254 शहरों के आंकड़ों ने खोली प्रदूषण की पोल, पंचगांव में 378 एक्यूआई, आधे से ज्यादा शहरों की हवा चिंताजनक

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में बड़ौत (328) दूसरे जबकि हापुड़ तीसरे स्थान पर है। इसी तरह बागपत (282) चौथे स्थान पर है। मेरठ (281) – मानेसर (271) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है
बढ़ते प्रदूषण के साथ हवा में घुला जहर लोगों को बहुत ज्यादा बीमार बना रहा है, बच्चे और बुजुर्ग इसका सबसे ज्यादा शिकार बन रहे हैं; फोटो: आईस्टॉक
बढ़ते प्रदूषण के साथ हवा में घुला जहर लोगों को बहुत ज्यादा बीमार बना रहा है, बच्चे और बुजुर्ग इसका सबसे ज्यादा शिकार बन रहे हैं; फोटो: आईस्टॉक
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सारांश
  • 22 अक्टूबर 2026 को देश के 254 शहरों के वायु गुणवत्ता आंकड़ों ने प्रदूषण की गंभीर तस्वीर सामने रखी।

  • सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण के मुताबिक, देश के आधे से ज्यादा यानी 51.6 फीसदी शहरों में हवा की गुणवत्ता चिंताजनक बनी हुई है।

  • इस बीच हरियाणा के पंचगांव में प्रदूषण ने अचानक खतरनाक छलांग लगाई। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) एक दिन में 88 से बढ़कर 378 पर पहुंच गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। यानी महज 24 घंटे में एक्यूआई 290 अंक बढ़ गया।

  • पंचगांव के साथ बड़ौत और हापुड़ भी देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहे, जहां एक्यूआई क्रमशः 328 दर्ज किया गया। इसके उलट, आइजोल में एक्यूआई महज 20 रहा और वहां देश की सबसे साफ हवा दर्ज की गई।

  • आंकड़े बताते हैं कि 254 शहरों में केवल 25 की हवा साफ रही, जबकि 98 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक और 111 में मध्यम श्रेणी में दर्ज की गई। हालांकि, खराब हवा वाले शहरों की संख्या पिछले दिन के 24 से घटकर 17 रह गई।

  • दिल्ली में भी एक्यूआई 245 से गिरकर 223 पर आया, लेकिन हवा अब भी खराब श्रेणी में बनी हुई है। ये आंकड़े बताते हैं कि कुछ शहरों में सुधार के बावजूद देश के बड़े हिस्से में वायु प्रदूषण अब भी स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 22 अक्टूबर 2026 को देश में पंचगांव सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 378 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (21 अक्टूबर) को पंचगांव में सूचकांक 88 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 290 अंकों का भारी उछाल आया है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि पंचगांव की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

पंचगांव में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,400 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में आइजोल की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 20 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर पंचगांव की तुलना आइजोल से करें तो वहां स्थिति 18.9 गुणा खराब है।

इससे पहले कल खोरा में एक्यूआई 317 दर्ज किया गया। हालांकि आज 60 अंकों के भारी सुधार के साथ वहां सूचकांक घटकर 257 पर पहुंच गया है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 245 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 223 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 22 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में बनी हुई है।

2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 06 सितम्बर को 55 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64  दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल एक्यूआई 123 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 117 दर्ज किया गया। मतबल की कल से वहां प्रदूषण में 6 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही वहां वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

प्रदूषण के बदलते समीकरण

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 22 अक्टूबर 2026 को 254 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 9.8 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 38.6 फीसदी में स्थिति संतोषजनक, जबकि दूसरी तरफ 51.6 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा चिंताजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 13.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 11.7 फीसदी की कमी दर्ज की गई। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में भी कल से 13.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वहीं आज 17 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब दर्ज की गई, जबकि कल इन शहरों की गिनती 24 रिकॉर्ड की गई थी।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में बड़ौत (328) दूसरे जबकि हापुड़ तीसरे स्थान पर है। इसी तरह बागपत (282) चौथे स्थान पर है। मेरठ (281) – मानेसर (271) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

