

17 सितंबर 2026 को देश की हवा में प्रदूषण का नक्शा तेजी से बदलता नजर आया।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के 245 शहरों के आंकड़ों के विश्लेषण में कुड्डालोर 222 के एक्यूआई के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा। यहां पीएम10 प्रदूषण हावी रहा और एक्यूआई ‘खराब’ श्रेणी में दर्ज किया गया।
कुड्डालोर में प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 390 फीसदी अधिक रहा। इसके विपरीत मध्य प्रदेश का दमोह 14 के एक्यूआई के साथ सबसे साफ शहर रहा।
एक दिन पहले 300 एक्यूआई के साथ सबसे प्रदूषित रहा लेह आज 106 अंकों के सुधार के बाद 194 पर आ गया। वहीं दिल्ली में भी प्रदूषण बढ़ा और एक्यूआई 94 से बढ़कर 106 पहुंच गया, जबकि फरीदाबाद में यह 110 से बढ़कर 119 हो गया।
देश के 245 शहरों में 65 शहरों की हवा ‘बेहतर’, 139 की ‘संतोषजनक’ और 38 की ‘मध्यम’ रही, जबकि कुड्डालोर, मोदीनगर और ग्रेटर नोएडा में हवा ‘खराब’ दर्ज की गई। आंकड़े बताते हैं कि पीएम2.5 और पीएम10 कई शहरों में वायु प्रदूषण के प्रमुख कारण बने हुए हैं।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 17 सितम्बर 2026 को देश में कुड्डालोर सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 222 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (16 सितम्बर) सरकारी आंकड़ों में कुड्डालोर का जिक्र नहीं था।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि कुड्डालोर की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
कुड्डालोर में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 390 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में दमोह की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 14 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर कुड्डालोर की तुलना दमोह से करें तो वहां स्थिति 15.8 गुणा खराब है।
इससे पहले कल देश में लेह की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 300 रिकॉर्ड किया गया। हालांकि आज 106 अंकों के भारी सुधार के साथ लेह में सूचकांक घटकर 194 पर पहुंच गया है। मतलब की वहां वायु गुणवत्ता आज खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 94 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 106 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 12 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में पहुंच गई।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 07-17 सितम्बर को 63 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से वायु गुणवत्ता सूचकांक में वृद्धि हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 110 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 119 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 9 अंकों के उछाल के बावजूद फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 17 सितम्बर 2026 को 245 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 26.5 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 56.7 फीसदी में स्थिति संतोषजनक, जबकि दूसरी तरफ 16.7 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 4.4 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 3.7 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से करीब 31 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जोकि चिंता का विषय है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में मोदीनगर (207) दूसरे जबकि ग्रेटर नोएडा (205) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह लेह (194) चौथे स्थान पर है। पानीपत (193) – कैथल (165) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
बुलंदशहर (151) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में ब्रजराजनगर (150), बर्नीहाट (मेघालय) (148) और गजरौला (144) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के चार शहर (मोदीनगर, ग्रेटर नोएडा, बुलंदशहर, गजरौला) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि पानीपत, बर्नीहाट (मेघालय), गजरौला, मंडी गोबिंदगढ़, पीथमपुर, यमुना नगर, मानेसर, तालचेर, बिलाईपाड़ा, मेरठ और दुर्गापुर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं। वहीं कुड्डालोर, ग्रेटर नोएडा, बुलंदशहर, ब्रजराजनगर, नोएडा, बारबिल, अमरावती (आंध्र प्रदेश), फरीदाबाद, चेन्नई, खैरथल, फतेहाबाद, अंबाला, छपरा, भिवाड़ी, अलवर, जैसलमेर, मुजफ्फरनगर, बागपत, बहादुरगढ़, गाजियाबाद, पाली और शामली आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 26.5 फीसदी यानी 65 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में धौलपुर, धुले, डोंबिवली, फिरोजाबाद, गंगटोक, गया, ग्वालियर, इंदौर, जालौर, कलबुर्गी, करौली, करनाल, कोल्हापुर, कोटा, कुरनूल, लातूर, मदिकेरी, महाद, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नासिक, पंचगांव, पटियाला, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, राजगीर, राजसमंद, रतलाम, ऋषिकेश, सागर, सांगली आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 139 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवानी, भुवनेश्वर, बीकानेर, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंद्रपुर, चरखी दादरी, छाल, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कटक, दौसा, देहरादून, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, डूंगरपुर, एलुरु, गांधीनगर, गुंटूर, गुरुग्राम, गुवाहाटी, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हापुड़, हिंगोली, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जयपुर, जालंधर, जलगांव, जलना, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, काकीनाडा, कल्याण, कानपुर, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मंगुराहा, मथुरा, मेहसाणा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मैसूरु, नागांव, नागौर, नागपुर, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, नवी