जहरीली हवा की चपेट में ग्रेटर नोएडा: 297 पर पहुंचा एक्यूआई, कोरबा-मदिकेरी सबसे साफ

सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश के 248 में से करीब एक-चौथाई शहर प्रदूषित हवा की चपेट में हैं, जबकि ग्रेटर नोएडा सबसे प्रदूषित और कोरबा सबसे साफ शहर रहा।
भारत की 96 फीसदी आबादी यानी 133 करोड़ लोग ऐसी हवा में सांस लेने को मजबूर हैं जहां पीएम 2.5 का वार्षिक औसत स्तर डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी मानकों से सात गुणा खराब है; फोटो: आईस्टॉक
भारत की 96 फीसदी आबादी यानी 133 करोड़ लोग ऐसी हवा में सांस लेने को मजबूर हैं जहां पीएम 2.5 का वार्षिक औसत स्तर डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी मानकों से सात गुणा खराब है; फोटो: आईस्टॉक
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सारांश
  • देश में मानसून के बीच हवा की तस्वीर एक बार फिर तेजी से बदली है। 17 जुलाई 2026 को सरकारी आंकड़ों के अनुसार ग्रेटर नोएडा देश का सबसे प्रदूषित शहर बन गया, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 297 दर्ज किया गया।

  • महज 24 घंटों में यहां प्रदूषण 48 अंक बढ़ गया और पीएम10 के महीन कणों ने हवा को इस कदर जहरीला बना दिया कि प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 550 फीसदी अधिक पहुंच गया।

  • इसके विपरीत, छत्तीसगढ़ का कोरबा और कर्नाटक का मदिकेरी सबसे स्वच्छ शहरों में शामिल रहे, जहां हवा सांस लेने के लिए सबसे बेहतर रही।

  • सरकारी विश्लेषण बताता है कि देश के 248 शहरों में से लगभग एक-चौथाई (24.6 फीसदी) शहर अभी भी प्रदूषित हवा की चपेट में हैं, जबकि करीब आधे शहरों में हवा संतोषजनक और 64 शहरों में साफ दर्ज की गई।

  • हरियाणा के छह शहर देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल होना गंभीर चिंता का संकेत है।

  • विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदूषण में यह उतार-चढ़ाव बताता है कि मानसून के दौरान भी वायु गुणवत्ता पर लगातार निगरानी और स्थानीय प्रदूषण स्रोतों पर सख्त नियंत्रण जरूरी है, क्योंकि जहरीली हवा का असर सबसे पहले लोगों की सांसों और स्वास्थ्य पर पड़ता है।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 17 जुलाई 2026 को देश में ग्रेटर नोएडा सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 297 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (16 जुलाई) को ग्रेटर नोएडा में सूचकांक 249 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में 48 अंकों का इजाफा हुआ है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि ग्रेटर नोएडा की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

ग्रेटर नोएडा में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 550 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में कोरबा की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 20 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर ग्रेटर नोएडा की तुलना कोरबा से करें तो वहां स्थिति 14.8 गुणा खराब है।

इससे पहले कल देश में पंचगांव की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 267 दर्ज किया गया। हालांकि आज 14 अंकों के सुधार के साथ सूचकांक 253 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां सुधार के बावजूद वायु गुणवत्ता ‘खराब’ श्रेणी में बनी हुई है। 

दिल्ली में कल से प्रदूषण में मामूली बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 176 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 177 पर पहुंच गया। मतलब की 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में एक अंक का उछाल आया है। दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।  

2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 16 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 12 जून 2026 को सूचकांक 73 और 30 मई को 85 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 05 मई को सूचकांक 86, जबकि 04 मई को 88 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में कमी दर्ज की गई। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 153 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 134 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 19 अंकों के सुधार के बावजूद फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 17 जुलाई 2026 को 248 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 25.8 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 49.6 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 24.6 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 30.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वहीं दूसरी तरफ संतोषजनक हवा वाले शहरों में 8.2 फीसदी की कमी दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में भी कल से 9.4 फीसदी की कमी देखी गई। दूसरी तरफ खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 30 फीसदी का उछाल आया है, जोकि चिंता का विषय है।   