खोरा (257) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में चरखी दादरी (246), अंगुल (244) और करनाल (242) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के चार शहर (पंचगांव, मानेसर, चरखी दादरी, करनाल) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि पंचगांव, बड़ौत, हापुड़, बागपत, मेरठ, मानेसर, खोरा, चरखी दादरी, करनाल, नोएडा, गजरौला, खैरथल, दिल्ली, यमुना नगर, भिवाड़ी, गुरुग्राम, खुर्जा, हिंगोली, बहादुरगढ़, कोटा, अंबाला, बल्लभगढ़, कानपुर, हनुमानगढ़, राजकोट, लखनऊ, मेहसाणा, भावनगर, मुजफ्फरनगर, आगरा, मालेगांव, जयपुर, कैथल, चंद्रपुर, मंडीखेड़ा, पीथमपुर, मथुरा, जालना, जालंधर, रोहतक, मुरादाबाद, भिवंडी, मोतिहारी, सिवान, बठिंडा, नागपुर, गुम्मिडीपूंडी, सोनीपत, अररिया, डूंगरपुर, नासिक, अलवर, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), अंकलेश्वर, गया, धारूहेड़ा, हाजीपुर, पानीपत, पटना और हावड़ा आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, बीकानेर, श्री गंगानगर, बुलंदशहर, सीकर, सिरसा, ग्वालियर, दौसा, बर्नीहाट (मेघालय), वृंदावन, पारादीप, नागौर, सवाई माधोपुर, बिलाईपाड़ा, टोंक, नारनौल, अगरतला, जालोर, चूरू, सतारा, पुणे, भरतपुर, जोधपुर, झुंझुनू, बेलापुर, बूंदी, पिंपरी-चिंचवाड़, धौलपुर, जैसलमेर, भिवानी, मंडी गोबिंदगढ़, फतेहाबाद, वाराणसी, अहमदाबाद, धुले, करौली, वातवा, बद्दी, फरीदाबाद, पाली, उल्हासनगर, कटनी, लुधियाना, भीलवाड़ा, उदयपुर, महाड, विशाखापत्तनम, गांधीनगर, अहमदनगर, अंबरनाथ, नवी मुंबई, श्रीकाकुलम, ठाणे, राजमहेंद्रवरम, जबलपुर, जलगांव, झांसी, मुंबई, शामली, बरेली, गोरखपुर और सूरत आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 9.8 फीसदी यानी 25 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में गंगटोक, कलबुर्गी, किशनगंज, कोरबा, कुंजेमुरा, लेह, मदिकेरी, मैसूरु, नाहरलागुन, पंचकूला, पुडुचेरी, राजगीर, रामनगर, ऋषिकेश, शिलांग, शिवमोगा, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 98 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें अमृतसर, अनंतपुर, आसनसोल, औरंगाबाद (बिहार), बदलापुर, बागलकोट, बांसवाड़ा, बरबिल, बारीपाड़ा, बैरकपुर, बेगूसराय, बेलगाम, बेंगलुरु, भागलपुर, भिलाई, भोपाल, बिलासपुर, बोइसर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चेन्नई, छाल, चित्तूर, कटक, दरभंगा, देहरादून, देवास, धारवाड़, डोंबिवली, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गुंटूर, गुवाहाटी, हल्दिया, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जोरापोखर, कडप्पा, कल्याण, कन्नूर, कारवार, कटिहार, क्योंझर, खन्ना, कोहिमा, कोलार, कोलकाता, कोप्पल, कुरनूल, लातूर, मैहर, मंगलौर, मंगुराहा, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुजफ्फरपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, नयागढ़, नेल्लोर, परभणी, पटियाला, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पूर्णिया, रायबरेली, रायपुर, रायरंगपुर, राजसमंद, रतलाम, राउरकेला, रूपनगर, सागर, सांगली, सतना, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिरोही, शिवसागर आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 111 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अलवर, अंबाला, अंबरनाथ, अंकलेश्वर, अररिया, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बहादुरगढ़, बालासोर, बल्लभगढ़, बरेली, बाड़मेर, बठिंडा, बेलापुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भिवानी, भुवनेश्वर, बिलाईपाड़ा, बुलंदशहर, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट (मेघालय), चंद्रपुर, चित्तौड़गढ़, चूरू, दौसा, धारूहेड़ा, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हिंगोली, हावड़ा, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, जलना, जालोर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, कैथल, कानपुर, करौली, कटनी, खुर्जा, कोटा, लखनऊ, लुधियाना, महाद, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मथुरा, मेहसाणा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरनगर, नागौर, नागपुर, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, पाली, पानीपत, पारादीप, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, पुणे, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, रोहतक, सतारा, सवाई माधोपुर, शामली, सीकर, सिरसा, सिवान, सोनीपत, श्रीकाकुलम, सूरत, ठाणे, टोंक, उदयपुर, उज्जैन, उल्हासनगर, वाराणसी, वातवा, विशाखापत्तनम और वृंदावन शामिल हैं।

