

देश में वायु प्रदूषण का बदलता भूगोल एक बार फिर चिंता बढ़ा रहा है। 08 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 264 शहरों के आंकड़ों के विश्लेषण में बहादुरगढ़ 290 एक्यूआई के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा। यहां प्रदूषण का स्तर लगातार दूसरे दिन बढ़ा और हवा में पीएम2.5 की मौजूदगी हावी रही।
बहादुरगढ़ का प्रदूषण स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 1,800 फीसदी अधिक रहा, जबकि सबसे साफ हवा पुडुचेरी में दर्ज हुई, जहां एक्यूआई महज 19 रहा।
प्रदूषण की गंभीरता इस बात से भी समझी जा सकती है कि देश के सबसे प्रदूषित दस शहरों में हरियाणा के चार शहर—बहादुरगढ़, जींद, सोनीपत और गुरुग्राम—शामिल रहे।
पीथमपुर 277 और जींद 253 एक्यूआई के साथ क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। दूसरी ओर दिल्ली में भी प्रदूषण बढ़ा और एक्यूआई 136 से बढ़कर 162 हो गया, जबकि फरीदाबाद में यह 92 से बढ़कर 144 पहुंच गया।
कुल मिलाकर 264 शहरों में 34 की हवा बेहतर, 137 की संतोषजनक और 88 शहरों की हवा मध्यम श्रेणी में रही।
आंकड़े संकेत देते हैं कि प्रदूषण अब केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं, बल्कि औद्योगिक और छोटे शहरों में भी तेजी से पैर पसार रहा है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 08 अक्टूबर 2026 को देश में एक बार फिर बहादुरगढ़ सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 290 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (07 अक्टूबर) को बहादुरगढ़ में सूचकांक 285 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 5 अंकों का उछाल आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि बहादुरगढ़ की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
बहादुरगढ़ में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,800 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में पुडुचेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 19 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर बहादुरगढ़ की तुलना पुडुचेरी से करें तो वहां स्थिति 15 गुणा खराब है।
इससे पहले कल गाजियाबाद में स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 238 पर पहुंच गया था। हालांकि आज 93 अंकों के भारी सुधार के साथ गाजियाबाद में सूचकांक घटकर 145 पर आ गया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में वृद्धि हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 136 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 162 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 26 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 06 सितम्बर को 55 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। फरीदाबाद में जहां कल एक्यूआई 92 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 144 दर्ज किया गया। मतबल की कल से वहां प्रदूषण में 52 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही वायु गुणवत्ता संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 08 अक्टूबर 2026 को 264 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 12.9 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 51.9 फीसदी में स्थिति संतोषजनक, जबकि दूसरी तरफ 35.2 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 17.2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 2.2 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 6 फीसदी का इजाफा हुआ है, जोकि चिंता का विषय है। वहीं खराब हवा वाले शहरों की गिनती छह से आज एक बार फिर पांच पर आ गई है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में पीथमपुर (277) दूसरे जबकि जींद (253) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह डोंबिवली (207) चौथे स्थान पर है। वडोदरा – सूरत (196) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
सोनीपत (195) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में भिवाड़ी (190), बागपत (188) और गुरुग्राम (180) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के चार शहर (बहादुरगढ़, जींद, सोनीपत, गुरुग्राम) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि बहादुरगढ़, जींद, डोंबिवली, वडोदरा, सूरत, सोनीपत, भिवाड़ी, गुरुग्राम, अंकलेश्वर और धारूहेड़ा के साथ-साथ भिवंडी, खोरा, उज्जैन, चंद्रपुर, गांधीनगर, ब्रजराजनगर, भावनगर, हिसार, तालचेर, चरखी दादरी, मानेसर, हावड़ा, अहमदाबाद, मुंबई, पुणे, मेरठ, बोइसर, ग्रेटर नोएडा, जयपुर, ठाणे और नवी मुंबई आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं पीथमपुर, बागपत, मंडीदीप, पानीपत, फतेहाबाद, गाजियाबाद, उल्हासनगर, दिल्ली, नोएडा, सवाई माधोपुर, सिरसा, अगरतला, सतारा, फरीदाबाद, देवास, पिंपरी-चिंचवाड़, दौसा, भोपाल, कल्याण, उदयपुर, बर्नीहाट (मेघालय), पारादीप, बेलापुर, धुले, टोंक, मालेगांव, रोहतक, वातवा, जलना, बेगूसराय, हिंगोली, मंडी गोबिंदगढ़, भिवानी, कैथल, श्री गंगानगर, अंबाला, हनुमानगढ़, कुरुक्षेत्र, विशाखापत्तनम, फतेहपुर सीकरी, बैरकपुर, बद्दी, छपरा, जालोर, सीकर, बुलंदशहर, बूंदी, हल्दिया, जबलपुर, बारां, खैरथल, बल्लभगढ़, बीकानेर, चित्तौड़गढ़, मीरा-भायंदर, नारनौल और भीलवाड़ा आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 12.9 फीसदी यानी 34 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बिहार शरीफ, बिलासपुर, बक्सर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चिक्काबल्लापुर, कोयंबटूर, दावणगेरे, फिरोजाबाद, गडग, गंगटोक, हाजीपुर, काकीनाडा, कलबुर्गी, कानपुर, करनाल, कोरबा, कुरनूल, लखनऊ आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 137 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बालासोर, बारबिल, बारीपदा, बाड़मेर, बठिंडा, बीड, बेलगाम, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भुवनेश्वर, बिलीपाड़ा, बर्नीहाट (असम), चेन्नई, छाल, चित्तूर, चूरू, दमोह, देहरादून, धारवाड़, धौलपुर, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, गजरौला, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हावेरी, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कन्नूर, करौली, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोटा, कुंजेमुरा, लातूर, लेह, लुधियाना, महाड, मैहर, मंगलौर, मंगुराहा, मथुरा, मेहसाणा, मिलुपारा, मोदीनगर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नागौर, नागपुर, नलबाड़ी, नासिक, नयागढ़, पाली, पलवल, पंपोर, पंचगांव, परभणी, पटियाला, पटना, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पूर्णिया, रायबरेली आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 88 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अगरतला, अहमदाबाद, अंबाला, अंकलेश्वर, बद्दी, बागपत, बल्लभगढ़, बारां, बैरकपुर, बेगूसराय, बेलापुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, बीकानेर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट (मेघालय), चंद्रपुर, चरखी दादरी, छपरा, चित्तौड़गढ़, कटक, दौसा, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धुले, एलूर, फरीदाबाद, फतेहाबाद, फतेहपुर सीकरी, गांधीनगर, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, हल्दिया, हनुमानगढ़, हिंगोली, हिसार, हावड़ा, जबलपुर, जयपुर, जलना, जालोर, कैथल, कल्याण, खैरथल, खोरा, कुरुक्षेत्र, मालेगांव, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, मानेसर, मेरठ, मीरा-भायंदर, मुंबई, नांदेड़, नारनौल, नवी मुंबई, नोएडा, पानीपत, पारादीप, पिंपरी-चिंचवाड़, पुणे, रोहतक, सतारा, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरसा, सोनीपत, श्री गंगानगर, सूरत, तालचेर, ठाणे, टोंक, उदयपुर, उज्जैन, उल्हासनगर, वातवा, विशाखापत्तनम और वृंदावन शामिल हैं।
वहीं देश में आज बहादुरगढ़ (290), पीथमपुर (277), जींद (253), डोंबिवली (207), वडोदरा (207) में स्थिति खराब है। इन शहरों में सूचकांक 200 से ऊपर दर्ज किया गया है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 264 में से 34 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 137 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 07 अक्टूबर को यह आंकड़ा 134 दर्ज किया गया था।
88 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज एक बार फिर बहादुरगढ़ में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 290 दर्ज किया गया, जोकि ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (07 अक्टूबर) को बहादुरगढ़ में सूचकांक 285 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 5 अंकों का उछाल आया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में वृद्धि हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 136 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 162 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 26 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। फरीदाबाद में जहां कल एक्यूआई 92 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 144 दर्ज किया गया। मतबल की कल से वहां प्रदूषण में 52 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही वायु गुणवत्ता संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 08 अक्टूबर को डोंबिवली (207) चौथे स्थान पर है, वहीं पीथमपुर (277) दूसरे, जबकि जींद (253) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 98, गाजियाबाद में 166, गुवाहाटी में 75, गुरूग्राम में 180, नोएडा में 158, ग्रेटर नोएडा में 116 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 120 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 50, चेन्नई में 60, चंडीगढ़ में 49, हैदराबाद में 75, जयपुर में 116 और पटना में 71 दर्ज किया गया।
देश के जिन 34 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में आइजोल, बांसवाड़ा, बरेली, भिलाई, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बक्सर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चिक्काबल्लापुर, कोयंबटूर, दावणगेरे, फिरोजाबाद, गडग, गंगटोक, हाजीपुर, काकीनाडा, कलबुर्गी, कानपुर, करनाल, कोरबा, कुरनूल, लखनऊ, मदिकेरी, मंडीखेड़ा, नाहरलागुन, पंचकुला, पुडुचेरी, राजगीर, ऋषिकेश, सहरसा, शिलांग, त्रिशूर और उडुपी शामिल हैं।
वहीं आगरा, अहमदनगर, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्र प्रदेश), अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बालासोर, बारबिल, बारीपदा, बाड़मेर, बठिंडा, बीड, बेलगाम, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भुवनेश्वर, बिलीपाड़ा, बर्नीहाट (असम), चेन्नई, छाल, चित्तूर, चूरू, दमोह, देहरादून, धारवाड़, धौलपुर, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, गजरौला, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हावेरी, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कन्नूर, करौली, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोटा, कुंजेमुरा, लातूर, लेह, लुधियाना, महाड, मैहर, मंगलौर, मंगुराहा, मथुरा, मेहसाणा, मिलुपारा, मोदीनगर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नागौर, नागपुर, नलबाड़ी, नासिक, नयागढ़, पाली, पलवल, पंपोर, पंचगांव, परभणी, पटियाला, पटना, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पूर्णिया, रायबरेली, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, राउरकेला, रूपनगर, सासाराम, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिरोही, शिवसागर, सिवान, सोलापुर, श्रीनगर, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, तिरुमाला, तिरुपति, तुमडीह, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, विरार और यादगीर आदि 137 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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