, जबकि खोरा (213) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 145, गाजियाबाद में 206, गुवाहाटी में 80, गुरूग्राम में 106, नोएडा में 203, ग्रेटर नोएडा में 233 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 120 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 96, चेन्नई में 64, चंडीगढ़ में 59, हैदराबाद में 72, जयपुर में 83 और पटना में 96 दर्ज किया गया।
देश के जिन 40 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में आइजोल, अमरावती (आंध्र प्रदेश), बेतिया, भुवनेश्वर, बक्सर, चामराजनगर, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, कुड्डालोर, कटक, दावणगेरे, देहरादून, फिरोजाबाद, गंगटोक, कलबुर्गी, क्योंझर, कोप्पल, कोरबा, मदिकेरी, मंगलौर, मिलुपारा, नाहरलागुन, नयागढ़, नेल्लोर, पंचकूला, पुडुचेरी, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, ऋषिकेश, राउरकेला, रूपनगर, शिवमोगा, श्रीनगर, सुआकाती, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, तुमडीह, विजयपुरा और विशाखापत्तनम शामिल हैं।
वहीं आगरा, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, आसनसोल, बदलापुर, बागलकोट, बालासोर, बांसवाड़ा, बारबिल, बरेली, बारीपदा, बैरकपुर, बीड, बेगूसराय, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भिलाई, भीलवाड़ा, भिवंडी, भिवानी, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बिलीपाड़ा, बोइसर, ब्रजराजनगर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चेन्नई, छाल, चुरू, दमोह, दरभंगा, दौसा, धनबाद, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, एलुरु, फतेहाबाद, गुंटूर, गुवाहाटी, हल्दिया, हनुमानगढ़, हावेरी, हिसार, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलना, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कडप्पा, कल्याण, कन्नूर, करौली, कारवार, कटिहार, कटनी, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मैहर, मालेगांव, मंडीखेड़ा, मंगुराहा, मथुरा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नलबाड़ी, नांदेड़, नारनौल, नासिक, पंचगांव, पारादीप, परभणी, पटियाला, पटना, प्रयागराज, रायबरेली, रायपुर, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रतलाम, रोहतक, सहरसा, समस्तीपुर, सांगली, सतना, सवाई माधोपुर, शिलांग, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिरोही, सिरसा, शिवसागर, सोलापुर, सोनीपत, श्रीकाकुलम, तालचेर, ठाणे, तिरुमाला, तिरुपति, टोंक, उडुपी, वापी, विजयवाड़ा, वृंदावन और यादगीर आदि 135 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
देश में वायु गुणवत्ता की ताजा जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर से प्राप्त कर सकते हैं