वडोदरा में सांस लेना हुआ मुश्किल, 344 पर पहुंचा एक्यूआई, सिंगरौली में भी स्थिति बेहद खराब

01 फरवरी 2026 को देश में वडोदरा की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित रही, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 344 दर्ज किया गया
भारत की 96 फीसदी आबादी यानी 133 करोड़ लोग ऐसी हवा में सांस लेने को मजबूर हैं जहां पीएम 2.5 का वार्षिक औसत स्तर डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी मानकों से सात गुणा खराब है; फोटो: आईस्टॉक
भारत की 96 फीसदी आबादी यानी 133 करोड़ लोग ऐसी हवा में सांस लेने को मजबूर हैं जहां पीएम 2.5 का वार्षिक औसत स्तर डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी मानकों से सात गुणा खराब है; फोटो: आईस्टॉक
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सारांश
  • वडोदरा में वायु प्रदूषण की स्थिति 'बेहद खराब' है, जहां एक्यूआई 344 तक पहुंच गया। यह स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 2,100 फीसदी अधिक है।

  • सिंगरौली और चरखी दादरी में भी स्थिति चिंताजनक है।

  • दूसरी तरफ देश में शिलांग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 26 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर वडोदरा की तुलना शिलांग से करें तो वहां स्थिति 13 गुणा खराब है।

  • दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। हालांकि वहां आज भी वायु गुणवत्ता खराब बनी हुई है। दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 315 दर्ज किया गया था, जो 01 फरवरी को 50 अंकों की गिरावट के साथ घटकर 265 पर पहुंच गया।

  • 01 फरवरी 2026 को 237 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 5.1 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 30.4 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 64.6 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं।

विश्लेषण से पता चला है कि 01 फरवरी 2026 को देश में वडोदरा की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित रही, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 344 दर्ज किया गया। इससे पहले 31 जनवरी को वडोदरा में वायु गुणवत्ता सूचकांक 274 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 70 अंकों का भारी उछाल आया है। इसके साथ ही वडोदरा में वायु गुणवत्ता खराब से बेहद खराब हो गई है।                   

रुझानों में सामने आया है कि वडोदरा की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। 

वडोदरा में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,100 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में शिलांग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 26 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर वडोदरा की तुलना शिलांग से करें तो वहां स्थिति 13 गुणा खराब है।

इससे पहले कल देश में भिवाड़ी की हवा सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 349 दर्ज किया गया था। हालांकि आज 113 अंकों के सुधार के साथ भिवाड़ी में वायु गुणवत्ता सूचकांक 236 पर पहुंच गया है।

राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। हालांकि वहां आज भी वायु गुणवत्ता खराब बनी हुई है। कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 315 दर्ज किया गया था, जो 01 फरवरी को 50 अंकों की गिरावट के साथ घटकर 265 पर पहुंच गया। इससे पहले 18 जनवरी को दिल्ली में 2026 का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया।         

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 01 फरवरी 2026 को 237 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 5.1 फीसदी शहरों में हवा साफ है।

वहीं 30.4 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 64.6 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज भी हवा चिंताजनक बनी हुई है।

बता दें कि कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 71.4 फीसदी का इजाफा हुआ है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 13.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में करीब 1.7 फीसदी का इजाफा हुआ है। इसी तरह खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में भी कल से 36.8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। बेहद खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 50 फीसदी की कमी आई है, जोकि राहत की खबर है।

फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 160 (-37) रिकॉर्ड किया गया है।  

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में सिंगरौली (306) दूसरे जबकि चरखी दादरी (304) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 301 अंकों के साथ धारूहेड़ा चौथे स्थान पर है। अंगुल-अंकलेश्वर में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 300 और 274 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