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में रूपनगर (261) दूसरे जबकि खोरा (259) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह सोनीपत (258) चौथे स्थान पर है। पंचगांव (253) – बहादुरगढ़ (241) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

कैथल (240) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में पानीपत (231), बुलंदशहर (228) और बल्लभगढ़ (227) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के छह शहर (सोनीपत, पंचगांव, बहादुरगढ़, कैथल, पानीपत और बल्लभगढ़) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि रूपनगर, खोरा, सोनीपत, पंचगांव, बहादुरगढ़, कैथल, बल्लभगढ़, चरखी दादरी, मेरठ, गुरुग्राम, जींद, मोदीनगर, आगरा, पाली, जयपुर, फरीदाबाद, अलवर, भिवानी, करनाल, बर्नीहाट (मेघालय) आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं ग्रेटर नोएडा, पानीपत, बुलंदशहर, गाजियाबाद, नोएडा, दिल्ली, हापुड़, फतेहाबाद, मुजफ्फरनगर, श्रीगंगानगर, अंबाला, बद्दी, हिसार, कुरुक्षेत्र, दौसा, विशाखापत्तनम, चुरू, सासाराम, बागपत, मंडी गोबिंदगढ़, गोरखपुर, टोंक, जैसलमेर, छपरा, खैरथल, भिवाड़ी, झुंझुनू, बीकानेर, रायबरेली, रोहतक, सवाई माधोपुर, पटियाला, सिरसा, जालंधर, गुम्मिडीपूंडी, अमृतसर, हनुमानगढ़, लुधियाना, करौली, खुर्जा आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 25.8 फीसदी यानी 64 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बेगूसराय, भिलाई, भुवनेश्वर, ब्रजराजनगर, बक्सर, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, कटक, डोंबिवली, डूंगरपुर, गडग, गया, गुंटूर, हल्दिया, हिंगोली, हावड़ा, हैदराबाद, जबलपुर, जलगांव, जलना, कलबुर्गी, कारवार, क्योंझर, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोप्पल, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, मदिकेरी, महाड, मैहर, मंगलौर, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, नवी मुंबई, पिंपरी-चिंचवाड़, पुडुचेरी, रायपुर, रायरंगपुर, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, सांगली, शिलांग, सोलापुर आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 123 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बठिंडा, बीड, बेलापुर, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भोपाल, बिलाईपाड़ा, बोइसर, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चंद्रपुर, चेन्नई, छाल, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कुड्डालोर, दमोह, देवास, धनबाद, धारवाड़, धौलपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हुबली, इंदौर, जालौर, झालावाड़, झांसी, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कल्याण, कानपुर, कटिहार, कटनी, खन्ना, कोटा, लखनऊ, मछलीपट्टनम, मालेगांव, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मेहसाणा, मुरादाबाद, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागौर, नागपुर, नांदेड़, नारनौल, नासिक, नेल्लोर, पलवल, पंपोर, पंचकुला, परभणी, पटना, पीथमपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, राउरकेला, सागर, समस्तीपुर, सतना, शिवमोगा, सीकर, सिलचर, सिंगरौली, सिरोही, शिवसागर आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 48 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें आगरा, अलवर, अंबाला, अमृतसर, बद्दी, बागपत, भिवाड़ी, भिवानी, बीकानेर, बर्नीहाट (मेघालय), छपरा, चुरू, दौसा, दिल्ली, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, हनुमानगढ़, हापुड़, हिसार, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, झुंझुनू, जींद, करौली, करनाल, खैरथल, खुर्जा, कुरुक्षेत्र, लुधियाना, मंडी गोबिंदगढ़, मोदीनगर, मुजफ्फरनगर, नोएडा, पाली, पटियाला, रायबरेली, रोहतक, सासाराम, सवाई माधोपुर, सिलीगुड़ी, सिरसा, श्रीगंगानगर, टोंक, विशाखापत्तनम आदि शामिल हैं।

