
आज देश में सभी शहरों से ज्यादा नंदेसरी की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़कर 285 तक पहुंच गया। इस दौरान गुजरात के इस शहर की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी मानकों के लिहाज से देखें तो वहां प्रदूषण का स्तर सुरक्षित सीमा से 1,800 फीसदी अधिक है।
मतलब की वहां की हवा में घुला जहर लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। गौरतलब है कि कल सरकार ने नंदेसरी से जुड़े आंकड़े साझा नहीं किए थे।
दूसरी तरफ आज एक बार फिर देश में शिलांग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 10 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर नंदेसरी की तुलना शिलांग से करें तो वहां स्थिति 27 गुणा खराब है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 30 अगस्त 2025 को जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि देश के जहां 55 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 40 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 4.4 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा साफ है।
गौरतलब है कि कल अगरतला में प्रदूषण से स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 331 तक पहुंच गया। हालांकि कल से अगरतला की वायु गुणवत्ता में 305 अंकों का भारी सुधार आया है। इसके साथ ही वहां एक्यूआई सुधरकर 26 पर पहुंच गया। वहां एक ही दिन में वायु गुणवत्ता बेहद खराब से साफ हो गई है।
प्रदूषण के मामले में आज मेघालय का बर्नीहाट दूसरे स्थान पर है, जहां एक्यूआई 140 दर्ज किया गया। इसी तरह कांचीपुरम 129 अंकों के साथ प्रदूषित शहरों में तीसरे स्थान पर है। एलूर में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 125 अंकों के साथ आज चौथे स्थान पर है। वहीं बद्दी (119) पांचवें जबकि छपरा (114) छठे स्थान पर है।
इसी तरह आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में समस्तीपुर (108), गुम्मिडिपूंडी (105), जैसलमेर (104), और रूपनगर (104) भी शामिल हैं।
रुझानों से पता चला है कि इस दौरान जहां नंदेसरी, बर्नीहाट आदि में प्रदूषण के महीन कण पीएम2.5 हावी रहे। वहीं कांचीपुरम, बद्दी, समस्तीपुर, गुम्मिडिपूंडी, जैसलमेर आदि की हवा में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक थी। वहीं कुछ शहरों में जहां कार्बन हावी था, वहीं कुछ में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड से स्थिति खराब रही।
इन शहरों के उलट आज देश में अमृतसर सहित 123 शहरों में हवा साफ रही। इन शहरों में देहरादून, डिंडीगुल, डूंगरपुर, फिरोजाबाद, गंगटोक, गया, गोरखपुर, गुरूग्राम, गुवाहाटी, हल्दिया, हापुड, हावड़ा, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, झालावाड़, कलबुर्गी, कारवार, काशीपुर, कटनी, खन्ना, खुर्जा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोप्पल, कुंजेमुरा, लातूर, मदुरै, महाड, मंगलौर, मंगुराहा, मेरठ, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, मैसूर, नागपट्टिनम, नागौर आदि शामिल थे।
अच्छी खबर यह है कि कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में तीन फीसदी से ज्यादा का इजाफा हुआ है।
राजधानी दिल्ली की बात करें तो लगातार तीसरे दिन प्रदूषण में गिरावट आई है, जिसके साथ ही वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक सुधरकर 72 पर पहुंच गया है।
दिल्ली की तरह ही आज देश के छोटे-बड़े 90 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इन शहरों में हैदराबाद, जयपुर, जलना, जालौर, झांसी, झुंझुनूं, जोधपुर, जोरापोखर, कानपुर, करौली, करूर, कटिहार, क्योंझर, किशनगंज, कोहिमा, कोटा, लखनऊ, लुधियाना, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नगांव, नागपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, नोएडा, पाली, पटना, पिंपरी-चिंचवाड, पीथमपुर, पुणे, राजमहेंद्रवरम शामिल थे।
कल से देखें तो देश में संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में पांच फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है।
वहीं दूसरी तरफ आज देश के नौ शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में रिकॉर्ड की गई। इन शहरों में बद्दी, बर्नीहाट, छपरा, एलूर, गुम्मिडिपूंडी, जैसलमेर, कांचीपुरम, रूपनगर, समस्तीपुर शामिल हैं। अच्छी खबर यह है कि कल से देश में मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में करीब 36 फीसदी की गिरावट आई है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 223 में से 123 शहरों में हवा 'बेहतर' (0-50 के बीच) है। 90 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 29 अगस्त 2025 को यह आंकड़ा 95 दर्ज किया गया था।