दिल्ली (265) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में विशाखापत्तनम (261), कटक (259), नोएडा (252) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में गुजरात के दो (वडोदरा, अंकलेश्वर) और हरियाणा के दो शहर (चरखी दादरी, धारूहेड़ा) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि वडोदरा, सिंगरौली, चरखी दादरी, धारूहेड़ा, अंकलेश्वर, दिल्ली, विशाखापत्तनम, नोएडा, बागपत, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, भिवाड़ी, गुम्मिडीपूंडी, राजमहेंद्रवरम, गांधीनगर, वातवा, गुवाहाटी, बालासोर, डूंगरपुर, बारीपदा, कैथल, रोहतक, बीकानेर, नाहरलागुन, गुरुग्राम, क्योंझर, कुरुक्षेत्र, ग्रेटर नोएडा, देहरादून, बहादुरगढ़, मंडीदीप, अहमदाबाद, चित्तौड़गढ़, बेगूसराय, सूरत, बद्दी, बठिंडा, गया, पुणे, जींद, बर्नीहाट, प्रतापगढ़, उल्हासनगर, बदलापुर, फरीदाबाद, पाली, राजसमंद, पीथमपुर, कोल्लम, हाजीपुर, सोलापुर, उदयपुर, तुमकुरु, उज्जैन, सिलीगुड़ी, बेलापुर, चंडीगढ़, धुले, मेरठ, आसनसोल, मुजफ्फरपुर, तिरुपति, भीलवाड़ा, सीकर, झालावाड़, तालचेर, यमुना नगर, कोटा, नागांव, पिंपरी-चिंचवाड़, चित्तूर, तिरुवनंतपुरम, कानपुर, महाड आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं बल्लभगढ़, अमरावती (आंध्रप्रदेश), राजकोट, बिलीपाड़ा, लखनऊ, कुंजेमुरा, रतलाम, नागौर, बारबिल, सुआकाती, चूरू, हावड़ा, ब्रजराजनगर, चंद्रपुर, कल्याण, हनुमानगढ़, जालोर, पटना, बांसवाड़ा, भिवंडी, अलवर, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), सहरसा, कटिहार, जलना, नासिक, पटियाला, मंगुराहा, श्री गंगानगर, गोरखपुर, जलगांव, छपरा, हिसार, धारवाड़, खन्ना, लुधियाना, मंडीखेड़ा, रायरंगपुर, सवाई माधोपुर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 5.1 फीसदी यानी महज 12 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बागलकोट, चिक्कमगलुरु, फिरोजाबाद, करौली, किशनगंज, मदिकेरी, पंचकुला, पेरुंदुरई, रामनाथपुरम, शिलांग, श्रीनगर, थूथुकुडी आदि शामिल हैं। 

आज देश के जिन 72 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें भोपाल, बिलासपुर, बूंदी, चामराजनगर, छाल, चिक्काबल्लापुर, कोयंबटूर, दमोह, दौसा, दावनगेरे, देवास, धौलपुर, फतेहाबाद, गंगटोक, ग्वालियर, हापुड़, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जालंधर, झांसी, कडप्पा, कलबुर्गी, कन्नूर, करनाल, खुर्जा, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, मदुरै, मुरादाबाद, मोतिहारी, मैसूर, पलवल, पंपोर, पंचगांव, प्रयागराज आदि शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 123 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारबिल, बठिंडा, बेगूसराय, बेलापुर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलीपाड़ा, बोइसर, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बर्नीहाट, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चेन्नई, छपरा, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, देहरादून, धनबाद, धारवाड़, धुले, दुर्गापुर, फरीदाबाद, गया, गोरखपुर, ग्रेटर नोएडा, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हिसार, हावड़ा, इंदौर, जयपुर, जैसलमेर, जलगांव, जलना, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कल्याण, कानपुर, कटिहार, कटनी, खन्ना, कोलकाता, कोल्लम, कोटा, कुंजेमुरा, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, महाड, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मानेसर, मंगुराहा, मेरठ, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागौर, नागपुर, नांदेड़, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, पाली, पानीपत, परभनी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, पुणे, रायपुर, रायरंगपुर, राजकोट, राजसमंद, रतलाम, राउरकेला, सहरसा, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलीगुड़ी, सिरसा, सोलापुर, श्री गंगानगर, सुआकाती, सूरत, तालचेर, तिरुवनंतपुरम, तिरुमाला, तिरुपति, टोंक, तुमकुरु, उदयपुर, उज्जैन, उल्हासनगर, वापी, विरार, यादगीर, यमुना नगर शामिल हैं।

आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 26 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में अंगुल, अंकलेश्वर, बागपत, बालासोर, बारीपदा, भिवाड़ी, बीकानेर, ब्यासनगर, कटक, दिल्ली, डूंगरपुर, गांधीनगर, गाजियाबाद, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, गुवाहाटी, कैथल, क्योंझर, कुरुक्षेत्र, मुजफ्फरनगर, नाहरलागुन, नोएडा, राजमहेंद्रवरम, रोहतक, वातवा, विशाखापत्तनम शामिल हैं।

वहीं चरखी दादरी, धारूहेड़ा, सिंगरौली, वडोदरा में वायु गुणवत्ता 'बेहद खराब' है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 237 में से महज 12 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 72 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 31 जनवरी 2026 को यह आंकड़ा 83 दर्ज किया गया था।

123 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज वडोदरा (344) में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक वडोदरा में कल से एक्यूआई में 70 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही वायु गुणवत्ता खराब से बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गई है। बता दें 31 जनवरी को वडोदरा में एक्यूआई 274 दर्ज किया गया था।   

इससे पहले कल देश में भिवाड़ी की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब एक्यूआई बढ़कर 349 तक पहुंच गया था। हालांकि आज 113 अंकों के सुधार के साथ भिवाड़ी में सूचकांक 236 पर पहुंच गया है।

दिल्ली में 01 फरवरी को प्रदूषण में गिरावट दर्ज की गई। दिल्ली में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक 315 दर्ज किया गया, जो आज (01 फरवरी) घटकर 265 पर पहुंच गया। मतलब कि कल से दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में 50 अंकों का सुधार आया है। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 1,600 फीसदी अधिक खराब है।  

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है, जहां सूचकांक 160 (-37) रिकॉर्ड किया गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।   

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 01 फरवरी को धारूहेड़ा चौथे स्थान पर है, वहीं सिंगरौली (306) दूसरे, जबकि चरखी दादरी (304) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 73, गाजियाबाद में 243, गुवाहाटी में 224, गुरूग्राम में 206, नोएडा में 252, ग्रेटर नोएडा में 200 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 105 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 175, चेन्नई में 103, चंडीगढ़ में 144, हैदराबाद में 94, जयपुर में 116 और पटना में 126 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 12 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें बागलकोट, चिक्कमगलुरु, फिरोजाबाद, करौली, किशनगंज, मदिकेरी, पंचकुला, पेरुंदुरई, रामनाथपुरम, शिलांग, श्रीनगर, थूथुकुडी शामिल हैं।

वहीं आइजोल, अजमेर, अकोला, अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, आरा, बरेली, बाड़मेर, बैरकपुर, बेलगाम, बेंगलुरु, बेतिया, भागलपुर, भरतपुर, भिलाई, भोपाल, बिलासपुर, बूंदी, चामराजनगर, छाल, चिक्काबल्लापुर, कोयंबटूर, दमोह, दौसा, दावनगेरे, देवास, धौलपुर, फतेहाबाद, गंगटोक, ग्वालियर, हापुड़, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जालंधर, झांसी, कडप्पा, कलबुर्गी, कन्नूर, करनाल, खुर्जा, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, मदुरै, मुरादाबाद, मोतिहारी, मैसूर, पलवल, पंपोर, पंचगांव, प्रयागराज, पुदुचेरी, पूर्णिया, राजगीर, रामनगर, ऋषिकेश, सागर, समस्तीपुर, सांगली, सासाराम, सतना, सिरोही, शिवसागर, सिवान, ठाणे, त्रिशूर, वाराणसी, विजयवाड़ा, वृंदावन आदि 72 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:

एनसीआर में फिर छाया प्रदूषण, भिवाड़ी सबसे आगे, दिल्ली में भी 315 पर पहुंचा एक्यूआई

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