इसी तरह बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बुलंदशहर, चरखी दादरी, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, कैथल, खोरा, मेरठ, पंचगांव, पानीपत, रूपनगर, सोनीपत में स्थिति खराब दर्ज की गई है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 248 में से 64 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 123 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 16 जुलाई को यह आंकड़ा 134 दर्ज किया गया था।

48 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज ग्रेटर नोएडा में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 297 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (16 जुलाई) को ग्रेटर नोएडा में सूचकांक 249 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में 48 अंकों का इजाफा हुआ है।

इससे पहले कल देश में पंचगांव की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 267 दर्ज किया गया। हालांकि आज 14 अंकों के सुधार के साथ सूचकांक 253 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां सुधार के बावजूद वायु गुणवत्ता ‘खराब’ श्रेणी में बनी हुई है।         

दिल्ली में कल से प्रदूषण में मामूली बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 176 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 177 पर पहुंच गया। मतलब की 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में एक अंक का उछाल आया है। दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।  

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में कमी दर्ज की गई। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 153 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 134 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 19 अंकों के सुधार के बावजूद फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 17 जुलाई को सोनीपत (258) चौथे स्थान पर है, वहीं रूपनगर (261) दूसरे, जबकि खोरा (259) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 84, गाजियाबाद में 220, गुवाहाटी में 80, गुरूग्राम में 198, नोएडा में 198, ग्रेटर नोएडा में 297 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 54 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 63, चेन्नई में 88, चंडीगढ़ में 62, हैदराबाद में 49, जयपुर में 136 और पटना में 62 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 64 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अहमदनगर, आइजोल, अररिया, बदलापुर, बारबिल, बारीपाड़ा, बैरकपुर, बेगूसराय, भिलाई, भुवनेश्वर, ब्रजराजनगर, बक्सर, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, कटक, डोंबिवली, डूंगरपुर, गडग, गया, गुंटूर, हल्दिया, हिंगोली, हावड़ा, हैदराबाद, जबलपुर, जलगांव, जलना, कलबुर्गी, कारवार, क्योंझर, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोप्पल, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, मदिकेरी, महाड, मैहर, मंगलौर, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, नवी मुंबई, पिंपरी-चिंचवाड़, पुडुचेरी, रायपुर, रायरंगपुर, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, सांगली, शिलांग, सोलापुर, सुआकाती, टेन्सा, ठाणे, त्रिशूर, तुमडीह, उल्हासनगर, विजयपुरा, यादगीर शामिल हैं।

वहीं अगरतला, अहमदाबाद, अजमेर, अकोला, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बागलकोट, बालासोर, बांसवाड़ा, बारां, बरेली, बाड़मेर, बठिंडा, बीड, बेलापुर, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भोपाल, बिलाईपाड़ा, बोइसर, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चंद्रपुर, चेन्नई, छाल, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कुड्डालोर, दमोह, देवास, धनबाद, धारवाड़, धौलपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हुबली, इंदौर, जालौर, झालावाड़, झांसी, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कल्याण, कानपुर, कटिहार, कटनी, खन्ना, कोटा, लखनऊ, मछलीपट्टनम, मालेगांव, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मेहसाणा, मुरादाबाद, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागौर, नागपुर, नांदेड़, नारनौल, नासिक, नेल्लोर, पलवल, पंपोर, पंचकुला, परभणी, पटना, पीथमपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, राउरकेला, सागर, समस्तीपुर, सतना, शिवमोगा, सीकर, सिलचर, सिंगरौली, सिरोही, शिवसागर, श्रीनगर, सूरत, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, तिरुमाला, तिरुपति, तुमकुरु, उदयपुर, उज्जैन, वडोदरा, वापी, वाराणसी, वातवा, विजयवाड़ा, विरार, वृंदावन, यमुना नगर आदि 123 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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