मुंबई, नयागढ़, नेल्लोर, पलवल, पंचकुला, पारादीप, परभणी, पटना, प्रतापगढ़, पुडुचेरी आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 38 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अलवर, अमरावती (आंध्र प्रदेश), अंबाला, बागपत, बहादुरगढ़, बारबिल, भिवाड़ी, बिलाईपाड़ा, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बर्नीहाट (मेघालय), चेन्नई, छपरा, दिल्ली, धनबाद, दुर्गापुर, एलूर, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गजरौला, गाजियाबाद, हिसार, जैसलमेर, कैथल, खैरथल, लेह, मंडी गोबिंदगढ़, मानेसर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, नोएडा, पाली, पानीपत, पीथमपुर, शामली, सिंगरौली, तालचेर और यमुना नगर शामिल हैं।
वहीं कुड्डालोर (222), मोदीनगर (207) और ग्रेटर नोएडा (205) में स्थिति 'खराब' दर्ज की गई है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 245 में से 65 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 139 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 16 सितम्बर को भी यह आंकड़ा 134 दर्ज किया गया था।
38 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज कुड्डालोर में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 222 दर्ज किया गया, जोकि ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (16 सितम्बर) को सरकारी आंकड़ों में कुड्डालोर का जिक्र नहीं था।
इससे पहले कल देश में लेह की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 300 रिकॉर्ड किया गया। हालांकि आज 106 अंकों के भारी सुधार के साथ लेह में सूचकांक घटकर 194 पर पहुंच गया है। मतलब की वहां वायु गुणवत्ता आज खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 94 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 106 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 12 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में पहुंच गई।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से वायु गुणवत्ता सूचकांक में वृद्धि हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 110 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 119 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 9 अंकों के उछाल के बावजूद फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 17 सितम्बर को लेह (194) चौथे स्थान पर है, वहीं मोदीनगर (207) दूसरे, जबकि ग्रेटर नोएडा (205) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 50, गाजियाबाद में 102, गुवाहाटी में 53, गुरूग्राम में 90, नोएडा में 138, ग्रेटर नोएडा में 205 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 40 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 79, चेन्नई में 113, चंडीगढ़ में 41, हैदराबाद में 54, जयपुर में 82 और पटना में 60 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 65 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में अहमदनगर, आइजोल, अजमेर, अकोला, अमरावती (महाराष्ट्र), आरा, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बारां, बाड़मेर, बीड, बेतिया, भिलाई, भिवंडी, भोपाल, बिलासपुर, बोइसर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चिक्काबल्लापुर, दमोह, धौलपुर, धुले, डोंबिवली, फिरोजाबाद, गंगटोक, गया, ग्वालियर, इंदौर, जालौर, कलबुर्गी, करौली, करनाल, कोल्हापुर, कोटा, कुरनूल, लातूर, मदिकेरी, महाद, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नासिक, पंचगांव, पटियाला, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, राजगीर, राजसमंद, रतलाम, ऋषिकेश, सागर, सांगली, सासाराम, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिरोही, शिवसागर, सोलापुर, तिरुवनंतपुरम, उल्हासनगर और यादगीर शामिल हैं।
वहीं अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अंबरनाथ, अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, आसनसोल, बद्दी, बालासोर, बरेली, बारीपाड़ा, बैरकपुर, बठिंडा, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवानी, भुवनेश्वर, बीकानेर, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंद्रपुर, चरखी दादरी, छाल, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कटक, दौसा, देहरादून, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, डूंगरपुर, एलुरु, गांधीनगर, गुंटूर, गुरुग्राम, गुवाहाटी, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हापुड़, हिंगोली, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जयपुर, जालंधर, जलगांव, जलना, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, काकीनाडा, कल्याण, कानपुर, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मंगुराहा, मथुरा, मेहसाणा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मैसूरु, नागांव, नागौर, नागपुर, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, नवी मुंबई, नयागढ़, नेल्लोर, पलवल, पंचकुला, पारादीप, परभणी, पटना, प्रतापगढ़, पुडुचेरी, पुणे, पूर्णिया, रायबरेली, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, रामनगर, रोहतक, रूपनगर, सतारा, सतना, सवाई माधोपुर, शिवमोगा, सीकर, सिरसा, सोनीपत, श्री गंगानगर, सूरत, ठाणे, तिरुमाला, टोंक, तुमडीह, उदयपुर, उज्जैन, वडोदरा, वाराणसी, वातवा, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम और वृंदावन आदि 139 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
देश में वायु गुणवत्ता की ताजा जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर से प्राप्त कर सकते हैं