इसी तरह अंगुल, बागपत, भिवाड़ी, बीकानेर, चरखी दादरी, दिल्ली, गजरौला, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, करनाल, खैरथल, खोरा, मानेसर, मेरठ, नोएडा, श्री गंगानगर और यमुना नगर में स्थिति खराब जबकि पंचगांव (378), बड़ौत (328) और हापुड़ (328) में बेहद खराब दर्ज की गई है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 254 में से 25 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 98 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 21 अक्टूबर को यह आंकड़ा 111 दर्ज किया गया था।

98 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज पंचगांव में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 378 दर्ज किया गया, जोकि ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (21 अक्टूबर) को पंचगांव में सूचकांक 88 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 290 अंकों का भारी उछाल आया है।

इससे पहले कल खोरा में एक्यूआई 317 दर्ज किया गया। हालांकि आज 60 अंकों के भारी सुधार के साथ वहां सूचकांक घटकर 257 पर पहुंच गया है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 245 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 223 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 22 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में बनी हुई है।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल एक्यूआई 123 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 117 दर्ज किया गया। मतबल की कल से वहां प्रदूषण में 6 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही वहां वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 22 अक्टूबर को बागपत (282) चौथे स्थान पर है, वहीं बड़ौत (328) दूसरे, जबकि हापुड़ तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 181, गाजियाबाद में 221, गुवाहाटी में 74, गुरूग्राम में 193, नोएडा में 242, ग्रेटर नोएडा में 219 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 102 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 163, चेन्नई में 52, चंडीगढ़ में 63, हैदराबाद में 76, जयपुर में 146 और पटना में 104 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 25 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में आइजोल, बेतिया, बक्सर, चामराजनगर, चिक्काबल्लापुर, कोयंबटूर, गंगटोक, कलबुर्गी, किशनगंज, कोरबा, कुंजेमुरा, लेह, मदिकेरी, मैसूरु, नाहरलागुन, पंचकूला, पुडुचेरी, राजगीर, रामनगर, ऋषिकेश, शिलांग, शिवमोगा, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम और विजयपुरा शामिल हैं।

वहीं अजमेर, अकोला, अमरावती (आंध्र प्रदेश), अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, आसनसोल, औरंगाबाद (बिहार), बदलापुर, बागलकोट, बांसवाड़ा, बरबिल, बारीपाड़ा, बैरकपुर, बेगूसराय, बेलगाम, बेंगलुरु, भागलपुर, भिलाई, भोपाल, बिलासपुर, बोइसर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चेन्नई, छाल, चित्तूर, कटक, दरभंगा, देहरादून, देवास, धारवाड़, डोंबिवली, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गुंटूर, गुवाहाटी, हल्दिया, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जोरापोखर, कडप्पा, कल्याण, कन्नूर, कारवार, कटिहार, क्योंझर, खन्ना, कोहिमा, कोलार, कोलकाता, कोप्पल, कुरनूल, लातूर, मैहर, मंगलौर, मंगुराहा, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुजफ्फरपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, नयागढ़, नेल्लोर, परभणी, पटियाला, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पूर्णिया, रायबरेली, रायपुर, रायरंगपुर, राजसमंद, रतलाम, राउरकेला, रूपनगर, सागर, सांगली, सतना, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिरोही, शिवसागर, सोलापुर, सुआकाती, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, तुमडीह, उडुपी, वडोदरा, वापी, विजयवाड़ा, विरार और यादगीर आदि 98 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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