9 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में नंदेसरी (285) में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां एक्यूआई 300 के करीब पहुंच गया। कल अगरतला में वायु गुणवत्ता सूचकांक 331 रिकॉर्ड किया गया।
आंकड़ों पर गौर करें तो कल से दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में गिरावट आई है। इसके साथ दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक सुधरकर 72 पर पहुंच गया। मलतब की दिल्ली में वायु गुणवत्ता संतोषजनक श्रेणी में बनी हुई है। वहीं आज फिर सीपीसीबी ने फरीदाबाद के वायु गुणवत्ता से जुड़े आंकड़े साझा नहीं किए हैं।
गौरतलब है कि पिछले दो-तीन महीनों में जून, जुलाई और अगस्त के दौरान दिल्ली की वायु गुणवत्ता ज्यादातर दिन संतोषजनक रही। वहीं जनवरी, फरवरी, मार्च और अप्रैल 2025 में एक भी दिन ऐसा नहीं रहा जब दिल्ली की हवा साफ कही जा सके। नवंबर में आठ दिन दिल्ली में वायु गुणवत्ता का स्तर 'गंभीर' दर्ज किया गया। इसी तरह दिसंबर 2024 में भी छह दिन वायु गुणवत्ता गंभीर दर्ज की गई थी। इस दौरान हवा में प्रदूषण का स्तर इतना ज्यादा था कि लोगों के लिए सांस लेना तक मुश्किल हो गया।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में आज एलूर चौथे स्थान पर है, वहीं बर्नीहाट (140) दूसरे, जबकि कांचीपुरम (129) तीसरे स्थान पर है।
अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 58, गाजियाबाद में 61, गुवाहाटी में 49, गुरूग्राम में 45, नोएडा में 54, ग्रेटर नोएडा में 100 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 40 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 61, चेन्नई में 72, चंडीगढ़ में 43, हैदराबाद में 57, जयपुर में 68 और पटना में 58 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 123 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अगरतला, अकोला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अररिया, अरियालूर, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बागलकोट, बालासोर, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बारीपदा, बैरकपुर, बठिंडा, बेलापुर, भरतपुर, भिलाई, भीलवाड़ा, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिलासपुर, बोईसर, बुलन्दशहर, बूंदी, ब्यासनगर, चंडीगढ़, चेंगलपट्टू, चिकबलपुर, चिक्कामगलुरु, चित्तौड़गढ़, कोयंबटूर, कुड्डालोर, कटक, दमोह, दावनगेरे, देहरादून, डिंडीगुल, डूंगरपुर, फिरोजाबाद, गंगटोक, गया, गोरखपुर, गुरूग्राम, गुवाहाटी, हल्दिया, हापुड, हावड़ा, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, झालावाड़, कलबुर्गी, कारवार, काशीपुर, कटनी, खन्ना, खुर्जा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोप्पल, कुंजेमुरा, लातूर, मदुरै, महाड, मंगलौर, मंगुराहा, मेरठ, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, मैसूर, नागपट्टिनम, नागौर, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, ऊटी, पंचगांव, परभनी, पटियाला, पेरुंदुरई, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुदुचेरी, पुडुकोट्टई, रायपुर, रामनगर, रामनाथपुरम, रतलाम, ऋषिकेश, सलेम, सांगली, सासाराम, शिलांग, शिवमोगा, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिरोही, शिवसागर, सिवान, सोलापुर, सूरत, टेन्सा, तंजावुर, त्रिशूर, तिरुचिरापल्ली, तिरुमाला, तिरुनेलवेली, तिरुपुर, उदयपुर, उल्हासनगर, वाराणसी, विजयपुरा, विरार, विरुधुनगर, वृंदावन, यादगीर शामिल हैं।
वहीं आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अलवर, अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, आरा, औरंगाबाद (बिहार), बरेली, बाड़मेर, बेगूसराय, बेंगलुरु, बेतिया, भागलपुर, भिवाड़ी, भोपाल, बिहार शरीफ, बीकानेर, ब्रजराजनगर, बक्सर, चंद्रपुर, चेन्नई, छाल, चित्तूर, चुरू, दौसा, दिल्ली, धनबाद, धौलपुर, दुर्गापुर, गांधीनगर, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, ग्वालियर, हनुमानगढ़, हैदराबाद, जयपुर, जलना, जालौर, झांसी, झुंझुनूं, जोधपुर, जोरापोखर, कानपुर, करौली, करूर, कटिहार, क्योंझर, किशनगंज, कोहिमा, कोटा, लखनऊ, लुधियाना, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नगांव, नागपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, नोएडा, पाली, पटना, पिंपरी-चिंचवाड, पीथमपुर, पुणे, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजसमंद, रानीपेट, राउरकेला, सागर, सहरसा, सवाई माधोपुर, सीकर, सिंगरौली, श्री गंगानगर, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, तिरुपति, तुमिडीह, वापी, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम आदि 90 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।