

09 अक्टूबर 2026 को देश में वायु प्रदूषण की स्थिति ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के बागपत में महज 24 घंटे के भीतर वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 188 से उछलकर 271 पर पहुंच गया। यानी प्रदूषण में 83 अंकों की भारी वृद्धि हुई और बागपत देश का सबसे प्रदूषित शहर बन गया।
यहां हवा में पीएम10 कणों का दबदबा है और प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की सुरक्षित सीमा से करीब पांच गुना अधिक दर्ज किया गया। इसके उलट, कर्नाटक के गडग में एक्यूआई महज 19 रहा, जिससे दोनों शहरों की वायु गुणवत्ता में 14 गुना से अधिक का अंतर सामने आया।
प्रदूषण का दबाव दिल्ली-एनसीआर और आसपास के शहरों में भी बना हुआ है। बहादुरगढ़ में एक्यूआई 238, ग्रेटर नोएडा में 231 और पानीपत में 225 दर्ज किया गया।
दिल्ली में भी पिछले 24 घंटों के दौरान एक्यूआई 162 से बढ़कर 176 पर पहुंच गया, जबकि फरीदाबाद में 144 से घटकर 112 दर्ज हुआ।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 265 शहरों के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि, केवल 35 शहरों में हवा बेहतर रही, जबकि 94 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम और पांच शहरों में खराब श्रेणी में दर्ज की गई।
देश के करीब 37.4 फीसदी शहरों में हवा की गुणवत्ता चिंताजनक बनी हुई है। ये आंकड़े बताते हैं कि प्रदूषण का संकट केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं है; छोटे शहरों की हवा भी तेजी से बिगड़ रही है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 09 अक्टूबर 2026 को देश में बागपत सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 271 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (08 अक्टूबर) को बागपत में सूचकांक 188 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 83 अंकों का भारी उछाल आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि बागपत की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
बागपत में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 500 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में गडग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 19 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर बागपत की तुलना गडग से करें तो वहां स्थिति 14.2 गुणा खराब है।
इससे पहले कल देश में बहादुरगढ़ की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 290 दर्ज किया गया। हालांकि आज 52 अंकों के सुधार के साथ वहां सूचकांक घटकर 238 पर पहुंच गया है। लेकिन वायु गुणवत्ता खराब बनी हुई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में वृद्धि हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 162 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 176 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 14 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 06 सितम्बर को 55 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल एक्यूआई 144 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 112 पर पहुंच गया। मतबल की कल से वहां प्रदूषण में 32 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 09 अक्टूबर 2026 को 265 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 13.2 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 49.4 फीसदी में स्थिति संतोषजनक, जबकि दूसरी तरफ 37.4 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 2.9 फीसदी की गिरावट आई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 4.4 फीसदी की कमी दर्ज की गई। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 6.8 फीसदी का इजाफा हुआ है, जोकि चिंता का विषय है। वहीं खराब हवा वाले शहरों की गिनती कल से कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में बहादुरगढ़ (238) दूसरे जबकि ग्रेटर नोएडा (231) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह पानीपत (225) चौथे स्थान पर है। गुरुग्राम (201) – मुजफ्फरनगर (193) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
कैथल (191) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में नोएडा (181), खोरा (180) और गाजियाबाद (179) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के छह शहर (बागपत, ग्रेटर नोएडा, मुजफ्फरनगर, नोएडा, खोरा और गाजियाबाद) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि बहादुरगढ़, पानीपत, गुरुग्राम, मुजफ्फरनगर, कैथल, नोएडा, खोरा, गाजियाबाद, भिवाड़ी, वडोदरा, धारूहेड़ा, मेरठ, कुरुक्षेत्र, बठिंडा, जींद, डोंबिवली, यमुनानगर, चरखी दादरी, मोदीनगर, गजरौला, भावनगर, भिवानी, हापुड़, चंद्रपुर, अंबाला, मथुरा, नागपुर, नंदेसरी, ठाणे, बेलगाम, जालंधर, उज्जैन, गुम्मिडीपूंडी और जयपुर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं बागपत, ग्रेटर नोएडा, अंबरनाथ, मंडीदीप, दिल्ली, दौसा, बल्लभगढ़, फतेहाबाद, तालचेर, सतारा, पीथमपुर, अंकलेश्वर, विशाखापत्तनम, सिरसा, पाली, पिंपरी-चिंचवाड़, बुलंदशहर, जलना, बद्दी, हिसार, सीकर, फतेहपुर सीकरी, हिंगोली, पुणे, वातवा, बेलापुर, उदयपुर, मानेसर, शामली, बीकानेर, खुर्जा, सवाई माधोपुर, अहमदाबाद, नागौर, पारादीप, अगरतला, खैरथल, उल्हासनगर, जोरापोखर, नारनौल, कटनी, मंडी गोबिंदगढ़, भोपाल, लुधियाना, रोहतक, फरीदाबाद, टोंक, बूंदी, छपरा, भरतपुर, बोइसर, जबलपुर, अहमदनगर, जलगांव, श्री गंगानगर, ग्वालियर, देवास, मीरा-भायंदर और सूरत आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 13.2 फीसदी यानी 35 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में भिलाई, बक्सर, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, गडग, गंगटोक, हावेरी, कलबुर्गी, कोरबा, कुरनूल, मदिकेरी, मंडीखेड़ा, नाहरलागुन, पंचगांव, पुडुचेरी, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, रतलाम, ऋषिकेश, शिलांग, शिवमोगा, सिलीगुड़ी, शिवसागर, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम, त्रिशूर आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 131 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बरेली, बाड़मेर, बैरकपुर, बीड, बेंगलुरु, भीलवाड़ा, बिलासपुर, ब्रजराजनगर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चेन्नई, छाल, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, देहरादून, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुंटूर, गुवाहाटी, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जैसलमेर, जालोर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, कडप्पा, काकीनाडा, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, करनाल, कारवार, कटिहार, क्योंझर, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोप्पल, कोटा, कुंजेमुरा, लातूर, लखनऊ, महाड, मैहर, मंगलौर, मंगुराहा, मेहसाणा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नलबाड़ी, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पलवल, पंचकुला, परभणी, पटियाला आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 94 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अगरतला, अहमदाबाद, अहमदनगर, अंबाला, अंबरनाथ, अंगुल, अंकलेश्वर, बद्दी, बल्लभगढ़, बठिंडा, बेलापुर, बेलगाम, भरतपुर, भावनगर, भिवाड़ी, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बीकानेर, बोइसर, बुलंदशहर, बूंदी, चंद्रपुर, चरखी दादरी, छपरा, कटक, दौसा, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, डोंबिवली, एलूर, फरीदाबाद, फतेहाबाद, फतेहपुर सीकरी, गजरौला, गाजियाबाद, गुम्मिडीपूंडी, ग्वालियर, हापुड़, हिंगोली, हिसार, जबलपुर, जयपुर, जालंधर, जलगांव, जलना, जींद, जोरापोखर, कैथल, कटनी, खैरथल, खोरा, खुर्जा, कुरुक्षेत्र, लेह, लुधियाना, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, मानेसर, मथुरा, मेरठ, मीरा-भायंदर, मोदीनगर, मुजफ्फरनगर, नागौर, नागपुर, नंदेसरी, नारनौल, नोएडा, पाली, पारादीप, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, पुणे, रोहतक, सतारा, सवाई माधोपुर, शामली, सीकर, सिरसा, श्री गंगानगर, सूरत, तालचेर, ठाणे, टोंक, उदयपुर, उज्जैन, उल्हासनगर, वडोदरा, वातवा, विशाखापत्तनम, वृंदावन और यमुनानगर शामिल हैं।
वहीं देश में आज बागपत (271), बहादुरगढ़ (238), ग्रेटर नोएडा (231), पानीपत (225), गुरुग्राम (201) में स्थिति खराब है। इन शहरों में सूचकांक 200 से ऊपर दर्ज किया गया है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 265 में से 35 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 131 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 08 अक्टूबर को यह आंकड़ा 137 दर्ज किया गया था।
94 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज बागपत में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 271 दर्ज किया गया, जोकि ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (08 अक्टूबर) को बागपत में सूचकांक 188 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 83 अंकों का भारी उछाल आया है।
इससे पहले कल देश में बहादुरगढ़ की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 290 दर्ज किया गया। हालांकि आज 52 अंकों के सुधार के साथ वहां सूचकांक घटकर 238 पर पहुंच गया है। लेकिन वायु गुणवत्ता खराब बनी हुई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में वृद्धि हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 162 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 176 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 14 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल एक्यूआई 144 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 112 पर पहुंच गया। मतबल की कल से वहां प्रदूषण में 32 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 09 अक्टूबर को पानीपत (225) चौथे स्थान पर है, वहीं बहादुरगढ़ (238) दूसरे, जबकि ग्रेटर नोएडा (231) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 105, गाजियाबाद में 179, गुवाहाटी में 62, गुरूग्राम में 201, नोएडा में 181, ग्रेटर नोएडा में 231 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 99 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 60, चेन्नई में 64, चंडीगढ़ में 67, हैदराबाद में 81, जयपुर में 103 और पटना में 69 दर्ज किया गया।
देश के जिन 35 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में आइजोल, बांसवाड़ा, बारीपदा, बेगूसराय, बेतिया, भागलपुर, भिलाई, बक्सर, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, गडग, गंगटोक, हावेरी, कलबुर्गी, कोरबा, कुरनूल, मदिकेरी, मंडीखेड़ा, नाहरलागुन, पंचगांव, पुडुचेरी, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, रतलाम, ऋषिकेश, शिलांग, शिवमोगा, सिलीगुड़ी, शिवसागर, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम, त्रिशूर और विजयपुरा शामिल हैं।
वहीं आगरा, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्र प्रदेश), अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अररिया, आसनसोल, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बालासोर, बारां, बारबिल, बरेली, बाड़मेर, बैरकपुर, बीड, बेंगलुरु, भीलवाड़ा, बिलासपुर, ब्रजराजनगर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चेन्नई, छाल, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, देहरादून, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुंटूर, गुवाहाटी, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जैसलमेर, जालोर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, कडप्पा, काकीनाडा, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, करनाल, कारवार, कटिहार, क्योंझर, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोप्पल, कोटा, कुंजेमुरा, लातूर, लखनऊ, महाड, मैहर, मंगलौर, मंगुराहा, मेहसाणा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नलबाड़ी, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पलवल, पंचकुला, परभणी, पटियाला, पटना, प्रतापगढ़, प्रयागराज, रायबरेली, रायचूर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, राउरकेला, रूपनगर, सागर, सहरसा, सांगली, सासाराम, सतना, सिलचर, सिरोही, सिवान, सोलापुर, सोनीपत, सुआकाती, टेन्सा, थूथुकुडी, तिरुमाला, तिरुपति, तुमडीह, उडुपी, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, विरार और यादगीर आदि 131 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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